Bihar PM Kisan: जमीन के कागजों ने बढ़ाई किसानों की टेंशन, रुक सकती है किस्त, लिस्ट में आपका नाम भी तो नहीं?
Bihar PM Kisan Samman Nidhi Yojana: प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत चल रहा फार्मर रजिस्ट्रेशन अभियान अब किसानों के लिए बड़ी मुसीबत का सबब बन गया है। उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में तकनीकी खामियों और कड़े नियमों के कारण 60 प्रतिशत से ज्यादा किसानों का पंजीकरण अब तक अधूरा है। प्रशासन के कड़े रुख ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, क्योंकि साफ कहा गया है कि बिना ई-केवाईसी और रजिस्ट्रेशन के अगली किस्त जारी नहीं की जाएगी।
खाद, बीज और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच किसान अंचल कार्यालयों और शिविरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन जमीन के कागजों में विसंगति और 'सर्वर डाउन' होने जैसी समस्याओं के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। जिले के कुल 1.87 लाख लाभार्थियों में से अब तक मात्र 28 हजार किसान ही प्रक्रिया पूरी कर पाए हैं, जो एक बड़ी विफलता की ओर इशारा कर रहा है।

PM Kisan Yojana: अगली किस्त पर मंडराया संकट
महंगाई के इस दौर में ₹2,000 की किस्त किसानों के लिए खेती का आधार है। बहेड़ी और बिरौल जैसे इलाकों के किसानों का कहना है कि मौसम की मार और महंगे इनपुट्स के बीच यदि यह सहायता रुकी, तो खेती करना असंभव हो जाएगा।
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अनिवार्यता: रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी को अब भुगतान के लिए 'अनिवार्य' (Mandatory) श्रेणी में रखा गया है।
आर्थिक दबाव: डीजल और खाद की कीमतों में उछाल के कारण किसान इस सरकारी मदद पर काफी हद तक निर्भर हैं।
PM Kisan: जमीन के नाम पर सबसे बड़ी अड़चन
योजना के नए नियमों के अनुसार, लाभ केवल उन्हें मिलेगा जिनके नाम पर जमीन दर्ज है। यहीं से असली समस्या शुरू होती है:
विरासत का मुद्दा: बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो बरसों से खेती कर रहे हैं, लेकिन जमीन अभी भी उनके पिता या दादा के नाम पर है।
शिविरों से वापसी: ऐसे किसानों को शिविरों से यह कहकर लौटाया जा रहा है कि पहले जमीन अपने नाम कराएं (नामांतरण), फिर रजिस्ट्रेशन होगा।
अंचल कार्यालयों की सुस्ती: नामांतरण के लिए दिए गए आवेदन महीनों से लंबित हैं, जिससे किसान दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
PM Kisan: शिविरों का हाल, लंबी लाइनें और कछुआ चाल
पंचायत स्तर पर लगाए गए विशेष शिविरों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है:
धीमी प्रक्रिया: कई शिविरों में रोजाना महज 25 से 30 किसानों का ही सत्यापन हो पा रहा है।
त्रुटियों की मार: आधार कार्ड और खतियान में नाम की स्पेलिंग, पिता के नाम में मामूली फर्क या उपनाम अलग होने पर सीधे आवेदन रद्द किए जा रहे हैं।
तकनीकी बाधा: धीमा इंटरनेट और पीएम किसान पोर्टल का सर्वर बार-बार डाउन होने से कर्मचारी और किसान दोनों बेबस हैं।
PM Kisan: आंकड़ों में जिले की तस्वीर, एक नजर में
जिला कृषि विभाग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
कुल लाभार्थी किसान: 1,87,165
सफल रजिस्ट्रेशन और ई-केवाईसी: मात्र 28,209
पेंडिंग मामले: लगभग 1,58,956 (85% के करीब)
PM Kisan e-KYC और Farmer ID कैसे बनवाएं?
बिहार में पीएम किसान योजना की अगली किस्त के लिए eKYC और फार्मर रजिस्ट्री अनिवार्य है। प्रक्रिया नीचे दी गई है:
1. ऑनलाइन (OTP के जरिए)
- वेबसाइट: [dbtagriculture.bihar.gov.in/regfarmer/pmkisanadmin/pmkisanyojna] पर जाएं।
- स्टेप: 'e-KYC' विकल्प चुनें > आधार नंबर डालें > आधार लिंक मोबाइल पर आए OTP को सबमिट करें।
2. ऑफलाइन (CSC/वसुधा केंद्र)
- नजदीकी वसुधा केंद्र पर जाएं।
- बायोमेट्रिक (अंगूठे के निशान) के जरिए केवाईसी कराएं। (छोटा शुल्क देय हो सकता है)।
3. फेस स्कैन (App के जरिए)
- 'PM-Kisan GoI' ऐप डाउनलोड करें।
- फेस ऑथेंटिकेशन का उपयोग कर घर बैठे केवाईसी पूरी करें।
4. बिहार के लिए जरूरी: 'फार्मर रजिस्ट्री'
बिहार सरकार अब यूनिक किसान आईडी बना रही है।
इसके लिए अपने कृषि सलाहकार से मिलें या ब्लॉक में कैंप के माध्यम से जमीन के कागजात (LPC) और आधार लिंक कराएं।
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