Bihar Election Result 2025: NDA की सूनामी में भी कैसे 5 सीटें जीत गए ओवैसी? किस तरह बिगाड़ा महागठबंधन का खेल
Bihar Election Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आते ही सबसे चौंकाने वाली तस्वीर सीमांचल से सामने आई। NDA की प्रचंड जीत के बीच AIMIM ने न सिर्फ अपनी पुरानी पकड़ वापस हासिल की, बल्कि 5 सीटें जीतकर पूरे राजनीतिक गणित को बदल दिया। जहां एक तरफ NDA 202 सीटों के साथ भारी बहुमत में लौटा, वहीं महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। लेकिन इस हलचल में जो सबसे बड़ा सवाल उभरा जब NDA की सूनामी चली, तब ओवैसी कैसे अपनी पूरी ताकत के साथ वापसी कर गए?
AIMIM ने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और इनमें से 5 सीटें जीत लीं। खास बात यह कि उन्होंने सिर्फ अपनी सीटें नहीं बचाईं, बल्कि अकेले दम पर महागठबंधन की 8 सीटों पर सीधे नुकसान का कारण बने। यानी ओवैसी अकेले सीमांचल में 'किंगमेकर' और 'स्पॉयलर' दोनों बने।

ओवैसी ने क्यों मांगी थीं सीमांचल की 6 सीटें और RJD ने क्यों ठुकरा दिया?
चुनाव से पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने खुलकर कहा था कि वे RJD के साथ गठबंधन चाहते हैं। दावा किया कि मुस्लिम-ओबीसी वोट को एकजुट रखा जाए, वरना नुकसान होगा। RJD के तेजस्वी यादव ने AIMIM की मांग ठुकरा दी। सीमांचल की 6 सीटें देने से इनकार कर दिया और यही फैसला महागठबंधन के लिए भारी पड़ा।
तेजस्वी की इसी 'ना' ने AIMIM को पूरा मैदान दे दिया। ओवैसी ने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारकर साफ मैसेज दे दिया कि सीमांचल में AIMIM अब 'गेस्ट पार्टी' नहीं रही बल्कि 'ग्राउंड पार्टी' है। नतीजा 5 सीटों पर शानदार जीत 8 सीटों पर महागठबंधन को नुकसान।
सीमांचल का समीकरण क्यों बदल गया?
सीमांचल मुस्लिम बहुल इलाका है और 2020 में भी AIMIM ने यही 5 सीटें जीती थीं। बाद में उनमें से 4 विधायक RJD में चले गए। इससे लोगों में नाराजगी पैदा हुई कि RJD केवल जीतते हुए चेहरों को तोड़ती है, लोकल लीडरशिप को आगे नहीं बढ़ाती।
2025 में AIMIM ने इस नाराजगी को पूरी रणनीति के साथ भुनाया-नए उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दों की तेज आवाज, 'इंसाफ' और 'पहचान' की राजनीति, मुस्लिम वोटरों के भीतर RJD की अनदेखी का सवाल। सीमांचल में मुस्लिम वोट लंबे समय से RJD का कोर वोट माना जाता था, लेकिन AIMIM ने उसी वोट बैंक में गहरी सेंध लगा दी।
AIMIM कौन-कौन सी 5 सीटें जीतीं?
- अमौर: AIMIM के अख्तरुल ईमान ने 1 लाख से ज्यादा वोट हासिल कर JDU को बड़े अंतर से हराया। 2020 में भी यही जीते थे और पार्टी का 'सबसे मजबूत चेहरा' बनकर निकले।
- बायसी: AIMIM उम्मीदवार गुलाम सरवर ने जीत दर्ज की, BJP दूसरे नंबर पर चली गई और RJD तीसरे पर।
- बहादुरगंज: AIMIM नेता तौसीफ आलम ने कांग्रेस उम्मीदवार को भारी अंतर से हराया।
- कोचाधामन: AIMIM प्रत्याशी मोहम्मद सरवर ने RJD और BJP दोनों को पीछे छोड़ा।
- जोकीहाट: AIMIM नेता मुर्शीद आलम ने RJD के मौजूदा विधायक को धूल चटाई।
ये सभी सीटें मुस्लिम बहुल इलाकों में हैं, जहां AIMIM ने अपनी पकड़ फिर साबित की।
AIMIM का स्ट्राइक रेट क्यों चमका और RJD क्यों फेल?
