2024 के चुनाव को लेकर Bihar BJP का प्लान तैयार, लेकिन पार्टी में पड़ सकती है दरार!
Bihar Politics News: सीएम नीतीश कुमार भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता को मज़बूत करने की मुहिम चला रहे हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ प्लान तैयार करने में जुट गए हैं। भाजपा ने विपक्षी एकता के ख़िलाफ़ रणनीति तैयार कर ली है। मिली जानकारी के मुताबिक गठबंधन और टिकट बंटवारे को लेकर पूरा प्लान तैयार है।
2024 चुनाव के मद्देनज़र भाजपा ने रणनीति तो तैयार कर ली है, लेकिन खुद अपनी पार्टी में ही शीत युद्ध का मसला नहीं सुलझा पा रही है। सूत्रों की मानें तो भाजपा ने लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र टिकट बंटवारे का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है।

बिहार में 40 सीटों में से भाजपा 29 या फिर 30 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। इसके अलावा बची हुई सीटों पर उनके सहयोगी साथी चुनाव लड़ेंगे। भाजपा आलाकमान चुनाव के मद्देनज़र तैयार प्लान पर अंतिम फैसल लगाएगा। लेकिन एक सीट को लेकर मसला फंसता हुआ नज़र आ रहा है।
टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा का प्लान तो तैयार हो चुका है, लेकिन चाचा और भतीजे के बीच सीट पर दावेदारी को लेकर भाजपा की टेंशन बनी हुई है। चिराग पासवान और पशुपति पारस के बीच सियासी लड़ाई में पार्टी पिसती हुई नज़र आ रही है।
चाचा और भतीजे को मिलाकर भाजपा 6 सीटों पर हीं दांव खेलना चाहती है, लेकिन मसला यहां फंस रहा है कि पशुपति पारस खुद को मिलाकर पांच सांसद हैं, वहीं चिराग अकेले सांसद हैं। चिराग पासवान कभी भी यह नहीं चाहेंगे कि उनके खाते में एक सीट और चाचा को पांच सीटें दी जाएं।
सीटों के बंटवारे से भी बड़ा मसला हाजीपुर लोक सभा सीट को लेकर है, इस सीट पर चिराग और पशुपति पारस दोनों अपना दावा ठोक रहे हैं। आपको बता दें कि दिवंगत नेता रामविलास पासवान की पहचान इस सीट से हैं। मौजूदा वक्त में पशुपति पारस यहां के सांसद हैं।
चिराग पासवान के चाचा पशुपति पारस का कहना है कि उनके बड़े भाई ने हाजिपुर की सेवा के लिए उन्हें खुद चुना था। इसलिए वह इस सीट को नहीं छोड़ेंगे। वहीं दूसरी ओर चिराग पासवान का कहना है कि हाजीपुर उनके पिता की परंपरागत संसदीय सीट है। इसलिए 2024 का चुनाव वह इस सीट से ही लड़ेंगे।
सूत्रों की मानें तो बिहार में संभावित एनडीए गठबंधन के मद्देनज़र उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोजद को भाजपा 3 सीटें दे सकती है। पशुपति पारस, जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी को दूसरे फॉर्मूले पर मनाने की कोशिश की जाएगी। अगर यह दल नहीं मानते हैं तो इनके खाते में 1-1 सीट दिया जा सकता है। संभावित समीकरण को देखते हुए 11 सीटों पर भाजपा के सहयोगियों दल चुनाव लड़ेंगे। वहीं 29 सीटों पर भाजपा चुनाव लड़ेगी।












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