कौन हैं रितु जायसवाल, जिन्होंने RJD के खिलाफ खोला मोर्चा, परिहार से निर्दलीय लड़ेंगी चुनाव, पति हैं IAS अफसर
Bihar Election 2025 (Ritu Jaiswal): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में टिकट बंटवारे को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर बड़ा बवाल मच गया है। पार्टी की चर्चित महिला नेता रितु जायसवाल ने खुलेआम अपनी ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टिकट कटने से नाराज रितु जायसवाल अब सीतामढ़ी जिले की परिहार विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने जा रही हैं। यही नहीं, उन्होंने सोशल मीडिया पर जनता के नाम भावनात्मक संदेश लिखते हुए अपने फैसले का ऐलान भी कर दिया है।
रितु जायसवाल आरजेडी महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष हैं और पार्टी की सक्रिय महिला नेताओं में से एक मानी जाती हैं। 19 अक्टूबर को जब पार्टी ने परिहार सीट से डॉ. रामचंद्र पूर्वे की बहू स्मिता पूर्वे को टिकट दिया, तो रितु जायसवाल ने इसे अन्याय करार दिया। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (ट्विटर) पर लिखा - "परिहार को छोड़कर किसी अन्य क्षेत्र से चुनाव लड़ना मेरी आत्मा को स्वीकार नहीं। यह फैसला आसान नहीं है, लेकिन यह मेरे मन की आवाज और परिहार की जनता की भावना है।" ऐसे में आइए जानते हैं कौन हैं रितु जायसवाल।

Who is Ritu Jaiswal: कौन हैं रितु जायसवाल?
रितु जायसवाल बिहार की एक जानी-मानी महिला नेता हैं जिन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत एक शिक्षित मुखिया के रूप में की थी। वह पूर्व सिविल सेवक (IAS रैंक) अरुण कुमार की पत्नी हैं। अरुण कुमार ने भी सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर गांव की सेवा का रास्ता चुना था। सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया के रूप में रितु जायसवाल ने जिस तरह से ग्रामीण विकास के काम किए, उसकी चर्चा न सिर्फ बिहार बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी हुई।
रितु जायसवाल को 2018 में 'चैंपियंस ऑफ चेंज अवॉर्ड' और 2019 में 'नेशनल पंचायत अवॉर्ड' से सम्मानित किया जा चुका है। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, स्वच्छता, महिलाओं के सशक्तिकरण और पारदर्शी प्रशासन पर उनके काम को काफी सराहा गया है।
RJD की महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष और पूर्व उम्मीदवार
रितु जायसवाल ने 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में परिहार सीट से आरजेडी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, जहां उन्हें बेहद कम अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता बनी रही। वह आरजेडी महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी की प्रवक्ता रह चुकी हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में भी वह शिवहर सीट से आरजेडी उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरी थीं। हालांकि, इस चुनाव में उन्हें मामूली अंतर से हार झेलनी पड़ी थी। लेकिन लगातार दो चुनावों में दमदार उपस्थिति दर्ज कराने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार बना लिया है।

समाजसेवा से राजनीति तक का सफर
रितु जायसवाल का जन्म 1 मार्च 1977 को हाजीपुर (वैशाली) में हुआ था। उन्होंने वैशाली महिला कॉलेज से कला संकाय में स्नातक की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही उनमें समाज के लिए कुछ करने की भावना मजबूत होती गई। उन्होंने अपने गांव की बदहाल स्थिति देखकर उसे बदलने का संकल्प लिया।
मुखिया बनने के बाद उन्होंने शिक्षा, सड़क, जल-निकासी, स्वच्छता और महिला स्वावलंबन जैसे मुद्दों पर कई सफल योजनाएं चलाईं। ग्रामीणों की भागीदारी से पंचायत को एक मॉडल के रूप में विकसित किया, जिसके चलते उन्हें "मुखिया दीदी" के नाम से भी जाना जाता है।
पति हैं पूर्व IAS अधिकारी
रितु जायसवाल के पति अरुण कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा से जुड़े अधिकारी रह चुके हैं। उन्होंने वॉलंटरी रिटायरमेंट (VRS) लेकर शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम करना शुरू किया। वह आज भी बिहार में छात्रों को नि:शुल्क कोचिंग देकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करते हैं। दंपति के दो बच्चे हैं और वे अपने सामाजिक कार्यों के कारण एक प्रेरणास्रोत परिवार माने जाते हैं।
अब नई राह पर 'मुखिया दीदी'
RJD से टिकट कटने के बाद रितु जायसवाल ने बेशक पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं, लेकिन जनता के बीच उनकी छवि अब भी मजबूत है। उन्होंने अपने बयान में साफ कहा है, "मैं परिहार की बेटी हूं, और यहां की जनता ही मेरी ताकत है।" रितु जायसवाल ने जानकारी दी है कि वो परिहार विधानसभा क्षेत्र से आज यानी 20 अक्टूबर की स्वतंत्र अभ्यर्थी के रूप में नामांकन करेंगी। उनके इस ऐलान के बाद सीतामढ़ी की सियासत में नई हलचल शुरू हो गई है। ऐसे में परिहार विधानसभा सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उनका मुकाबला अब दिलचस्प होने वाला है।












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