बिहार में एक ऐसा मंत्री जो बना लेटर बॉक्स
पटना। बिहार एक ऐसा प्रदेश है जो हमेशा ऐसी खबरों को लेकर सुर्खियों में रहता है जिससे इस प्रदेश की छवि धूमिल होती है। दशहरे के मौके पर भगदड़ के बाद मुख्यंत्री के बयान पर गौर करे तो उन्हें इस घटना के बाद काफी समय तक इसकी जानकारी नहीं थी। वहीं बिहार के ही मदरसे में लड़कियों के प्रवेश नहीं करने का फरमान यह कहकर जारी कर दिया जाता है कि लड़को के साथ लड़कियों का पढ़ना धर्म के खिलाफ है। इसी कड़ी में एक और इबारत लिखी है बिहार के स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह ने।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री से संवाददाताओं द्वारा दवा घोटाले के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा "विभाग में क्या हो रहा है, मुझे पता नहीं चलता। मैं सिर्फ हस्ताक्षर करता हूं। मैं लेटर बॉक्स हूं। जो आता है, ऑर्डर दे देता हूं।" दवा घोटाले पर आगे की कार्रवाई के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मुझे कुछ पता नहीं है, जब कार्रवाई हो जाती है, तब मुझे इसका पता चलता है। जब मुझे पता चलेगा तब आपको भी बता दिया जाएगा।"
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने दो दिन पूर्व दो करोड़ रुपये की दवा खरीद घोटाले में कथित संलिप्तता के लिए चार अधिकारियों को निलंबित किया है और चार अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। बिहार सरकार द्वारा दवा घोटाले में गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही कारवाई की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार चिकित्सा सेवा अधोसंरचना निगम लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) ने स्टेट हेल्थ सोसायटी द्वारा तय दर से अधिक दर पर 14.48 करोड़ रुपये की दवाइयां खरीदी।
इसके अलावा बीएमएसआईसीएल ने मेडिपोल और लैबोरेट से 19.60 करोड़ रुपये की दवाइयां खरीदीं। ये कंपनियां दूसरे राज्यों की काली सूची में शामिल हैं। इधर, मुख्यमंत्री मांझी ने सोमवार को कहा कि जांच रिपोर्ट के अनुसार, जो अधिकारी दोषी थे, उन पर कारवाई की गई है।












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