'एकतरफा मोहब्बत नहीं चलेगी', बिहार चुनाव से पहले ओवैसी ने INDIA गठबंधन को दिखाया ठेंगा, अब क्या करेगी AIMIM?
Bihar Chunav 2025 (AIMIM Asaduddin Owaisi): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, सियासी समीकरण भी तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार (14 जुलाई) को साफ कर दिया कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन यानी महागठबंधन के साथ चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने अपने अंदाज में कहा -"एकतरफा मोहब्बत नहीं चलती।"
AIMIM की बिहार इकाई के अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने कुछ समय पहले राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को पत्र लिखकर महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। लेकिन राजद की तरफ से AIMIM से बिहार चुनाव से दूर रहने की गुजारिश की गई। राजद ने कहा कि अगर सच में AIMIM बिहार में नीतीश सरकार दोबारा नहीं चाहती है तो उन्हें चुनाव लड़ना ही नहीं चाहिए।

ओवैसी बोले- एकतरफा प्यार कैसे चलेगा, हमने तो कोशिश की थी
अब खुद ओवैसी ने INDIA गठबंधन से गठबंधन करने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हमने कोशिश की, लेकिन जब कोई हमें स्वीकार ही नहीं करता, तो एकतरफा प्यार कैसे चलेगा? लोग समझें कि हमारे खिलाफ जो आरोप लगाए गए, वे झूठ पर आधारित थे।"
ओवैसी ने दिया तीसरे मोर्चे का संकेत
ओवैसी ने बताया कि अख्तरुल ईमान चाहते हैं कि AIMIM एक तीसरे मोर्चे का हिस्सा बने और अपने दम पर चुनाव लड़े। उन्होंने कहा, "हम गरीबों और मजलूमों की आवाज हैं। लेकिन कुछ पार्टियों को यह मंजूर नहीं कि ऐसा कोई नेता उनके सामने खड़ा हो। वे बिहार की जनता को गुलाम बनाकर रखना चाहते हैं।"
AIMIM ने 2020 के बिहार चुनाव में 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिनमें से 5 सीटों पर जीत हासिल की थी, हालांकि बाद में 4 विधायक राजद में शामिल हो गए।
SIR यानी बैकडोर NRC': ओवैसी का चुनाव आयोग पर हमला
ओवैसी ने बिहार में वोटर लिस्ट की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया (Special Intensive Revision) को "बैकडोर NRC" करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि चुनाव आयोग नागरिकता की जांच कैसे कर सकता है, जबकि यह अधिकार गृह मंत्रालय और सीमा सुरक्षा एजेंसियों का है।
उन्होंने कहा, "अगर उनके पास अधिकार नहीं है, तो यह प्रक्रिया क्यों चलाई जा रही है? चुनाव नजदीक है, और सीमांचल के लोगों को कमजोर किया जा रहा है।"
ओवैसी के सवाल - कौन हैं 'सूत्र'?
उन्होंने इस पर भी नाराजगी जताई कि "चुनाव आयोग की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आ रहा है, लेकिन मीडिया में 'सूत्रों' के हवाले से बातें सामने आ रही हैं। ये सूत्र कौन हैं? 2003 में भी SIR हुआ था, उस समय कितने विदेशी पाए गए थे? 2016, 2017 और 2019 में संसद में कहा गया था कि कोई विदेशी नागरिक नहीं मिला। फिर अब किस आधार पर यह प्रक्रिया चलाई जा रही है?"
ओवैसी ने कहा, ''हम उन BLOs से मिलना और यह जानना चाहते हैं कि आखिर किस बुनियाद पर लोगों को नेपाली और बांग्लादेशी घोषित किया गया?''
ओवैसी का रुख साफ है ना वो झुकेंगे और ना किसी गठबंधन की 'दया' पर रहेंगे। तीसरे मोर्चे की तैयारी और SIR के खिलाफ मुखर विरोध से AIMIM बिहार की राजनीति में अपनी अलग जगह बनाने में जुटी है। अब देखना यह होगा कि क्या यह अलग राह ओवैसी को बिहार में एक निर्णायक भूमिका दिला पाएगी या फिर यह सियासी चाल INDIA गठबंधन को नुकसान पहुंचाएगी?












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