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Bihar Election 2025: 22 साल बाद क्यों पड़ी SIR की जरूरत? सामान्य रिवीजन और SIR में अंतर क्या है? जानें सबकुछ

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर तीखा सियासी विवाद चल रहा है। यह प्रक्रिया भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई है, जिसका मकसद मतदाता सूची को साफ-सुथरा और अपडेट करना है।

विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस और RJD, इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं, जबकि ECI इसे पारदर्शी और संवैधानिक प्रक्रिया करार देता है। आइए जानते हैं- SIR की जरूरत क्यों पड़ी? सामान्य रिवीजन और SIR के बीच अंतर क्या है? राहुल गांधी और ECI का पक्ष क्या है?...

Why Special Intensive Revision Needed

बिहार में SIR की जरूरत क्यों पड़ी?

SIR का उद्देश्य बिहार की 7.89 करोड़ मतदाता सूची को साफ-सुथरा करना है। इसके प्रमुख कारण हैं:-

  • अपात्र मतदाताओं की पहचान: ECI के अनुसार, बिहार की मतदाता सूची में 64-65 लाख अपात्र मतदाता हैं, जिनमें 20-21.6 लाख मृत, 26-31.5 लाख स्थायी रूप से स्थानांतरित, 7 लाख डुप्लिकेट, और 1 लाख अज्ञात पते वाले शामिल हैं। SIR इन गड़बड़ियों को दूर करने के लिए शुरू किया गया है, ताकि केवल पात्र मतदाता ही सूची में रहें।
  • कम अंतर वाली सीटें: 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में 85 सीटों पर जीत-हार का अंतर 10,000 वोटों से कम था, जिसमें 8 सीटों पर 1,000 से भी कम। अपात्र मतदाताओं की मौजूदगी परिणामों को प्रभावित कर सकती है, इसलिए SIR से निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कोशिश है।
  • लंबे समय बाद व्यापक पुनरीक्षण: SIR जैसी गहन प्रक्रिया आखिरी बार 2003 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय हुई थी। 20 साल बाद यह प्रक्रिया दोहराई जा रही है, क्योंकि समय के साथ मतदाता सूची में त्रुटियां जमा हो गई हैं।
  • राजनीतिक और सामाजिक दबाव: कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों ने फर्जी मतदाताओं की शिकायत की थी। ECI का कहना है कि SIR इस मांग का जवाब है, लेकिन विपक्ष इसे सत्तारूढ़ NDA के पक्ष में 'साजिश' मानता है।
  • लोकतंत्र की मजबूती: ECI का दावा है कि SIR से मतदाता सूची में केवल योग्य मतदाता रहेंगे, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित होंगे। इसे 'लोकतंत्र की सफाई' बताया गया है।

सामान्य रिवीजन और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में अंतर क्या? समझें-

1. मकसद और गहराई:

  • सामान्य रिवीजन: यह नियमित प्रक्रिया है, जो हर साल या चुनाव से पहले होती है। इसमें नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं और मृत/स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। यह दस्तावेज आधारित और सतही प्रक्रिया है।

  • SIR: यह गहन पुनरीक्षण है, जिसमें घर-घर सत्यापन होता है। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और बूथ लेवल एजेंट (BLA) मतदाताओं से संपर्क करते हैं, गणना फॉर्म (EF) भरवाते हैं, और पते की पुष्टि करते हैं। यह प्रक्रिया अधिक विस्तृत और समय लेने वाली है।

    2. दस्तावेजी सत्यापन:

    • सामान्य रिवीजन: आधार, राशन कार्ड, और अन्य सामान्य दस्तावेज स्वीकार किए जाते हैं।
    • SIR: शुरू में ECI ने आधार और राशन कार्ड को स्वीकार्य दस्तावेजों से हटा दिया था, जिसे विपक्ष ने 'नागरिकता परीक्षा' बताया। सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई 2025 को निर्देश दिया कि आधार, वोटर ID, और राशन कार्ड को वैध माना जाए।

    3. कब-कब हुआ होते हैं दोनों?:

    • सामान्य रिवीजन: हर साल या हर चुनाव से पहले।
    • SIR: यह असाधारण प्रक्रिया है, जो दशकों बाद होती है। बिहार में यह 2003 के बाद 2025 में हो रही है।

    4. प्रभाव और विवाद:

    • सामान्य रिवीजन: कम विवादास्पद, क्योंकि इसमें नाम हटाने का दायरा सीमित होता है।
    • SIR: 56-65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने की संभावना ने सियासी तूफान खड़ा किया है। विपक्ष इसे खास समुदायों को निशाना बनाने का आरोप लगाता है।

    राहुल गांधी का पक्ष क्या है?

