Bihar Chunav 2025: SIR ही नहीं, इन 5 'अंडरकवर' फैक्टरों ने कराई बंपर वोटिंग, 8% अधिक वोटिंग का क्या है राज?
Bihar Chunav 2025 Voting Percentage Phase 1: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले दौर में 2020 के मुकाबले करीब 8% ज़्यादा वोट पड़े हैं। इस बात ने सबको हैरान कर दिया है! सत्ता में बैठी पार्टियां और विपक्ष, दोनों ही इस बढ़ी हुई वोटिंग को अपनी जीत मान रहे हैं। लेकिन क्या ये सिर्फ हवा का रुख है? नहीं, अनुभवी पत्रकारों का मानना है कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के अलावा, कई छुपे हुए कारण (अंडरकवर फैक्टर) भी हैं, जिनकी वजह से इतने वोट पड़े।
यह सिर्फ लोगों का जोश नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग की अच्छी तैयारी, नीतीश कुमार की योजनाओं से खुश महिला वोटर्स, प्रशांत किशोर के अभियान से जागे चुपचाप वोट देने वाले लोग, बाहर रहने वाले बिहारियों का वोट कटने का डर और सरकार के खिलाफ नाराजगी - इन सब का मिला-जुला असर है। Oneindia की टीम ने इन सभी बातों को करीब से देखा है। आइए जानते हैं कि ये फैक्टर क्या हैं और इनका चुनाव नतीजों पर क्या असर होगा।

SIR ने ऐसे बढ़ाई वोटिंग की दर!
इस बार वोट प्रतिशत बढ़ाने में चुनाव आयोग के 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। यह सिर्फ राजनीतिक लहर का परिणाम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण सुधार का नतीजा है। दरअसल, 30 सितंबर 2025 को समाप्त हुए तीन महीने लंबे SIR अभियान के बाद, वोटर्स की अंतिम सूची में 6% यानी 47 लाख फर्जी या निष्क्रिय नामों को हटाया गया। इनमें मृत मतदाता, डुप्लीकेट नाम और दूसरे राज्य के वोटर बने लोग शामिल थे। वहीं, फॉर्म 6 के ज़रिए 21.53 लाख नए और वैध मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया। इस बड़े पैमाने पर हुई छंटनी ने 'जेनुइन' मतदाताओं की संख्या को प्रभावी रूप से कम किया, जिससे मतदान करने वाले लोगों का अनुपात स्वाभाविक रूप से बढ़ गया। इस तरह, SIR ने न केवल मतदाता सूची को साफ किया, बल्कि मतदान प्रतिशत को ऊपर ले जाने में भी निर्णायक भूमिका निभाई। यह चुनावी प्रबंधन की एक बड़ी सफलता है।
Bihar Chunav: प्रवासी बिहारी वोटर्स की लंबी कतार का 'अंडरकवर' राज़!
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में बढ़ी हुई वोटिंग के पीछे सिर्फ चुनावी उत्साह ही नहीं, बल्कि एक गहरा डर भी काम कर रहा है। राज्य के लाखों लोग जो काम या पढ़ाई के लिए बाहर रहते हैं, इस बार खास तौर पर मतदान के लिए लौटे हैं। 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभियान के तहत 47 लाख नाम काटे जाने के बाद, उन्हें अब यह आशंका सता रही है कि अगर वे इस बार वोट नहीं डालेंगे, तो कहीं अगली सूची से उनका नाम भी कट न जाए।
Oneindia की टीम ने जब सीतामढ़ी सहित बिहार के कई हिस्सों में मतदाताओं से बात की, तो यह बात सामने आई। छठ-दिवाली पर घर आए कई लोगों ने साफ कहा कि वे वोट डालकर ही वापस जाएँगे। नाम कटने का यह डर एक 'अंडरकवर' फैक्टर बन गया है, जिसने ग्रामीण इलाकों से आने वाले मतदाताओं को बूथ तक खींचा है। यह डर ही इस बार के बंपर मतदान का एक बड़ा, अनकहा कारण है।
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प्रशांत किशोर का जादू: 'वोट छोड़ चुके' लोग लौटे मतदान केंद्रों पर!
