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Bihar elections: मांझी ने मारी NDA में एंट्री तो चिराग की बढ़ी नाराजगी, ले सकते हैं क़ड़ा फैसला

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मांझी के एनडीए में आने से चिराग पासवान की नाराजगी और बढ़ गयी। सब्र का घूंट पीकर फिलहाल वे खामोश हैं। कुछ बोलने से पहले वे हालात को भांपना चाहते हैं। चिराग की नाराजगी इस बात को लेकर है कि मांझी को एनडीए में लाने के मुद्दे पर अन्य सहयोगी दलों से कोई बात नहीं की गयी। जदयू ने एकतरफा ही मांझी से डील कर ली। लोजपा के दूसरे नेता इस मामले में संभल कर बोल तो रहे हैं लेकिन उनकी तल्खी झलक जा रही है। लोजपा नेताओं का कहना, चूंकि मांझी को जदयू ने लाया है इसलिए वह अपने कोटे से ही उन्हें सीट दे। लोजपा यह संकेत दे रही है कि मांझी के आने से उसकी हिस्सदारी में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। मांझी के आने से चिराग ही नहीं बल्कि भाजपा के कुछ नेता भी नाराज हैं। गया से भाजपा के पूर्व सांसद रहे हरि मांझी ने कहा है, जीतन राम मांझी के आने से एनडीए का तो भला नहीं होगा, हां उनके परिवार का भला जरूर हो जाएगा।

जदयू की चाल से चिराग नाराज

जदयू की चाल से चिराग नाराज

चिराग पासवान समझ गये हैं कि लोजपा पर दबाव बनाने के लिए ही मांझी को लाया गया है। 2015 में लोजपा को 43 सीटें मिलीं थी। लेकिन उस समय जदयू एनडीए में नहीं था। 2019 के लोकसभा चुनाव में लोजपा ने छह सीटें जीती थी और उसे 35 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त मिली थी। 2020 में लोजपा को कितनी सीटें चाहिए ? लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने इस मामले में कोई एक राय नहीं जाहिर की है। कभी उन्होंने कहा कि लोजपा का दावा 94 सीटों पर है। फिर उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ वर्चुअल मीटिंग में 119 सीटों पर तैयारी करने का निर्देश दिया। अंत में उन्होंने यह भी कहा कि अगर एनडीए में सम्मानजनक समझौता नहीं हुआ तो वे सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। दूसरी तरफ लोजपा के वरिष्ठ नेता और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस ने कहा कि लोजपा 2020 में भी पिछली बार की तरह 43 सीटें लेना चाहेगी। जदयू पर दबाव बनाने के लिए चिराग लगातार नीतीश कुमार पर हमला करते रहे। जदयू को लोजपा का रवैया नागवार लगा। जदयू ने लोजपा को ‘कट टू साइज' करने के लिए मांझी से मेल बढ़ा लिया। अब चिराग मौजूदा स्थिति का आकलन कर रहे रहे हैं।

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    मांझी और पासवान में पुरानी खुन्नस

    मांझी और पासवान में पुरानी खुन्नस

    चिराग ने चार दिन बाद दिल्ली में लोजपा संसदीय बोर्ड की बैठक बुलायी है। इस बैठक में जदयू के साथ ऱिश्ते और मांझी की इंट्री पर विचार होगा। लोजपा के कुछ नेताओं का कहना है कि समझौता की बजाय नीतीश कुमार का सामना करना चाहिए। जदयू जितनी सीटों पर चुनाव लड़े, उन सभी पर लोजपा उम्मीदवार दे ताकि नीतीश के अभिमान को तोड़ा जा सके। संसदीय बोर्ड की बैठक में कोई बड़ा फैसला हो सकता है। रामविलास पासवान और जीतन राम मांझी में पुरानी खुन्नस है। दलितों का बड़ा नेता कौन ? इसकी लड़ाई पिछले पांच साल से चल रही है। रामविलास पासवान खुद को जीतन राम मांझी से बड़ा नेता मानते हैं। 2015 के विधानसभा चुनाव के समय भी रामविलास पासवान और जीतन राम मांझी एनडीए में थे। दोनों ने एक दूसरे की धज्जियां उड़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। उस समय पासवान ने खुद को दलितों का एकमात्र राष्ट्रीय नेता बताया था। उन्होंने जीतन राम मांझी को राज्यस्तरीय नेता बता कर अपने साथ तुलना किया जाना अनुचित करार दिया था। 2015 में जब मांझी एनडीए में आये थे तब पासवान ने कहा था, एनडीए में मांझी का यह प्रोबेशन पीरियड है। दूसरी तरफ जीतन राम मांझी ने रामविलास पासवान के बारे में कहा था, उन्होंने सिर्फ अपने भाई-भतीजों को आगे बढ़ाया, दलितों केलिए क्या किया? मांझी खुद को महादलितों का सबसे बड़ा नेता मानते हैं।

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    क्या मांझी बड़े दलित नेता है?

    क्या मांझी बड़े दलित नेता है?

    मांझी के एनडीए में आने पर भाजपा के पूर्व सांसद हरि मांझी ने भी सवाल उठाया है। हरि मांझी का कहना है कि जीतन राम मांझी 2014 से दो लोकसभा चुनाव और एक विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। ये तीनों हार उनकी मांझी बहुल सीट पर हुई है। 2014 में वे गया लोकसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे थे। 2019 में फिर उनकी हार हुई। 2015 में मखदुमपुर की अपनी जीती हुई सीट भी हार गये थे। तब फिर उन्हें दलितों का बड़ा नेता कैसे कह सकते हैं ? उन्होंने मांझी को अवसरवादी बताया है। एक विधायक वाले जीतन राम मांझी के पुत्र को राजद ने अपने बल पर विधान पार्षद बना दिया। फिर उन्होंने महागठबंधन को छोड़ दिया। अब खुद विधान पार्षद बनने के लिए वे एनडीए में आ गये हैं। वे एनडीए में अपने परिवार के फायदे के लिए आये हैं। उनके आने से भाजपा-जदयू के समर्पित कार्यकर्ताओं की हकमारी ही होगी।

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    English summary
    Bihar assembly elections 2020:Chirag paswan is not happy with Jitan ram Manjhi's entry into NDA
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