    राहुल गांधी ने SIR को 'वोट चोरी' और लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। उनके प्रमुख तर्क:-

    • लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश: राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि SIR के जरिए ECI सत्तारूढ़ बीजेपी के लिए काम कर रहा है। उनके पास 'वोट चोरी' के ठोस सबूत हैं, और यह मामला 'एटम बम' की तरह फटेगा।
    • वोट अधिकार यात्रा: उन्होंने SIR को संविधान और मताधिकार पर हमला बताया और 17 अगस्त 2025 से 'वोट अधिकार यात्रा' शुरू करने की घोषणा की, जिसमें विपक्षी दल शामिल होंगे।
    • वंचित वर्गों पर प्रभाव: राहुल का आरोप है कि SIR से गरीब, दलित, और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे उनका मताधिकार छीना जा सकता है।
    • ECI की निष्पक्षता पर सवाल: उन्होंने ECI को सत्ताधारी दल का 'हथियार' बताया और कहा कि यह प्रक्रिया बिना पारदर्शिता के लागू की जा रही है।

    चुनाव आयोग (ECI) का पक्ष क्या है?

    ECI ने SIR को संवैधानिक, पारदर्शी, और लोकतंत्र को मजबूत करने वाली प्रक्रिया बताया है। इसके प्रमुख तर्क:-

    • अपात्र मतदाताओं को हटाना: ECI के अनुसार, SIR का लक्ष्य मृत, प्रवासी, डुप्लिकेट, और अज्ञात पते वाले मतदाताओं को हटाना है। 27 जुलाई 2025 को आयोग ने बताया कि 7.24 करोड़ गणना फॉर्म प्राप्त हुए, और 56-65 लाख अपात्र मतदाताओं की पहचान हुई।
    • पारदर्शिता और भागीदारी: आयोग ने कहा कि 1.6 लाख BLA और सभी प्रमुख दलों के प्रतिनिधि प्रक्रिया में शामिल हैं। 1 अगस्त को ड्राफ्ट लिस्ट जारी हुई, और 1 सितंबर तक आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं। ड्राफ्ट लिस्ट ऑनलाइन उपलब्ध है, और दैनिक बुलेटिन से पारदर्शिता सुनिश्चित की जा रही है।
    • संवैधानिक आधार: ECI ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा कि SIR जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(2)(ए) और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के नियम 25 के तहत है। अपात्र मतदाताओं को हटाना उनका कर्तव्य है।
    • सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन: 10 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने आधार, वोटर ID, और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज मानने का निर्देश दिया। ECI ने कहा कि कोई भी नाम बिना नोटिस, सुनवाई, और उचित कारण के नहीं हटाया जाएगा।
    • राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार: ECI ने बिहार में SIR की सफलता के बाद इसे पूरे देश में लागू करने की योजना बनाई है।

    बिहार SIR विवाद 2025: वोटर लिस्ट पर सियासी दंगल

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) ने सियासत को गर्मा दिया है। ECI का दावा है कि यह 64-65 लाख अपात्र मतदाताओं (मृत, प्रवासी, डुप्लिकेट) को हटाकर लोकतंत्र को मजबूत करेगा। लेकिन राहुल गांधी इसे 'वोट चोरी' और संविधान पर हमला बता रहे हैं, 17 अगस्त से 'वोट अधिकार यात्रा' शुरू करने की तैयारी में हैं। सामान्य रिवीजन से अलग, SIR में घर-घर सत्यापन होता है, जिसे विपक्ष पक्षपातपूर्ण मानता है। सुप्रीम कोर्ट में 28 याचिकाएं हैं, और 1 सितंबर तक आपत्तियां दर्ज हो सकती हैं। क्या यह मतदाता सूची की सफाई है या सियासी चाल?

    ये भी पढ़ें- चुनाव आयोग के कंधे पर बंदूक रखकर पर राजनीति क्यों? मुख्य चुनाव आयुक्त ने पॉलिटिकल पार्टियों से पूछा सवाल

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