Bihar Chunav: बिहार का आसमान बना चुनावी रनवे! खूब उड़े हेलिकॉप्टर, एक घंटे का किराया सुनकर उड़ जाएंगे होश?
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव का प्रचार अब अपने अंतिम दौर में है। आज 9 नवंबर 2025 की शाम 6 बजे दूसरे चरण का चुनावी शोर थम जाएगा। इससे पहले, वोटरों को साधने की होड़ में एनडीए और महागठबंधन सहित तमाम दलों के उम्मीदवारों ने आसमान से लेकर ज़मीन तक अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
चुनाव के इस दूसरे चरण में 20 ज़िलों की 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे, और यही चरण तय करेगा कि सत्ता की चाबी बीजेपी-जेडीयू गठबंधन (NDA) को मिलेगी या आरजेडी-कांग्रेस महागठबंधन को।

चुनावी घमासान की यह तीव्रता सिर्फ़ जमीन पर नहीं, बल्कि बिहार के आसमान में भी साफ नजर आ रही है। पटना का जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा इन दिनों देश का सबसे व्यस्त राजनीतिक ट्रांजिट हब बन चुका है। आलम यह है कि हवाई अड्डा अपनी क्षमता से कहीं ज़्यादा वीआईपी ट्रैफिक झेल रहा है।
पटना एयरपोर्ट पर उड़ानों की 'बाढ़'
चुनावी रैलियों के लिए बड़े नेताओं का आना-जाना इतना बढ़ गया है कि पटना एयरपोर्ट पर रोज़ाना 100 से 130 वीआईपी आवाजाही कर रहे हैं। ज़मीन पर उतरने के लिए जगह कम न पड़े, इसलिए ज़्यादातर चार्टर्ड फ़्लाइट्स को यात्रियों को उतारने के बाद गया, दरभंगा, वाराणसी या रांची जैसे अन्य एयरपोर्ट्स पर पार्किंग के लिए भेजा जा रहा है।
- चौबीसों घंटे उड़ानें: लगातार ऑपरेशनों के लिए 23 हेलिकॉप्टर और 12 चार्टर्ड विमानों को मंज़ूरी दी गई है।
- पॉलिटिकल हब: बड़े नेता प्राइवेट जेट से पटना पहुंचते हैं और फिर बिहार के कोने-कोने में जाने के लिए हेलिकॉप्टरों का सहारा लेते हैं।
- किसके पास कितने चॉपर: रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपलब्ध हेलिकॉप्टरों में से लगभग 15 अकेले बीजेपी के लिए रिजर्व हैं, जबकि बाकी कांग्रेस, जेडीयू और आरजेडी जैसे दल इस्तेमाल कर रहे हैं।
यह चुनाव सीज़न प्राइवेट चार्टर ऑपरेटरों के लिए बंपर कमाई लेकर आया है, जिन्होंने देश भर से अपने विमान बिहार में उतार दिए हैं।
कमाई का मौसम: 50% तक बढ़ गया किराया
चुनावी मौसम आते ही हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों की डिमांड आसमान छूने लगती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऑपरेटर 45 से 60 दिनों के लिए पार्टियों के साथ लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट करते हैं। इस एग्रीमेंट में न्यूनतम गारंटीकृत घंटे (रोजाना 2.5-3 घंटे) तय होते हैं। यानी, भले ही हेलिकॉप्टर उड़ान भरे या नहीं, राजनीतिक दल को 180 घंटे तक का भुगतान करना ही होता है।
डिमांड में भारी उछाल के कारण, इन हेलिकॉप्टर ऑपरेटरों ने नियमित किराये की तुलना में दरें 40% से 50% तक बढ़ा दी हैं। अब ज़रा सोचिए, एक बार में 4-5 करोड़ रुपये तक का किराया बुक हो रहा है!
एक घंटे का किराया जान चकरा जाएगा दिमाग
अगर आप सोचते हैं कि हवाई सफ़र महंगा होता है, तो चुनावी उड़ान का किराया जानकर आप चौंक जाएंगे। हेलिकॉप्टरों और प्राइवेट जेट्स को प्रति घंटे के हिसाब से किराए पर लिया जाता है:
- सिंगल-इंजन हेलिकॉप्टर (4 यात्री): इनका किराया बढ़कर ₹1.5 लाख प्रति घंटा हो गया है।
- ट्विन-इंजन हेलिकॉप्टर (7-8 यात्री): बड़े नेताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले इन हेलिकॉप्टरों का किराया ₹2 लाख से ₹3 लाख प्रति घंटा तक पहुंच गया है।
- लग्जरी प्राइवेट जेट (जैसे फाल्कन): ₹6 लाख प्रति फ्लाइंग आवर (GST अतिरिक्त) है।
उदाहरण के लिए, एक Falcon जेट से पटना और दिल्ली के बीच (लगभग 80 मिनट की यात्रा) का आना-जाना ही ₹18 लाख से अधिक का खर्च आता है! वहीं, 15 सीटर बड़े हेलिकॉप्टरों का किराया ₹4 लाख प्रति घंटे से शुरू होता है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, क्लब वन एयर, एयर चार्टर और VSS जैसी कंपनियां जेट चला रही हैं, जबकि हेलीकॉप्टर सेवाएं पवन हंस, महाराजा एविएशन, रेड बर्ड एविएशन, ACS चार्टर सर्विसेज़, ट्रांस भारत एविएशन, ग्लोबल वेक्ट्रा और एयरो एयर चार्टर्ड सर्विसेज़ द्वारा दी जा रही हैं। ये लग्ज़री जेट सोफ़े, बेड, वॉशरूम और इन-फ्लाइट केटरिंग से लैस हैं, जो आसमान में एक प्राइवेट सुइट जैसा आराम देते हैं।\
ग्राउंड हैंडलिंग का काम संभालने वाली एजेंसी ग्लोबल फ़्लाइट एविएशन सर्विसेज़ लगातार लैंडिंग और डिपार्चर को कोऑर्डिनेट कर रही है। एक अधिकारी ने माना, 'पहला दिन बहुत अफरा-तफरी वाला था।' यात्रियों की डिटेल्स हमेशा मैनिफ़ेस्ट से मेल नहीं खाती थीं, और कुछ VIPs को क्लीयरेंस के लिए इंतज़ार करना पड़ा। लेकिन तब से यह प्रक्रिया सुव्यवस्थित हो गई है।'
बेहतर कोऑर्डिनेशन के बावजूद, अधिकारियों का कहना है कि पटना एयरपोर्ट अपनी क्षमता से ज़्यादा काम कर रहा है, पार्किंग बे पूरी तरह से भरे हुए हैं और स्टाफ़ चौबीसों घंटे काम कर रहा है। बिहार की राजधानी के ऊपर भीड़भाड़ वाला आसमान राजनीतिक लड़ाई की तेज़ी को दिखाता है।












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