Bihar Chunav 2025: राहुल गांधी के आरोपों को ECI ने कैसे किया चारोंखाने चित्त? प्वाइंट-बाय-प्वाइंट समझें
Bihar Chunav 2025- Rahul Gandhi Vs ECI: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 'वोट चोरी', मतदाता सूची में हेरफेर, और चुनाव आयोग (ECI) की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए।
ECI ने इन आरोपों को 'भ्रामक', 'आधारहीन', और 'संविधान का अपमान' करार देते हुए कड़ा जवाब दिया। आइए, राहुल गांधी के प्रमुख आरोपों और ECI के जवाब को सवाल-जवाब फॉर्मेट में प्वाइंट-बाय-प्वाइंट समझें...

राहुल गांधी के आरोप और ECI का जवाब: सवाल-जवाब फॉर्मेट
1- राहुल का आरोप: विपक्ष को डिजिटल वोटर लिस्ट क्यों नहीं मिल रही? क्या छिपाने की कोशिश हो रही है? ECI विपक्षी दलों को डिजिटल मतदाता सूची उपलब्ध नहीं करा रहा, जिससे SIR प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठता है। राहुल ने इसे 'वोट चोरी' का हिस्सा बताया।
ECI का जवाब: ECI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कमलनाथ बनाम चुनाव आयोग (2019) मामले में डिजिटल वोटर लिस्ट की मांग को खारिज किया गया था। फिर भी, बिहार में 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट मतदाता सूची सभी 12 मान्यता प्राप्त दलों, जिसमें कांग्रेस शामिल है, को साझा की गई। आयोग ने राहुल से पूछा कि अगर सूची नहीं मिली, तो कांग्रेस ने ड्राफ्ट लिस्ट पर औपचारिक शिकायत क्यों नहीं दर्ज की? बिहार में 9,17,928 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुईं, लेकिन कांग्रेस की ओर से कोई विशिष्ट शिकायत नहीं आई।
2- राहुल का आरोप: CCTV और वीडियो सबूत मिटाए जा रहे हैं - क्यों और किसके इशारे पर?
ECI का जवाब: ECI ने स्पष्ट किया कि CCTV फुटेज केवल उन मामलों में सुरक्षित रखी जाती है, जहां उम्मीदवार 45 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर करते हैं। देश में 1 लाख से अधिक मतदान केंद्रों की फुटेज देखना 273 साल का काम है, जो व्यावहारिक या कानूनी रूप से संभव नहीं। ECI ने कहा कि राहुल ने ऐसी कोई याचिका दायर नहीं की, फिर भी फुटेज मिटाने का आधारहीन आरोप लगाया। आयोग ने इसे 'लोकतंत्र की प्रक्रिया पर अनुचित सवाल' बताया।
3- राहुल का आरोप: फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट में हेरफेर हुआ - SIR इसका हिस्सा है। राहुल ने दावा किया कि कर्नाटक के महादेवपुरा और गांधीनगर में हजारों फर्जी वोटर (45-65 वर्ष की आयु) जोड़े गए, जिससे 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हारी।
ECI का जवाब: ECI ने इन दावों को 'आधारहीन और झूठा' करार दिया। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि 2024 लोकसभा चुनाव से पहले SIR हुआ था, और ड्राफ्ट रोल पर 9,17,928 आपत्तियां दर्ज हुईं, लेकिन कांग्रेस ने कोई सबूत नहीं दिया। बिहार में SIR के तहत 7.24 करोड़ गणना फॉर्म प्राप्त हुए, जिसमें 56-65 लाख अपात्र मतदाताओं (20 लाख मृत, 28 लाख प्रवासी, 7 लाख डुप्लिकेट, 1 लाख अज्ञात पते वाले) की पहचान हुई। यह प्रक्रिया सभी दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई। ECI ने कहा कि 10 लाख बूथ लेवल एजेंटों की निगरानी में डुप्लिकेट वोटिंग असंभव है।
4- राहुल का आरोप: विपक्षी नेताओं को धमकाया और डराया जा रहा है - क्यों? ये सत्तारूढ़ BJP के साथ मिलीभगत का सबूत?
