Bihar Chunav: बिहार में 17 पार्टियों पर EC का ‘क्लीन-अप ऑपरेशन’, नहीं लड़ पाएंगे चुनाव, क्यों लिया गया फैसला
Bihar Chunav 2025: बिहार चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्य की 17 राजनीतिक पार्टियों की मान्यता रद्द कर दी। यह कदम आयोग की उस 'क्लीन-अप ऑपरेशन अभियान का हिस्सा है, जिसमें देशभर की 334 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों (RUPPs) को चुनावी सूची से हटा दिया गया है।
चुनाव आयोग की जांच में पाया गया कि ये दल पिछले छह सालों से किसी भी चुनाव में हिस्सा नहीं ले रहे थे और इनके पंजीकृत पते भी सही नहीं पाए गए। ECI का मानना है कि इससे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और 'कागजी पार्टियों' का खेल खत्म होगा।

कानून क्या कहता है?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत कोई भी राजनीतिक दल पंजीकरण के बाद पांच साल के भीतर चुनाव लड़े, यह जरूरी है। अगर कोई दल लगातार छह साल तक चुनावी मैदान में नहीं उतरता, तो आयोग उसे सूची से बाहर कर सकता है।
डिलिस्टेड होने का मतलब
'डिलिस्टेड' पार्टियां अब चुनावी प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी। इतना ही नहीं आयकर में छूट का लाभ नहीं लेंगी, मुफ्त मतदाता सूची और अन्य चुनावी सुविधाओं से वंचित रहेंगी। चुनाव आयोग ने साफ कहा है कि अब ये दल RP एक्ट और अन्य कानूनों के तहत किसी भी चुनावी लाभ के हकदार नहीं होंगे।
बिहार की 17 डिलिस्टेड पार्टियां
- भारतीय बैकवार्ड पार्टी - पटना
- भारतीय सुराज दल - पटना
- भारतीय युवा पार्टी (डेमोक्रेटिक) - पटना
- भारतीय जनतंत्र सनातन दल - बक्सर
- बिहार जनता पार्टी - सारण
- देशी किसान पार्टी - गया
- गांधी प्रकाश पार्टी - कैमूर
- हिमाद्री जनरक्षक समाजवादी विकास पार्टी (जनसेवक) - बक्सर
- क्रांतिकारी समाजवादी पार्टी - पटना
- क्रांतिकारी विकास दल - पटना
- लोक आवाज दल - पटना
- लोकतांत्रिक समता दल - पटना
- नेशनल जनता पार्टी (इंडियन) - वैशाली
- राष्ट्रवादी जन कांग्रेस - पटना
- राष्ट्रीय सर्वोदय पार्टी - पटना
- सर्वजन कल्याण लोकतांत्रिक पार्टी - पटना
- व्यावसायी किसान अल्पसंख्यक मोर्चा - जमुई
झारखंड की 5 पार्टियों की भी मान्यता रद्द
- भारत विकास मोर्चा - देवघर
- भारतीय जनमक्ति पार्टी - पलामू
- मानव मुक्ति मोर्चा - पलामू
- नवजवान संघर्ष मोर्चा - गढ़वा
- राष्ट्रीय मजदूर किसान प्रजातांत्रिक पार्टी - रांची
ECI का मकसद -पारदर्शिता और जवाबदेही
आयोग का कहना है कि निष्क्रिय दल कर छूट, चुनाव चिह्न और मतदाता सूची जैसे लाभों का गलत इस्तेमाल करते थे, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी की आशंका रहती है। जिन 334 दलों पर कार्रवाई हुई, उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजा गया था, लेकिन वे जवाब देने में नाकाम रहे।
बिहार चुनाव से पहले 'पॉलिटिकल हाउसकीपिंग'
जून 2025 में ECI ने 345 दलों पर एक्शन लिया, जिनमें से 334 का रजिस्ट्रेशन रद्द हुआ। अब देश में कुल 2,520 RUPP बचे हैं। इससे पहले 2,854 थे। वर्तमान में देश में 6 राष्ट्रीय दल, 67 राज्य स्तरीय दल 2,520 RUPP मौजूद हैं।
ECI का मानना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया को स्वच्छ बनाने और 'फर्जी दलों' पर लगाम लगाने के लिए जरूरी था। इससे केवल सक्रिय और जिम्मेदार राजनीतिक दल ही सिस्टम में बने रहेंगे।












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