Bihar Election: भाजपा को जिताने के लिए RSS का ‘मिशन बिहार’ तैयार, टिकट फाइनल करने में मदद करेगा संघ!
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले संघ परिवार ने भाजपा को जीत दिलाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। आरएसएस की रणनीति अब गांव-गांव और घर-घर तक पहुंच चुकी है। चाय की दुकानों से लेकर मंदिर और मोहल्लों तक संघ के स्वयंसेवक लोगों से सीधे जुड़ रहे हैं। हर गांव में 10-15 कार्यकर्ता सक्रिय हैं, जो लगातार अलग-अलग इलाकों में घूमकर माहौल बना रहे हैं।
आरएसएस ने बिहार को दो प्रांतों में बांटा है - उत्तर बिहार (मुजफ्फरपुर मुख्यालय) और दक्षिण बिहार (पटना मुख्यालय)। वर्तमान में करीब 16 हजार स्वयंसेवक दो महीने से लगातार एक्टिव हैं। संघ का कहना है कि उसका काम दिखता है, कार्यकर्ता नहीं -नतीजे दिखाई देते हैं, तैयारी नहीं।

महाराष्ट्र-हरियाणा वाला फॉर्मूला नहीं, बिहार के लिए बनाया गया अलग मॉडल
दैनिक भास्कर के मुताबित संघ स्वयंसेवकों का कहना है कि हर राज्य के मुद्दे और मतदाता अलग होते हैं। इसलिए रणनीति भी बदलती रहती है। कॉमन यह है कि संघ सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि जमीन पर सक्रिय होता है। स्वयंसेवक सीधे घर-घर जाकर लोगों से संवाद कर रहे हैं।
स्वयंसेवकों की टीम पहले वोटरों की लिस्ट बना चुकी है। अब दूसरी टीम घर-घर जाकर नाराज वोटरों को मनाने और असमंजस में पड़े लोगों को "सही पार्टी" चुनने में मदद करने का काम कर रही है। हालांकि संघ कभी सीधे बीजेपी का नाम नहीं लेता, बल्कि विकास और राज्यहित पर फोकस करता है।
महिला वोटरों पर खास रणनीति
संघ को पता है कि बिहार की राजनीति में महिला वोटर निर्णायक भूमिका निभाती हैं। इसलिए महिलाओं के लिए अलग से योजना बनाई गई है। महिला संगठनों की टीमें घर-घर जाकर उनसे पूछ रही हैं कि उन्हें किस तरह का नेता चाहिए, कौन-सी सरकार उनके लिए बेहतर होगी। घरेलू और प्रोफेशनल महिलाओं के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं।
टिकट फाइनल करने में मदद करेगा संघ
आरएसएस 100 सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट बीजेपी को सौंपेगा। हर सीट से 3 नाम दिए जाएंगे, साथ ही उम्मीदवार की छवि और मजबूती-कमजोरी की पूरी रिपोर्ट भी दी जाएगी। मौजूदा विधायकों के रिपोर्ट कार्ड की भी समीक्षा होगी और जहां कमजोरी मिलेगी वहां नए चेहरे खोजे जाएंगे।
सीमांचल में राष्ट्रवाद, मगध में किसान
संघ ने क्षेत्रवार मुद्दों को भी फोकस किया है। ग्रामीण इलाकों में जातिवाद के खिलाफ संदेश दिया जा रहा है। सीमांचल (कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया, अररिया) में मुस्लिम आबादी अधिक है, इसलिए फोकस राष्ट्रवाद और राम मंदिर पर है। पश्चिमी बिहार और मगध में किसानों के मुद्दों और सरकारी योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।
जातीय जनगणना पर संघ का इनपुट
2025 में मोदी सरकार ने जातीय जनगणना का ऐलान किया। सूत्रों का कहना है कि यह फैसला भी संघ के इनपुट पर आधारित था, ताकि बीजेपी की "OBC विरोधी छवि" को तोड़ा जा सके। अब 2026 से जनगणना का पहला चरण शुरू होगा, जबकि 2027 से बाकी राज्यों में प्रक्रिया पूरी होगी।
बिहार चुनाव 2025 में बीजेपी की जीत सुनिश्चित करने के लिए संघ जमीन पर पूरी तरह एक्टिव है। महिला वोटरों से लेकर सीमांचल के राष्ट्रवादी एजेंडे और उम्मीदवारों की लिस्ट तक, सबकुछ आरएसएस की 'मेगा प्लानिंग' के तहत चल रहा है।












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