Bihar Election 2025: चुनाव में पोस्टर वार से गरमाई सियासत, RJD के 'नायक' के जवाब में JDU का 'जनसेवक' पोस्टर
Bihar Election 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की हलचल तेज होते ही एक बार फिर से पोस्टरों की सियासत शुरू हो गई है। पहले राजद (RJD) ने अपने नेता तेजस्वी यादव को "बिहार का नायक" बताते हुए पोस्टर जारी किया, तो अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने इसका जवाब "जनसेवक" पोस्टर से दिया है।
दोनों दलों के इन पोस्टरों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है और सत्ताधारी गठबंधन व विपक्ष के बीच पोस्टर-पॉलिटिक्स खुलकर सामने आ गई है।

जेडीयू का जवाब: "नीतीश कुमार जनसेवक हैं"
राजद के "नायक" पोस्टर के कुछ ही दिनों बाद जेडीयू ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बड़ी मुस्कुराती तस्वीर के साथ "जनसेवक" लिखा पोस्टर जारी किया है। इस पोस्टर में नीतीश कुमार हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन करते दिखाई दे रहे हैं। जेडीयू नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार ने पिछले दो दशकों में बिना किसी शोर-शराबे के बिहार की सेवा की है चाहे वह सड़क निर्माण हो, शिक्षा में सुधार या महिला सशक्तिकरण की योजनाएं।
पार्टी का दावा है कि "नीतीश कुमार की पहचान नायक नहीं, बल्कि जनसेवक की है। जेडीयू प्रवक्ताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री ने हमेशा जनता को प्राथमिकता दी है और किसी भी मुद्दे पर अपनी विनम्रता बनाए रखी है। यही कारण है कि पार्टी अब उन्हें "जनसेवक" के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जो बिहार की जनता की सेवा में सदैव समर्पित रहे हैं।
आरजेडी का "नायक" पोस्टर बना विवाद का कारण
वहीं, आरजेडी की ओर से जारी "बिहार का नायक तेजस्वी यादव" वाला पोस्टर अब पार्टी के भीतर ही विवाद का केंद्र बन गया है। पोस्टर में तेजस्वी यादव की तस्वीर के साथ "नायक" शब्द का इस्तेमाल किया गया था, लेकिन इस पर आरजेडी के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने ही सवाल उठाते हुए कहा कि तेजस्वी को 'जननायक' या 'नायक' बनने में अभी वक्त लगेगा। जननायक वह होता है जो समाज के हर तबके के लिए लड़ता है, जिसके योगदान से राज्य की दिशा बदलती है। उनका यह बयान पार्टी के भीतर मतभेदों की ओर इशारा करता है।
तेज प्रताप यादव भी नहीं माने तेजस्वी को "जननायक"
तेजस्वी यादव के बड़े भाई और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने भी पहले ही इस पोस्टर पर आपत्ति जताई थी। महुआ दौरे के दौरान उन्होंने कहा था कि जननायक की उपाधि उन नेताओं को दी जाती है जिन्होंने समाज में ऐतिहासिक योगदान दिया हो।
जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया और लालू प्रसाद यादव जननायक हैं, लेकिन तेजस्वी जननायक नहीं हैं। तेज प्रताप के इस बयान के बाद से आरजेडी खेमे में हलचल मच गई थी, और अब अब्दुल बारी सिद्दीकी के बयान ने उस आग में और घी डाल दिया है।
बीजेपी का पलटवार: "तेजस्वी नायक नहीं, खलनायक हैं"
आरजेडी के "नायक" पोस्टर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।बिहार बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा कि तेजस्वी यादव नायक नहीं, बल्कि खलनायक हैं। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे पोस्टरबाजी करके सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी नेताओं का कहना है कि जनता अब ऐसे पोस्टरों से प्रभावित नहीं होगी, क्योंकि जनता को विकास चाहिए, न कि नारेबाजी और आत्मप्रशंसा।
पोस्टर वार बना चुनावी रणनीति का हिस्सा
बिहार की राजनीति में पोस्टर हमेशा से चुनावी माहौल का संकेतक माने जाते हैं। 2015 में "बिहार में बहार है, नीतीशे कुमार है" जैसे नारों से लेकर 2020 में "तेजस्वी है तो भरोसा है" तक, हर चुनाव में पोस्टरों ने जनता का ध्यान खींचा है। अब 2025 के चुनाव से पहले "नायक बनाम जनसेवक" की पोस्टर जंग ने यह साफ कर दिया है कि मुख्य मुकाबला एक बार फिर नीतीश बनाम तेजस्वी के बीच ही है।
प्रचार का नया दौर शुरू
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि दोनों दलों के ये पोस्टर न सिर्फ प्रचार का जरिया हैं, बल्कि यह आने वाले चुनावी एजेंडे की झलक भी देते हैं। एक ओर आरजेडी तेजस्वी यादव को युवा नेतृत्व और बदलाव का प्रतीक बताना चाहती है, वहीं जेडीयू नीतीश कुमार को अनुभव, स्थिरता और जनसेवा की मिसाल के रूप में पेश कर रही है।
अब देखना यह होगा कि जनता 2025 के विधानसभा चुनाव में किस "पोस्टर" को असली चेहरा मानती है - "नायक" या "जनसेवक"?












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