Bihar Election 2025: कांग्रेस या अन्य सहयोगी दल? तेजस्वी यादव को CM चेहरा बनाने में अड़चन कौन?
Bihar Election 2025: बिहार में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए विपक्षी इंडिया ब्लॉक यानी महागठबंधन अपनी चुनावी रणनीतियों को तैयार करने में लगी है। बीते दिन 17 अप्रैल को पटना में तीन घंटे से अधिक समय तक बैठक की गई। इस बैठक में राजद, कांग्रेस, वामपंथी और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) शामिल हुई। बैठक में इतना तो साफ कर दिया गया है कि ये चुनाव विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) लीड करेंगे। लेकिन महागठबंधन का ''सीएम फेस'' कौन होगा? इसपर कोई फैसला नहीं हो पाया है।
अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर तेजस्वी यादव को लेकर सीएम उम्मीदवारी का ऐलान क्यों नहीं किया गया? जहां एक ओर बैठक से पहले आरजेडी ने तेजस्वी यादव को सीएम फेस बता दिया था, वीआईपी के प्रमुख मुकेश साहनी ने भी तेजस्वी को छोटा भाई कहते हुए सीएम बनाने तक की बात कह डाली थी। दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से मुलाकात भी हो चुकी थी। फिर इस बैठक में ऐसा क्या हुआ कि 'सीएम फेस' को लेकर सस्पेंस बना रहा।

क्या तेजस्वी को को-ऑर्डिनेशन कमेटी का अध्यक्ष बना झुनझुना पकड़ा गया?
पटना में हुई इस बैठक में को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाने का फैसला लिया गया। जिसका अध्यक्ष तेजस्वी यादव को बनाया गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस को-ऑर्डिनेशन कमेटी बनाने का ऐलान किया गया। इसमें महागठबंधन में शामिल हर दल के 2-2 सदस्य होंगे। कुल इसमें 13 मेंबर होंगे। ये कमेटी ही बिहार चुनाव को लेकर सभी फैसले करेगी, जिसकी कमान तेजस्वी यादव को दी गई है।
जब प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सीएम फेस को लेकर सवाल किया गया तो कोई साफ जवाब नहीं दिया गया। वहीं सीएम फेस पर तेजस्वी यादव ने कहा, ''थोड़ा इंतजार का मजा लीजिए, सभी बातों पर सहमति बन गई है लेकिन एक ही दिन में सारे फैसले नहीं बताए जाते।''
तेजस्वी यादव ने आगे कहा, "हमने कई मुद्दों पर चर्चा की और सर्वसम्मति से पलायन और बेरोजगारी के मुद्दों को उठाने का फैसला किया। हमें इस 20 साल पुरानी जर्जर सरकार से छुटकारा पाने की जरूरत है। नीतीश कुमार द्वारा लोगों के जनादेश का अनादर करने और उनके लगातार पलटवार के कारण, पिछले 13 सालों से राज्य में स्थिर सरकार नहीं है।"
आखिर क्यों CM फेस पर बना सस्पेंस?
सभी नेताओं ने दावा किया कि महागठबंधन में किसी भी विषय पर कोई मतभेद नहीं है। कुछ नेता इस ओर इशारा कर रहे हैं कि तेजस्वी चाहते हैं कि किसी बड़े मंच से कांग्रेस नेतृत्व उनको सीएम चेहरा बनाने का ऐलान करे। हालांकि पर्दे के पीछे जो भी कहानी चल रही हो लेकिन सवाल अब भी वही है कि जब बिहार चुनाव को लीड करने के लिए तेजस्वी यादव का नाम आगे किया जा सकता है तो फिर सीएम उम्मीदवारी घोषित करने में क्या परेशानी है? कांग्रेस या अन्य छोटे सहयोगियों...आखिर किसे तेजस्वी का सीएम फेस होना मंजूर नहीं है?

