Bihar Chunav से पहले PM-CM की कुर्सी छीनने वाला बिल लाना बीजेपी की रणनीति? भ्रष्टाचार फिर बना सबसे बड़ा चुनावी
Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति एक बार फिर केंद्र में है। इसी साल प्रदेश में चुनाव होने वाले हैं और इस चुनावी मौसम में भ्रष्टाचार अहम मुद्दा बन गया है। पीएम मोदी ने अपनी हालिया गयाजी यात्रा में भी भ्रष्टाचार पर हमला बोलते हुए कहा कि पीएम हो या सीएम कुर्सी पर रहने का अधिकार किसी भ्रष्टाचारी को नहीं है। इस चुनावी माहौल में संविधान (संशोधन 130) विधेयक सरकार लेकर आई है। इस बिल के लागू होने पर सीएम-पीएम और मंत्रियों को 30 दिन से ज्यादा जेल में रहने पर तुरंत पद से हटाया जा सकेगा।
बीजेपी ने ऐसा दांव चलने की रणनीति बनाई है, जिससे विपक्ष को करारा झटका लग सकता है। राजनीतिक हलकों में और बोलचाल की भाषा में इसे "PM-CM की कुर्सी छीनने वाला बिल" कहा जा रहा है। इस बिल के जरिए बीजेपी यह संदेश देना चाहती है कि अब सत्ता में बैठे लोग अगर भ्रष्टाचार या गंभीर अपराधों में शामिल पाए जाते हैं तो उन्हें तुरंत पद से हटना होगा।

Bihar Chunav में भ्रष्टाचार बना बड़ा मुद्दा
चुनावी मौसम में यह कदम भ्रष्टाचार के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला सकता है। बिहार में भ्रष्टाचार हमेशा से एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है। पिछले कई दशकों से जनता नेताओं की ईमानदारी और साफ-सुथरी राजनीति की उम्मीद करती रही है। तेजस्वी यादव और आरजेडी पर बीजेपी लगातार भ्रष्टाचार को लेकर हमलावर रही है। वहीं नीतीश कुमार की 'सुशासन बाबू' वाली छवि भी सवालों के घेरे में आ चुकी है। इसके बावजूद नीतीश की चुनावी सफलता में उनकी ईमानदार छवि का अहम रोल रहा है।
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ऐसे में बीजेपी इस बार भ्रष्टाचार को मुख्य एजेंडा बनाकर जनता के सामने जाने की तैयारी में है। विपक्षी दल बिल का विरोध कर रहे हैं, जबकि बीजेपी इसे देश में ईमानदार राजनीति के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराने की बात कर रही है। कुल मिलाकर चुनावी मौसम में बीजेपी ऐसा बिल लेकर आई है, जिसे सीधे तौर पर बिहार चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
Lalu Yadav के परिवार और राजनीति पर बड़ा वार
भ्रष्टाचार के मामले में लालू यादव दोषी करार दिए जा चुके हैं और तेजस्वी यादव भी आईआरसीटी घोटाले समेत कई मामलों में आरोपी हैं। बिहार चुनाव से पहले यह बिल लाना राजनीतिक विश्लेषकों की राय में अहम कदम है। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बीजेपी के लिए दोतरफा फायदा ला सकता है। एक ओर, पार्टी खुद को भ्रष्टाचार विरोधी ताकत के रूप में पेश कर सकेगी, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों पर दबाव भी बनाएगी।
विपक्ष का तर्क है कि बीजेपी यह सब केवल चुनावी हथकंडे के तहत कर रही है और यह बिल विरोधी दलों को सत्ता से हटाने का एक और औजार है। कुल मिलाकर भ्रष्टाचार के कई केस झेल रहे लालू परिवार के लिए इस बिल का विरोध करना दोधारी तलवार पर चलने की तरह है।
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