Bihar Election 2025: बिहार चुनाव में NDA के सामने सीट बंटवारे को लेकर क्या है चुनौती? कब तक होगी इसपर बात?
Bihar Election 2025: बिहार में साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एनडीए के भीतर तो सीटों के फॉर्मूले को लेकर खींचतान तेज होती जा रही है।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और उसके सहयोगियों ने बिहार में आगामी चुनावों के लिए साझेदारों के बीच बांटी जाने वाली सीटों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक उम्मीदवारों की जीत की संभावना के आधार पर साझेदारों के बीच सीटों की अदला-बदली पर भी विचार किया जा सकता है। सीटों की पहचान की प्रक्रिया उम्मीदवारों के चयन से पहले होगी और सभी सहयोगियों से सलाह ली जाएग। सहयोगी दलों के बीच इस बात पर व्यापक सहमति है कि मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ही चुनावों का चेहरा होंगे।

जेडी(यू), हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (एचएएम), लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा हैं, जो संयुक्त रूप से अक्टूबर-नवंबर में होने वाले चुनाव लड़ेंगे।
जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा ने सीट शेयरिंग को लेकर क्या कहा?
आवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने सीटों के बंटवारे को लेकर हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इसके बाद जीतन राम मांझी ने कहा है कि बिहार चुनाव के लिए NDA में सीट बंटवारे पर चर्चा जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह में होगी
वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने भी सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा को चेताया है। उपेंद्र कुशवाहा का बगहा के एक कार्यक्रम में ये कहना है कि अगर पिछले लोकसभा चुनाव की तरह सीट बंटवारे में फिर से गलतियां दोहराई गईं तो आने वाले चुनाव में एनडीए को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कुशवाहा ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के समय भाजपा के कुछ नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की बातों को नजर अंदाज किया था। जिसका पूरा विपक्ष को हुआ एनडीए को कई सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। अगर विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही हुआ, तो नुकसान तय है। ऐसे में आइए जानें NDA के सामने सीट बंटवारे को लेकर क्या चुनौती है?
बिहार चुनाव 2025: NDA के सामने सीट शेयरिंग को लेकर क्या है चुनौतियां?
छोटे दलों को खुश करना!
छोटे दल जैसे उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो और जीतन राम मांझी की हम पार्टी, सीटों की संख्या से ज्यादा ''सम्मानजनक हिस्सेदारी'' की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उनकी ताकत और जमीनी पकड़ को ध्यान में रखते हुए उन्हें सीटें दी जाएं, न कि पिछली चुनावी परफॉर्मेंस के आधार पर। रालोमो ने अभी तक सीटों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक मांग तो नहीं की है। लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वे 25 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने नारा भी दिया है- 'रालोमो कम से कम पच्चीस।'
लोकसभा बनाम विधानसभा की रणनीति!
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा दोनों नेताओं ने संकेत दिया है कि लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर हुई गलतियों को अगर विधानसभा में दोहराया गया, तो इसका नुकसान पूरे गठबंधन को होगा। विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे और जातीय समीकरण ज्यादा हावी रहते हैं। इसलिए इस बार NDA को सीटों का बंटवारा काफी सूझबूझ से करना होगा।
नीतीश कुमार बनाम BJP का समीकरण
नीतीश कुमार के नेतृत्व में NDA बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रही है। वो मुख्यमंत्री चेहरा माने जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा और जेडीयू में सीटों को लेकर खींचातानी हो सकती है। अगर भाजपा की सीटें कम होती हैं तो पार्टी के कुछ पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष पनप सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां वे खुद को मजबूत मानते हैं।
गठबंधन में भरोसे की कमी
NDA के छोटे दल पिछली गलतियों, उपेक्षा और वादाखिलाफी के अनुभव से सतर्क हो रहे हैं। वे अब खुलकर चेतावनी दे रहे हैं और सीटों की बातचीत को सार्वजनिक मंच पर ला रहे हैं। ऐसे में इनको एक साथ लाना बड़ी चुनौती होगी। अगर एनडीए आंतरिक तौर पर कमजोर हुआ, तो विपक्षी महागठबंधन इसका फायदा उठा सकता है। बिहार NDA के लिए 2025 का चुनाव केवल विपक्ष से लड़ने का मामला नहीं है, बल्कि भीतर ही 'संतुलन साधने' की बड़ी चुनौती है।












Click it and Unblock the Notifications