आरजेडी भले ही तेजस्वी को सीएम चेहरे के रूप में पेश करने के लिए उत्सुक है। लेकिन कांग्रेस के नेता सतर्क हैं क्योंकि भाजपा पहले ही "लालू-राबड़ी जंगल राज" की कहानी को पुनर्जीवित कर चुकी है। दूसरी ओर आरजेडी ने भी कांग्रसे को बता दिया है कि वह 2020 की गलतियों को दोहराना नहीं चाहती है। यानी इस बार आरजेडी कांग्रेस को 70 सीटें देने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में कांग्रेस को भी ये समझ में आ रहा है कि बिहार चुनाव में महागठबंधन का सबसे बड़ा खिलाड़ी आरजेडी ही है। 2020 के बिहार चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी आरजेडी की पैन बिहार पर पकड़ है। राजनीतिक एक्सपर्ट का कहना है कि कांग्रेस के पास इस बिहार चुनाव में खोने के लिए कुछ नहीं है...पिछले चुनाव में 70 सीटों पर लड़ने के बाद भी 19 सीटों पर जीत पाई थी। लेकिन फिर भी कांग्रेस तेजस्वी यादव पर दबाव बना रही है।
तेजस्वी यादव भी दबाव सह रहे हैं क्योंकि वो भी जानते हैं कि कांग्रेस के साथ ना रहने से उनके अल्पसंख्यक वोट खिसक सकते हैं और पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर भी नुकसान हो सकता है। अब ये देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस और आरजेडी में सीएम फेस को लेकर कब सहमति बनती है। फिलहाल के लिए ऐसा लगता है कि तेजस्वी को को-ऑर्डिनेशन कमेटी का अध्यक्ष बना कांग्रेस ने झुनझुना पकड़ा दिया है। रही बात अन्य छोटे सहयोगी दलों की तो उन्होंने पहले ही तेजस्वी यादव को अपना नेता बताया है।
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार बोले- महागठबंधन में CM फेस को लेकर कोई उलझन नहीं है
सासाराम सुरक्षित सीट से कांग्रेस के सांसद मनोज कुमार ने कहा है कि महागठबंधन में सीएम फेस को लेकर कोई उलझन नहीं है। उन्होंने कहा, 'सीएम फेस तय करना, हमारे लिए कोई बड़ी बात नहीं है, हम एक घंटे में सीएम फेस तय कर लेंगे।' मनोज कुमार ने यह भी कहा कि उनमें (तेजस्वी में) मुख्यमंत्री बनने की योग्यता है और हम उनका समर्थन भी करते हैं।
वहीं मुकेश साहनी ने दावा किया ''इस बार महागठबंधन की सरकार बनेगी और तेजस्वी यादव ही सीएम बनेंगे और मैं निषाद का बेटा डिप्टी सीएम बनूंगा।''
वहीं पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कहा है कि मुख्यमंत्री का चेहरा चुनाव के बाद तय किया जाना चाहिए। पप्पू यादव ने कहा कि तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला आरजेडी का हो सकता है लेकिन कांग्रेस की इसमें अहम भूमिका होनी चाहिए। हर पार्टी अपने ही नेता को सीएम और डिप्टी सीएम बनाना चाहती है लेकिन चुनाव नतीजों के बाद इसका फैसला होना ही सही है।
महागठबंधन में क्या होगा सीट शेयरिंग का फॉर्मूला?
हालांकि, सूत्रों ने बताया कि महागठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला क्या होगा...इसपर फिलहाल कोई चर्चा नहीं हुई है। राजद के एक नेता ने कहा, "कांग्रेस नेतृत्व और सीट बंटवारे पर बातचीत में देरी करके सफल रही, जबकि राजद तेजस्वी के नेतृत्व में समन्वय समिति गठित करने में सफल रही।" सूत्रों के मुताबिक को-ऑर्डिनेशन कमेटी नाव से पहले सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श करेगी, जिसमें सीट बंटवारा, अभियान के मुद्दे और संयुक्त अभियान शामिल हैं।












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