- AIMIM ने 28 सीटों पर लड़ा और 5 सीटें जीत लीं, यानी स्ट्राइक रेट करीब 18%। वहीं RJD ने 143 सीटों पर लड़कर सिर्फ 25 सीटें जीतीं यानी स्ट्राइक रेट 17% से भी कम।
- RJD के स्ट्राइक रेट कम रहने के पीछे की वजह RJD के उम्मीदवार चयन में भारी असंतोष, स्थानीय मुद्दों की अनदेखी,
- युवा मुस्लिम मतदाताओं में AIMIM की रीच बढ़ना, ओवैसी की सीधी और आक्रामक चुनावी लाइन, सीमांचल में RJD के 'MY समीकरण' का कमजोर होना।
- RJD के नेताओं पर AIMIM का आरोप भी रहा कि वे मुस्लिम वोटरों को 'for granted' लेते हैं। यह नाराजगी वोट में बदल गई।
8 सीटें कैसे हार गया महागठबंधन, AIMIM बना सबसे बड़ा 'स्पॉयलर'
AIMIM ने अकेले 10 सीटों पर इतना वोट लिया कि उसकी वजह से हार-जीत का अंतर बदल गया। इनमें से 8 सीटें ऐसी हैं जहां सीधे महागठबंधन को नुकसान हुआ। महागठबंधन के लिए यह चुनाव AIMIM की सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आया।
- प्राणपुर: AIMIM को 30 हजार वोट मिले, RJD सिर्फ 7,700 वोट से हारी।
- कसबा: AIMIM के 35 हजार वोटों ने कांग्रेस को सीधे हराया।
- गोपालगंज: कांग्रेस मुकाबले से बाहर, AIMIM ने 14 हजार वोट ले लिए।
- महुआ: यादव-मुस्लिम वोट तीन हिस्सों में बंटे, LJP(R) जीत गई।
- शेरघाटी: AIMIM + जन सुराज के वोटों ने RJD की राह रोकी।
- केवटी: AIMIM को मिले 7,400 वोट, RJD 7,305 वोट से ही हारी।
- दरभंगा ग्रामीण: AIMIM के 17 हजार वोटों ने RJD को मुकाबले से दूर कर दिया।
- अररिया: यहां NDA को चोट पहुंचाई-AIMIM के वोटों ने कांग्रेस को जीतने में मदद की।
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन औवेसी क्या बोले?
AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन औवेसी ने कहा,"मैं सीमांचल की जनता का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने हमारे 5 विधायकों को जिताया, हम आज भी सीमांचल के इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह बिहार की जनता का फैसला है और हमें इसे इज्जत की निगाहों से स्वीकार करना है"
AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने RJD पर निशाना साधते हुए कहा, "मुस्लिम वोट ना बंटें, इसलिए हमने गठबंधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन RJD का घमंड भारी पड़ गया।" यही बयान AIMIM की चुनावी रणनीति का 'कोर मैसेज' था, सीमांचल के मुद्दों को लेकर RJD की चुप्पी और AIMIM की मुखर राजनीति।
NDA की लहर में भी ओवैसी कैसे टिके रहे? जवाब-सीमांचल में जमीन, नाराजगी और रणनीति
ओवैसी ने सीमांचल की राजनीति को सिर्फ 'मुस्लिम वोट बैंक' के चश्मे से नहीं देखा। वे वहां के स्थानीय मुद्दों बाढ़, शिक्षा, विकास, पहचान को आवाज देते रहे। RJD ने इस क्षेत्र को हल्के में लिया और AIMIM ने इसका पूरा फायदा उठाया।
इस चुनाव का सबसे बड़ा संकेत यह है कि सीमांचल अब बिहार की राजनीति में 'किंगमेकर बेल्ट' बन चुका है, और AIMIM उसकी सबसे मजबूत आवाज।
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