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Exit Poll 2025: मुस्लिम सीट पर BJP की स्वीटी सिंह इस बार खिला सकती हैं कमल! अगर ऐसा हुआ तो बन जाएगा इतिहास

Kishanganj Election 2025 Exit Poll: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीमांचल की किशनगंज सीट एक बार फिर सुर्खियों में है। यह वही सीट है जिसे अब तक मुस्लिम बहुल इलाका और कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग दिख रही है। एग्जिट पोल के ताजा आंकड़े बता रहे हैं कि भाजपा की स्वीटी सिंह यहां से इतिहास रच सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो यह 58 साल बाद पहली बार होगा जब किसी हिंदू उम्मीदवार की जीत इस सीट से दर्ज होगी।

किशनगंज सीट: जहां हर चुनाव में होता है चमत्कार

किशनगंज विधानसभा सीट बिहार की सबसे चर्चित मुस्लिम बहुल सीटों में से एक है। यहां करीब 70 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं और परंपरागत तौर पर यह कांग्रेस की मजबूत सीट रही है। 1967 के बाद से अब तक किसी हिंदू उम्मीदवार को यहां से जीत नहीं मिली। आखिरी बार सुशीला कपूर (प्रजा सोशलिस्ट पार्टी) ने यह सीट जीती थी। लेकिन एग्जिट पोल में संभावना है कि इस बार स्वीटी सिंह जीत सकती हैं। द न्यूज पिंच ने किशनगंज विधानसभा सीट पर NDA को बढ़त दिखाई है।

Kishanganj Election 2025 Exit Poll

पिछले चुनाव में कांग्रेस के इजहाऱुल हुसैन ने 61,078 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि स्वीटी सिंह को 59,697 वोट और एआईएमआईएम के कमरुल होदा को 41,904 वोट मिले थे। अब 2025 के एग्जिट पोल में स्वीटी सिंह आगे बताई जा रही हैं-यानी किशनगंज की सियासत का पुराना समीकरण बदल सकता है।

कांग्रेस की मुश्किलें और एआईएमआईएम का खेल

इस बार कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने अपने सिटिंग विधायक का टिकट काटकर कमरुल होदा को उम्मीदवार बनाया है, जो पहले एआईएमआईएम से विधायक रह चुके हैं। वहीं एआईएमआईएम ने इस बार शम्स अघाज को मैदान में उतारा है। इससे मुस्लिम वोटों में विभाजन की संभावना बढ़ गई है, जिसका सीधा फायदा बीजेपी की स्वीटी सिंह को मिल सकता है।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर मुस्लिम वोट दो हिस्सों में बंटे, तो बीजेपी को रिकॉर्ड जीत मिल सकती है-वो भी ऐसी सीट पर जहां भाजपा अब तक सिर्फ "प्रतिस्पर्धा में मौजूद" मानी जाती थी।

कौन हैं स्वीटी सिंह?

46 वर्षीय स्वीटी सिंह पेशे से वकील हैं और पिछले डेढ़ दशक से किशनगंज में बीजेपी का सबसे चर्चित चेहरा मानी जाती हैं। वे लगातार 2010, 2015 और 2020 में यहां से चुनाव लड़ चुकी हैं। हर बार हार का अंतर बेहद कम रहा-2010 में सिर्फ 264 वोट, 2015 में 8,609 वोट, और 2020 में 1,381 वोट से हार।

इतनी करीबी हारों ने साबित किया कि स्वीटी सिंह मुस्लिम बहुल इलाकों में भी बीजेपी के लिए एक मजबूत चेहरा बन चुकी हैं। एग्जिट पोल रुझानों में उन्हें बढ़त मिलना इस बात का प्रमाण है कि किशनगंज की जनता बदलाव के मूड में है।

इतिहास दोहराने की तैयारी

अगर एग्जिट पोल के नतीजे 14 नवंबर को आए वास्तविक नतीजों में भी दोहराए गए, तो स्वीटी सिंह न सिर्फ बीजेपी के लिए बल्कि बिहार की सियासत के इतिहास में भी नई कहानी लिखेंगी क्योंकि 1967 के बाद यह पहला मौका होगा जब इस सीट से कोई हिंदू उम्मीदवार विधानसभा पहुंचेगा-वो भी एक ऐसी पार्टी से, जिसे अब तक यहां "असंभव खिलाड़ी" कहा जाता था।

किशनगंज के मतदाता इस बार क्या फैसला सुनाएंगे, यह 14 नवंबर को साफ होगा। लेकिन एक बात तय है अगर एग्जिट पोल सही निकले, तो किशनगंज में 'कमल' सच में खिलने वाला है।

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