ECI का जवाब: ECI ने इन आरोपों को 'भ्रामक और तथ्यहीन' करार दिया। आयोग ने कहा कि राहुल को 12 जून 2025 को पत्र और ईमेल भेजकर चर्चा के लिए बुलाया गया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया और न ही पेश हुए। ECI ने राहुल से नियम 20(3)(B) के तहत शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कर सबूत पेश करने को कहा। आयोग ने चेतावनी दी कि बिना सबूत के आरोप लगाना गैर-जिम्मेदाराना है, और राहुल को माफी मांगनी पड़ सकती है।
5- राहुल का आरोप: क्या ECI अब BJP का एजेंट बन गया है? SIR और अन्य प्रक्रियाएं BJP के इशारे पर हो रही हैं। मकसद सिर्फ विपक्ष को कमजोर करना।
ECI का जवाब: ECI ने इसे 'संविधान का अपमान' और 'करोड़ों मतदाताओं और 1.5 करोड़ चुनाव कर्मचारियों की ईमानदारी पर हमला' बताया। आयोग ने कहा कि भारत में एक व्यक्ति-एक वोट का कानून 1951-52 से लागू है, और डुप्लिकेट वोटिंग के लिए कोई सबूत नहीं है। ECI ने राहुल से पूछा कि अगर उनके पास '100% पुख्ता सबूत' हैं, तो वे हाई कोर्ट में याचिका क्यों नहीं दायर करते? आयोग ने उनके बयानों को 'धमकी भरा' और 'लोकतंत्र को कमजोर करने वाला' करार दिया।
ECI के अतिरिक्त जवाब और कदम
शपथ पत्र की मांग और कानूनी चेतावनी:
- ECI ने राहुल गांधी से उनके दावों को साबित करने के लिए नियम 20(3)(B) के तहत शपथ पत्र जमा करने को कहा। कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, और उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने 7 अगस्त 2025 को पत्र लिखकर यह मांग की।
- आयोग ने चेतावनी दी कि झूठा शपथ पत्र देना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 31 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 227 के तहत दंडनीय है। राहुल को 8 अगस्त 2025 को 1-3 बजे सबूत पेश करने के लिए बुलाया गया।
SIR की पारदर्शिता पर जोर:
- ECI ने कहा कि SIR में 1.6 लाख बूथ लेवल एजेंट (BLA) और सभी दलों के प्रतिनिधि शामिल हैं। बिहार में 1 अगस्त 2025 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई, और 1 सितंबर तक आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। सभी 243 विधानसभा सीटों की सूची डिजिटल और फिजिकल फॉर्मेट में उपलब्ध है।
- आयोग ने कहा कि ड्राफ्ट लिस्ट पर 9,17,928 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुईं, जो इसकी पारदर्शिता को दर्शाता है।
कांग्रेस की दोहरी नीति पर सवाल:
- ECI ने कांग्रेस की कर्नाटक सरकार पर निशाना साधा, जो उसी मतदाता सूची को अपनी जाति जनगणना के लिए इस्तेमाल कर रही है, जिसे राहुल 'फर्जी' बता रहे हैं। ECI ने इसे कांग्रेस की 'दोहरी नीति' करार दिया।
राष्ट्रीय विस्तार और डेटा सुरक्षा:
- ECI ने कहा कि SIR बिहार के बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में लागू होगा। आयोग ने मतदाताओं की तस्वीरों और डेटा की गोपनीयता की रक्षा का भरोसा दिया, और डीपफेक/AI के दुरुपयोग की निंदा की।
- ECI ने कहा कि बिहार में SIR के तहत 7.24 करोड़ गणना फॉर्म प्राप्त हुए, जिसमें 56-65 लाख अपात्र मतदाताओं की पहचान हुई।
सभी दलों से सहयोग की अपील:
- ECI ने सभी दलों से SIR में सहयोग करने और आपत्तियां दर्ज करने की अपील की। आयोग ने कहा कि वह सभी मतदाताओं-गरीब, बुजुर्ग, युवा, महिलाओं-के साथ 'चट्टान की तरह' खड़ा है।
राहुल गांधी बनाम ECI: सियासी पारा चढ़ा
राहुल गांधी ने SIR को 'वोट चोरी' और ECI को 'BJP का एजेंट' बताया, जिसके जवाब में ECI ने उनके आरोपों को 'भ्रामक' और 'संविधान का अपमान' करार दिया। राहुल के 5 सवालों-डिजिटल वोटर लिस्ट, CCTV फुटेज, फर्जी वोटिंग, विपक्ष को धमकाने, और ECI की निष्पक्षता-का आयोग ने तथ्यों के साथ जवाब दिया। ECI ने राहुल से शपथ पत्र मांगकर सबूत पेश करने की चुनौती दी, और कहा कि बिना सबूत के माफी मांगनी होगी। बिहार में SIR को पारदर्शी बताते हुए 1 सितंबर तक आपत्तियों का समय दिया गया है। क्या यह सियासी ड्रामा है या लोकतंत्र की सफाई?
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