पंजाब आतंकी साजिश मामले में एनआईए कोर्ट ने तीन लोगों को कठोर कारावास की सजा सुनाई
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने 2018 के एक आतंकी साजिश मामले में अपनी संलिप्तता के लिए तीन व्यक्तियों को कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन अंसार गज़वत-उल-हिंद से जुड़ा है और इसमें जालंधर के एक हॉस्टल के कमरे से हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए थे।

मोहाली, पंजाब में एनआईए की विशेष अदालत ने सोमवार को ज़ाहिद गुलज़ार, यासिर रफीक भट और मोहम्मद इदरीस शाह को दोषी ठहराया। एनआईए के एक बयान के अनुसार, गुरुवार को सजा सुनाई गई। भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम सहित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के तहत सजा पांच से दस साल के कठोर कारावास तक है।
बरी और मामले की पृष्ठभूमि
एक अन्य आरोपी, सुहैल अहमद भट को इस मामले में बरी कर दिया गया है। अक्टूबर 2018 में पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इस मामले को सरकारी निर्देशों के बाद नवंबर 2018 में एनआईए को हस्तांतरित कर दिया गया था। पंजाब पुलिस द्वारा जालंधर के शाहपुर स्थित सीटी इंस्टीट्यूट हॉस्टल में तलाशी अभियान चलाने के बाद यह जांच शुरू हुई, जिसमें आरोपियों द्वारा अधिकृत एक कमरे से हथियार और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी।
जब्त सामग्री
जब्त की गई वस्तुओं में एक AK-56 राइफल, मैगज़ीन, जिंदा कारतूस और विस्फोटक सामग्री शामिल थी। एनआईए की जांच से पता चला कि आरोपियों ने भारतीय सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के इरादे से अंसार गज़वत-उल-हिंद की गतिविधियों को बढ़ावा देने की साजिश रची थी।
जांच और मुकदमा
एनआईए ने व्यापक मौखिक, दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक और फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र करते हुए एक गहन जांच की। गवाहों के बयानों की भी जांच की गई। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा कुल 64 गवाह पेश किए गए। यह परिणाम पंजाब पुलिस और एनआईए के सहयोगात्मक प्रयासों का नतीजा है।
With inputs from PTI












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