Bihar Chunav: क्या नीतीश का गेमचेंजर प्लान तय करेगा बिहार चुनाव का रिजल्ट? महागठबंधन के लिए मुश्किलें दोगुनी!
Bihar Chunav 2025 (Nitish Kumar): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं के वोट बैंक को साधने के लिए एक के बाद एक बड़े कदम उठाए हैं। बिहार की महिलाएं नीतीश कुमार की 'साइलेंट वोटर' भी कहलाती हैं। महिलाओं की गिनती आज बिहार के सबसे निर्णायक वोटरों में होती है और यही वजह है कि नीतीश कुमार ने चुनावी अखाड़े में उतरने से पहले उन्हें केंद्र में रखकर योजनाओं की झड़ी लगा दी है।
नीतीश कुमार ने अपनी 'साइलेंट वोटरों' यानी महिला वोटर्स को लुभाने के लिए एक के बाद एक कई बड़े दांव खेले हैं। नीतीश की इस रणनीति से विपक्षी खेमा महागठबंधन की मुश्किलें दोगुनी हो गई हैं। महागठबंधन को अब इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उनका वोटबैंक ना खिसक जाए। आइए जानते हैं पिछले कुछ दिनों में नीतीश कुमार की सरकार ने महिलाओं के लिए क्या 5 बड़े ऐलान किए हैं, जो गेमचेंजर साबित हो सकते हैं।

🔵 1. पेंशन में बड़ा इजाफा
24 जून को हुई कैबिनेट बैठक में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की मासिक पेंशन ₹400 से बढ़ाकर ₹1,100 कर दी गई। 11 जुलाई को इसका पहला किस्त भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में किया गया। सरकार के मुताबिक, इस योजना के करीब 1.11 करोड़ लोगों को फायदा हुआ है, जिनमें लगभग 54.5% महिलाएं हैं।
🔵 2. नौकरियों में सिर्फ बिहार की महिलाओं को मिलेगा फायदा
8 जुलाई को बिहार कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए लागू 35% आरक्षण अब केवल बिहार की मूल निवासी महिलाओं के लिए ही होगा। दूसरे राज्यों की महिलाएं अब सिर्फ सामान्य श्रेणी में प्रतियोगिता कर सकेंगी।

🔵 3. आशा और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी
30 जुलाई को आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 कर दिया गया। वहीं ममता (मातृ स्वास्थ्य) कार्यकर्ताओं को प्रति प्रसव मिलने वाला प्रोत्साहन ₹300 से बढ़ाकर ₹600 कर दिया गया।
🔵 4. महिलाओं के रोजगार के लिए 20 हजार करोड़ का पैकेज
29 अगस्त को कैबिनेट ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को मंजूरी दी। इस योजना के तहत हर परिवार की एक महिला को ₹10,000 का शुरुआती ग्रांट मिलेगा, ताकि वह कोई भी रोजगार शुरू कर सके। छह महीने बाद अगर बिजनेस सही चलता है, तो उसे ₹2 लाख तक की अतिरिक्त सहायता भी दी जाएगी।
इस योजना का कुल बजट ₹20,000 करोड़ रखा गया है। सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी और राज्य से होने वाले पलायन पर भी रोक लगाएगी।
🔵 5. जीवीका बैंक की शुरुआत
2 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹105 करोड़ की शुरुआती पूंजी बिहार राज्य जीविका निधि क्रेडिट को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (जीविका बैंक) को सौंपी। यह बैंक खासतौर पर महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों (SHG) को सस्ती दर पर लोन देने के लिए बनाया गया है। नीतीश कुमार ने 2006 में विश्व बैंक की मदद से जीविका योजना की शुरुआत की थी। आज इस योजना से जुड़े 11 लाख SHG और 1.4 करोड़ महिलाएं हैं।

क्यों हैं महिलाएं नीतीश का सबसे मजबूत वोट बैंक?
आंकड़े साफ बताते हैं कि बिहार में महिलाएं चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। 2020 विधानसभा चुनाव में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत (59.7%) पुरुषों (54.6%) से ज्यादा रहा। 2014 और 2019 लोकसभा चुनावों में बिहार उन राज्यों में रहा जहां सबसे ज्यादा सीटों पर महिलाओं का मतदान पुरुषों से आगे रहा।
2005 में सत्ता संभालने के बाद से नीतीश कुमार ने महिलाओं पर लगातार फोकस किया है। 2006 में पंचायत और नगर निकायों में 50% सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व की गईं। उसी साल लड़कियों को साइकिल देने की मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना शुरू हुई। 2016 में सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण लागू हुआ। 2018 में मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना शुरू की गई, जिसके तहत स्नातक तक पढ़ाई करने वाली लड़कियों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
बिहार चुनाव 2025: क्या होगा चुनावी असर?
स्पष्ट है कि नीतीश कुमार महिलाओं को साधकर न सिर्फ अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, बल्कि विपक्ष को बड़ा झटका देने की तैयारी में भी हैं। महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी को देखते हुए यह तय माना जा रहा है कि 2025 का चुनाव बिहार में महिलाओं के वोट से ही तय होगा।












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