Bihar Chunav: कौन हैं RCP सिंह, बिहार की राजनीति में इनका कितना है प्रभाव? कभी नीतीश के थे 'राइट हैंड'
Ramchandra Prasad Singh: बिहार की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र प्रसाद सिंह (आरसीपी सिंह) ने प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' में शामिल होने का ऐलान किया है। आरसीपी सिंह ने अपनी पार्टी 'आप सबकी आवाज' (AASA) का 'जन सुराज' में विलय करने की घोषणा की है। रविवार (18 मई) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने ये जानकारी दी है।
कभी बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार के 'आंख और नाक' माने जाने वाले आरसीपी सिंह अब प्रशांत किशोर के साथ मिलकर उन्हीं के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रहे हैं। इनका बिहार की राजनीति में कितना प्रभाव है...उसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि एक वक्त था जब ये नीतीश कुमार के 'राइट हैंड' कहे जाते थे। ये उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने नीतीश कुमार के शुरुआती दिनों में उनके साथ मिलकर बिहार के लिए काम किया था।

आरसीपी सिंह अब नीतीश कुमार के खिलाफ नई राजनीतिक दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गांव, कल्याण बिगहा, से की है, जहां से 'बिहार बदलाव हस्ताक्षर अभियान' की शुरुआत की गई है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो आरसीपी सिंह ये समझ चुके हैं कि बिहार में बदलाव वाली राजनीति की उम्मीद अब सिर्फ प्रशांत किशोर से की जा सकती है। आरसीपी सिंह अब बिहार में पलायन, अशिक्षा और गरीबी खत्म करने के जन सुराज के मिशन में नीतीश कुमार के खिलाफ अभियान चलाएंगे।
आरसीपी सिंह की राजनीतिक यात्रा और अनुभव उन्हें बिहार की राजनीति में एक अहम खिलाड़ी बना सकती है। उनका प्रशासनिक अनुभव, जेडीयू में नेतृत्व की भूमिका और अब 'जन सुराज' के साथ गठबंधन उन्हें आगामी चुनावों में एक प्रभावशाली नेता के तौर पर पेश कर सकती है। ऐसे में आइए जानें कौन हैं आरसीपी सिंह और उनका राजनीतिक करियर के बारे में।
Who is Ramchandra Prasad Singh (RCP Singh): कौन हैं आरसीपी सिंह?
🔴 आरसीपी सिंह का पूरा नाम रामचंद्र प्रसाद सिंह है। आरसीपी सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं। वे जनता दल (यूनाइटेड) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे। आरसीपी सिंह 2010 से 2022 तक बिहार से राज्यसभा के पूर्व सांसद भी थे।
🔴 आरसीपी सिंह को नीतीश कुमार से नाराजगी के बाद कैबिनेट मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। जिसके बाद उन्होंने 31 अक्टूबर, 2024 आप सबकी आवाज नाम से एक नई पार्टी का गठन किया था। नीतीश कुमार से मतभेद होने के बाद कुछ वक्त के लिए ये बीजेपी में भी शामिल हुए थे।
🔴 राजनीति में आने से पहले आरसीपी सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी थे। वे नीतीश कुमार के प्रधान सचिव भी रह चुके हैं। नीतीश कुमार के प्रधान सचिव के तौर पर उन्होंने कई सालों तक काम किया। जब कैबिनेट में फेरबदल हुआ तो वे दूसरे मोदी मंत्रालय में इस्पात मंत्री बने थे।
🔴 RCP Singh Family: आरसीपी सिंह का जन्म 6 जुलाई 1958 को बिहार के नालंदा जिले के मुस्तफापुर में हुआ। वह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की कुर्मी जाति से हैं। उनके पिता का नाम सुखदेव नारायण सिंह और माता का नाम दुखलालो देवी है। आरसीपी सिंह ने 21 मई 1982 को गिरिजा सिंह से शादी की, जिनसे उनकी दो बेटियां हैं। उनकी बेटी लिपि सिंह 2016 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और दूसरी बेटी लता वकील हैं।
🔴 RCP Singh Education: आरसीपी सिंह ने अपनी शुरुआती शिक्षा गांव में की, उसके बाद पटना साइंस कॉलेज से 12वीं पास की। आगे की पढ़ाई उन्होंने पटना कॉलेज से की और 1979 में इतिहास में स्नातक (ऑनर्स) की डिग्री ली। आरसीपी सिंह ने इसके बाद 1982 में नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में मास्टर डिग्री ली।
🔴 RCP Singh Career: आरसीपी सिंह 1984 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी थे। असल में उन्होंने शुरुआत में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) से शुरू की थी। लेकिन बाद में 1984 में आईएएस में चुने गए थे। आईएएस में चयनित होने के बाद उन्होंने आईआरएस से इस्तीफा दे दिया, उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर आवंटित किया गया था। उन्होंने राज्य सरकार और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति दोनों में एक आईएएस अधिकारी के तौर पर कई भूमिका निभाई है। उनकी पहली पोस्टिंग सुल्तानपुर में संयुक्त मजिस्ट्रेट के रूप में हुई थी। वो कई जिलों में जिलों में कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट भी रहे।
🔴 RCP सिंह कैसे मिले नीतीश कुमार से
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर काम करते समय आरसीपी सिंह नीतीश कुमार के संपर्क में आए और 7 साल तक उनके निजी सचिव के रूप में काम किया। 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार के मुख्यमंत्री चुने जाने के बाद उन्होंने नीतीश कुमार के प्रधान सचिव के रूप में काम किया। उन्होंने 2010 में सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने के लिए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडी(यू) में शामिल हो गए।












Click it and Unblock the Notifications