बिहार विधानसभा चुनाव 2020: क्या RJD के युवराज तेजप्रताप पार्टी की नैया डूबो कर मानेंगे ?
बिहार विधानसभा चुनाव में क्या तेजप्रताप पार्टी की नैया डूबो कर मानेंगे?
नई दिल्ली। क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे ? कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी 'पंचपरमेश्वर’ की यह अमर पंक्ति लालू यादव की राजनीतिक परिस्थितियों के लिए बिल्कुल मौजूं है। लालू यादव राजद के पंचपरमेश्वर हैं। किसी विवाद पर इंसाफ का फैसला उन्हीं को करना है। लेकिन क्या वे बिगाड़ के डर से ईमान की बात नहीं कर पा रहे ?

तेजप्रताप के खिलाफ FIR
तीन साल पहले जब तेजप्रताप ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर विवादास्पद बयान दिया था तब लालू यादव ने कहा था, मैंने तेजप्रताप को समझा दिया है। अब वे दोबारा ऐसी बात नहीं कहेंगे। तीन साल बीत गये लेकिन हालात नहीं बदले। अगर पंच के नाते लालू यादव ने उसी समय दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया होता तो तेजप्रताप का रांची प्रकरण नहीं होता। माननीय विधायक होते हुए भी तेजप्रताप ने रांची में कोरोना मानक संचालन प्रकिया को तोड़ा। जब झारखंड सरकार की किरकिरी हुई तो पुलिस को उनके खिलाफ FIR दर्ज करनी पड़ी। प्राथमिकी में कहा गया है कि तेजप्रताप ने रांची आने के लिए सरकार की मंजूरी नहीं ली। नियमों के मुताबिक किसी भी व्यक्ति को दूसरे राज्य से झारखंड आने के लिए मंजूरी लेनी होती है और उसके लिए पास जारी होता है। झारखंड आने पर संबंधित व्यक्ति को 14 दिनों के क्वारेंटाइन में रहना पड़ता है। लेकिन तेजप्रताप बिना मंजूरी और पास के ही रांची आ गये। बिना क्वारेंटाइन में रहे वे पटना भी चले गये। तेजप्रताप के खिलाफ FIR दर्ज होना लालू की राजनीति विरासत पर एक आघात है। डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने तेजप्रताप कर तंज कसा है, कुछ भी हो राजद के युवराज पार्टी को डूबो कर ही मानेंगे।

क्या लालू पुत्रमोह में फंसे हैं ?
राजद में अगर किसी नेता का वजूद है तो वह लालू यादव के दम पर है। लालू परिवार में करीब दो साल से उत्तराधिकार की लड़ाई छिड़ी हुई है। इससे राजद कमजोर हो रहा है। जुलाई 2017 में जब नीतीश कुमार ने राजद से गठबंधन तोड़ कर भाजपा के साथ सरकार बनायी थी तब राजद के तत्कालीन विधायक महेश्वर यादव ने कहा था, लालू यादव के पुत्रमोह के कारण गिर गयी महागठबंधन सरकार। उस समय नीतीश ने तेजस्वी यादव को यही कहा था कि वे भ्रष्टाचार के आरोपों पर पब्लिक डोमेन में आ कर सफाई दें। उस समय विधायक महेश्वर यादव ने यह भी दावा किया था कि राजद के अधिकतर विधायक सरकार बचाने के लिए तेजस्वी यादव के इस्तीफे की पक्ष में थे। लेकिन लालू जी इसके खिलाफ अड़े रहे। लालू यादव ने तब पार्टी हित में नहीं सोचा था। इसी तरह चंद्रिका राय ने भी लालू यादव पर पुत्र मोह के कारण पार्टी को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। लोकसभा चुनाव में तेज प्रताप के कारण ही राजद जहानाबाद की जीत रही सीट भी हार गया। उन्होंने तेजप्रताप के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव दिया था लेकिन लालू यादव को मंजूर नहीं हुआ। राजद के पूर्व सांसद पप्पू यादव ने भी 2018 में लालू यादव को धृतराष्ट्र कहा था। तब पप्पू यादव ने कहा था कि परिवार के लोगों ने ही लालू यादव को धृतराष्ट्र बनने के लिए मजबूर कर दिया है।

लालू क्यों नहीं लगा पा रहे अंकुश ?
क्या पुत्र मोह के कारण लालू इंसाफ नहीं कर पा रहे हैं? क्या लालू के पंचपरमेश्वर नहीं बनने के कारण सामाजिक न्याय की लड़ाई कमजोर हो गयी है ? डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने तेजप्रताप के बहाने लालू यादव के शक्तिहीन होने पर कटाक्ष किया है। सुशील मोदी ने शुक्रवार को कहा है, जिस बड़बोले बेटे को लालू प्रसाद ना ग्रेजुएट बना पाये, ना लंपट बयान (प्रधानमंत्री की चमड़ी उधेड़ देंगे) देने से रोक पाये उसे रांची बुला कर कान में कौन सा मंतर फूंक देंगे। वे कुछ भी कर लें, राजद के युवराज पार्टी को डूबो कर ही मानेंगे। नवम्बर 2017 में केन्द्र सरकार ने लालू की सुरक्षा को जेड प्लस से घटा कर केवल जेड कर दिया था। इसके चलते लालू की सुरक्षा में लगे एनएसजी कमांडो हटा लिये गये थे। इस पर तेजप्रताप ने आपा खो कर कहा था, मेरे पिता की हत्या की साजिश रची जा रही है, नरेन्द्र मोदी की खाल उधेड़वा लेंगे। इसके बाद बिहार और देश की राजनीति में खलबली मच गयी थी। तेजप्रताप के इस बयान की देश भर में निंदा हुई। जब लालू यादव की फजीहत होने लगी तो उन्हें सफाई देने पर मजबूर होना पड़ा था। उस समय लालू ने कहा था, मैंने तेज प्रताप को समझा दिया है कि वे दोबारा ऐसा कुछ भी नहीं बोलें। लेकिन लालू यादव का यह आश्वासन खोखला साबित हुआ। जून 2018 में तेजप्रताप ने राजद के ही कुछ नेताओं को चुगलखोर कहा था और आरोप लगाया कि ये नेता ही दोनों भाइयों (तेजप्रताप और तेजस्वी) में झगड़ा लगा रहे हैं। जनवरी 2019 में तेजप्रताप ने राजद के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को औकात में रहने की चेतावनी दी थी। अब जब बात एफआइआर तक पहुंच गयी है तो यह सवाल पूछा जा रहा है कि लालू यादव आखिर कब बनेंगे पंचपरमेश्वर?












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