Bihar Chunav: दलित सीटों पर कांटे की टक्कर, महागठबंधन पर NDA क्यों पड़ सकता है भारी? पढ़िए 5 बड़ी वजह
Bihar Chunav 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर दलित वोट बैंक को साधने की कवायद तेज हो गई है। राज्य की 19.65% आबादी अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आती है, और इनके लिए 38 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं। मुख्य रूप से इन सीटों पर कब्जे के लिए सभी दलों और गठबंधनों ने पिछले काफी समय से खूब जोर लगा रखा है और पिछले कुछ समय से इसकी कोशिशें और बढ़ा दी गई हैं।
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में इन 38 सीटों में से एनडीए (NDA) और महागठबंधन (Grand Alliance
) ने 19-19 सीटों पर कब्जा किया था। लेकिन इस बार समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों किन 5 वजहों से एनडीए, महागठबंधन पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।

Bihar Chunav 2025: 1. ज्यादातर दलित वोट बैंक आधारित पार्टियां NDA में
एनडीए ने दलित वोट बैंक पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कई अहम दलों को अपने साथ जोड़ लिया है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) जैसी पार्टियां अब पूरी तरह से एनडीए का हिस्सा हैं। इन दलों का बिहार में दलित वोटरों पर अच्छा प्रभाव माना जाता है।
एलजेपी (रामविलास) खासकर पासवान समुदाय का प्रतिनिधित्व करती है, जो राज्य की दलित आबादी का 5.3% हिस्सा है। वहीं हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) के जीतन राम मांझी का मुशहर समुदाय पर प्रभाव है, जिसकी लगभग 3% जनसंख्या है।
Bihar Election 2025: 2. चिराग पासवान की पार्टी LJP (Ramvilas) इस बार NDA का हिस्सा
2020 के विधानसभा चुनाव में एलजेपी (रामविलास) ने अकेले चुनाव लड़ा था, जिससे एनडीए को नुकसान हुआ था। लेकिन इस बार चिराग पासवान की पार्टी एनडीए में शामिल हो गई है। चिराग पासवान केंद्र सरकार में मंत्री हैं और बिहार के विभिन्न जिलों में जनसभाएं कर रहे हैं, जिससे पासवान वोट बैंक को सीधे एनडीए के पक्ष में मोड़ा जा सकता है।
Bihar Politics: 3. दलित वोटरों में नीतीश कुमार की अपनी खास पैठ
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दलित समाज में गहरी पकड़ है। उनके शासनकाल में दलितों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं।
- दलित जातियों का वर्गीकरण (Categorization of Dalits)
- जातिगत जनगणना
- मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) छात्रवृत्ति योजना
- दलित बस्तियों में बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने की पहल
इसके अलावा, जेडीयू आगामी 13 अप्रैल को अंबेडकर जयंती के मौके पर पटना के बापू ऑडिटोरियम में भव्य कार्यक्रम आयोजित करने जा रही है। इसके एक दिन बाद ही 14 अप्रैल को दलित बस्तियों में दीपोत्सव की तैयारी है।
Bihar Chunav 2025: 4. केंद्र की मोदी सरकार की दलित कल्याण से जुड़ी योजनाएं
मोदी सरकार ने दलितों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जो एनडीए के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं। इनमें कुछ प्रमुख योजनाएं हैं:
- प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना: दलित बहुल गांवों के विकास के लिए
- स्टैंड अप इंडिया योजना: SC/ST उद्यमियों को ऋण सुविधा
- डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन स्कॉलरशिप योजना
इन योजनाओं से दलित समुदाय में मोदी सरकार की छवि मजबूत हुई है, जो एनडीए के लिए प्लस पॉइंट बन सकता है।
Bihar Election 2025: 5. दलित वोटरों के बीच आधार मजबूत करने में कांग्रेस और RJD में रस्साकशी
महागठबंधन में दलित वोट बैंक को लेकर आरजेडी और कांग्रेस के बीच खींचतान देखी जा रही है। हाल ही में कांग्रेस ने जाटव समुदाय से आने वाले राजेश कुमार राम को बिहार प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है, ताकि दलित वोट बैंक को साधा जा सके। लेकिन कांग्रेस में आंतरिक गुटबाजी के चलते इसका पूरा फायदा मिलने की संभावना कम है।
वहीं, आरजेडी की ओर से तेजस्वी यादव दलित वोटरों को साधने में लगे हैं, लेकिन पासवान और मुसहर जैसी प्रमुख दलित जातियों पर उनकी पकड़ कमजोर है। 2020 के चुनाव में आरजेडी को 10, कांग्रेस को 4, और सीपीआई (ML) को 4 सीटें मिली थीं।
वहीं बीजेपी और जेडीयू को 8-8 और जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) को 3 सीटें मिली थीं।












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