Ayush Bhalotia: बिहार के लाल आयुष भलोटिया ने NEET में रचा इतिहास, AIR 4 लाकर पूरा किया बचपन का सपना
Ayush Bhalotia Success Story: NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी हो चूका है और धीरे-धीरे स्टूडेंट्स के सफलता और मेहनत की कहानी सामने आ रही है। ऐसी ही एक कहानी सामने आई है बिहार के नवादा से। नवादा जिले के छोटे से कस्बे वारिसलीगंज से आने वाले आयुष भलोटिया ने NEET UG 2026 के रिजल्ट में इतिहास रच दिया है। उन्होंने AIR 4 लाकर ना केवल अपने परिवार का बल्कि पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने 16 जुलाई को नीट यूजी परीक्षा का परिणाम घोषित किया। इस परीक्षा में आर्यन गुप्ता और पांशुल बंसला टॉपर बने हैं। इसी परिकासा में आयुष भलोटिया ने पूरे देश में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 4 हासिल की है। इस अचीवमेंट के बाद उनके घर पर बधाई देने वालों की भीड़ लगी हुई है। परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी और इलाके के लोग मिठाइयां बांटकर और पटाखे जलाकर खुशी मना रहे हैं। आयुष की सफलता सिर्फ एक रैंक की कहानी नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि छोटे शहरों से निकलने वाले छात्र भी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।

AIR 4 के साथ AIIMS दिल्ली का सपना हुआ पूरा
मेडिकल की तैयारी करने वाले लगभग हर छात्र का सपना होता है कि उसे AIIMS नई दिल्ली में पढ़ने का मौका मिले। देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थानों में गिने जाने वाले AIIMS दिल्ली में दाखिला पाना आसान नहीं होता। आयुष की शानदार ऑल इंडिया रैंक के बाद अब उनका AIIMS दिल्ली में प्रवेश लगभग तय माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनका सपना हमेशा से एक अच्छा डॉक्टर बनकर मरीजों की सेवा करना रहा है और अब वह सपना सच होने की ओर बढ़ रहा है।
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आयुष की सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने ऐसे इलाके से यह मुकाम हासिल किया, जहां बड़े शहरों जैसी पढ़ाई की सुविधाएं और नामी कोचिंग संस्थान आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने अपनी तैयारी पूरी लगन और अनुशासन के साथ की। रोज कई घंटे पढ़ाई करना, समय का सही उपयोग करना और अपने लक्ष्य पर लगातार ध्यान बनाए रखना उनकी तैयारी का अहम हिस्सा रहा। उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान कई सुविधाओं और शौक को भी पीछे छोड़ दिया ताकि उनका पूरा फोकस सिर्फ एग्जाम पर रहे।
आयुष ने बताया अपनी सफलता का मंत्र
आयुष का मानना है कि किसी भी बड़ी सफलता के पीछे लगातार मेहनत और अनुशासन सबसे जरूरी होते हैं। उन्होंने बताया कि कठिन समय में भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटने दिया। उनका कहना है कि अगर छात्र रोज नियमित पढ़ाई करें और अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार रहें तो बड़ी से बड़ी परीक्षा में भी अच्छा प्रदर्शन किया जा सकता है। अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय आयुष ने अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उनके अनुसार, परिवार ने हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया और कभी आत्मविश्वास टूटने नहीं दिया।
उन्होंने बताया कि जब भी तैयारी के दौरान थकान या निराशा महसूस होती थी, तब माता-पिता ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। वहीं, शिक्षकों ने सही मार्गदर्शन देकर परीक्षा की तैयारी को बेहतर बनाया और मानसिक रूप से मजबूत रहने में भी मदद की।
आयुष भलोटिया की सफलता इस बात का प्रमाण है कि बड़ी उपलब्धियां सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं हैं। सही दिशा में मेहनत, नियमित पढ़ाई और परिवार और शिक्षकों का सहयोग मिलने पर छोटे शहरों के बच्चे भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। वारिसलीगंज से निकलकर देशभर में चौथा स्थान हासिल करने वाले आयुष की यह सफलता आज उन लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं।
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