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में हुए रिकॉर्ड मतदान के पीछे एक और 'अंडरकवर' फैक्टर सामने आया है: प्रशांत किशोर (PK) के जन सुराज अभियान का गहरा प्रभाव। लंबे समय से बिहार की चुनावी व्यवस्था से निराश होकर वोटिंग से दूर रहने वाले मतदाताओं ने इस बार बड़ी संख्या में बूथों का रुख किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पलायन जैसे बुनियादी मुद्दों पर प्रशांत किशोर के सीधे और मुखर अभियान ने इन 'साइलेंट' वोटर्स के दिल को छू लिया है। Oneindia की चुनाव यात्रा के दौरान कई ऐसे मतदाता मिले जिन्होंने पिछले 10-15 सालों से वोट डालना छोड़ दिया था, यह मानकर कि बिहार में कोई बदलाव संभव नहीं। लेकिन, प्रशांत किशोर की परिवर्तन की बातों और जनसुराज के जमीनी जुड़ाव से प्रभावित होकर, वे इस बार उम्मीद की नई किरण के साथ मतदान प्रक्रिया में शामिल हुए। यह वर्ग, जो कभी निष्क्रिय था, अब बिहार की राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
नीतीश का 'धन-वर्षा' फैक्टर: महिला वोटर्स ने कैसे बढ़ाया वोट प्रतिशत
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग में मतदान केंद्रों पर महिलाओं की अभूतपूर्व भीड़ ने सबको चौंकाया है, और इस 'बंपर वोटिंग' के पीछे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सीधी आर्थिक मदद एक बड़ा 'अंडरकवर' फैक्टर बनकर उभरा है। महिलाओं का नीतीश के प्रति पहले से ही गहरा विश्वास रहा है, लेकिन इस बार उनकी सरकार द्वारा की गई 'धन-वर्षा' ने इस समीकरण को और मजबूत कर दिया है।
लगभग 1 करोड़ से अधिक जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को सीधे उनके खाते में 10,000 रुपये की मदद दी गई, साथ ही 2 लाख रुपये तक के आसान लोन का भी वादा किया गया। इस प्रत्यक्ष लाभ ने महिलाओं को नीतीश कुमार के पीछे और गोलबंद कर दिया। Oneindia की टीम ने देखा कि जो महिलाएं कभी वोट डालने नहीं जाती थीं, वे भी इस बार लंबी कतारों में खड़ी नज़र आईं। यह सिर्फ महिला सशक्तिकरण का प्रतीक नहीं, बल्कि नीतीश फैक्टर के चुनावी प्रभाव का सीधा प्रमाण है।
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नीतीश सरकार के ख़िलाफ़ 'आक्रोश' ने बढ़ाई वोटिंग
रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग के पीछे एक बड़ा कारण नीतीश सरकार के खिलाफ जनता का गहरा आक्रोश भी है। लंबे समय से उनकी गिरती स्वास्थ्य, मंत्रियों पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, और शासन-प्रशासन में कथित ढिलाई ने राज्य में एक मजबूत सत्ता-विरोधी लहर पैदा कर दी है।
इस माहौल को तेजस्वी यादव और उनके समर्थकों ने बखूबी भुनाया है, जो इस बार पूरी ताकत के साथ लोगों को मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। लोग बदलाव की उम्मीद में बड़ी संख्या में घरों से निकले। यह बढ़ा हुआ मतदान केवल राजनीतिक उत्साह नहीं, बल्कि मौजूदा सरकार के प्रति निराशा और एक नए विकल्प की तलाश का सीधा संकेत है, जिसने इस बार के वोट प्रतिशत को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिया है।
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Bihar Election 2025: ट्रेन-बस भर के बिहार लौटे वोटर्स
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में हुई अप्रत्याशित वोटिंग के पीछे एक और महत्वपूर्ण फैक्टर सामने आया है बीजेपी और जनसुराज जैसे राजनीतिक दलों का संगठित प्रयास। ये दल दूर-दराज के राज्यों में रह रहे बिहारी मतदाताओं को मतदान के लिए वापस लाने में सफल रहे। ट्रेनों और बसों में भर-भर कर लोग अपने पैतृक गाँव वोट डालने लौट रहे थे। ख़बर है कि इन दलों ने कई मतदाताओं को मुफ्त टिकट उपलब्ध कराए, ताकि वे बिना किसी खर्च की चिंता किए मतदान कर सकें। यह रणनीति न केवल मतदान प्रतिशत को बढ़ाने में सफल रही।
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