'2015 में 43, 2020 में 137 सीटों पर चुनाव लड़ा', 2025 चुनाव में चिराग की पार्टी ने कर दी इतने सीटों की मांग
NDA seat sharing Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर हलचल तेज हो गई है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने मजबूत दावे पेश करते हुए सीटों की संख्या को लेकर संकेत दे दिए हैं। चिराग पासवान के जीजा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 2015 में पार्टी ने एनडीए के साथ मिलकर 43 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि 2020 में 137 सीटों पर उतरी थी। इस बार भी LJP(R) सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि जेडीयू और बीजेपी चिराग पासवान की पार्टी की इस मांग पर कैसी प्रतिक्रिया देती हैं, क्योंकि एक तरफ महागठबंधन पहले ही सीटों के तालमेल को लेकर अपनी रणनीति बनाने में जुटा है, दूसरी ओर NDA में भी सीट बंटवारे को लेकर मंथन जारी है।

43 से 137 तक का सफर...अब कितनी सीटें
चिराग पासवान के जीजा और सांसद अरुण भारती ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, '2015 में पार्टी ने NDA के साथ मिलकर 43 सीटों पर चुनाव लड़ा और 2020 में 137 सीटों पर चुनाव लड़ा। 2000 से लेकर 2025 तक हमारे नेता चिराग पासवान जी के नेतृत्व में पार्टी लगातार मजबूत हुई है।
इसी पृष्ठभूमि में आगामी चुनाव में, मेरी व्यक्तिगत राय में, NDA के भीतर सीट बंटवारे का LJP(R) के लिए सम्मानजनक आंकड़ा इन्हीं दोनों सीटों के आंकड़े के बीच का होना चाहिए।'
'JDU के साथ मिलकर पहली बार लड़ेगे चुनाव'
अरुण भारती ने मीडिया से बात करते हुए आगे कहा कि, 'लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना वर्ष 2000 में हुई थी। तब से अब तक पार्टी ने कभी भी बिहार विधानसभा चुनाव JD(U) के साथ नहीं लड़ा। यही कारण है कि 2025 का विधानसभा चुनाव LJP(R) के लिए ऐतिहासिक होगा, क्योंकि पहली बार LJP(R) - JD(U) के साथ गठबंधन में चुनाव मैदान में उतरेगी।'
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चिराग पासवान को 25-28 सीटें देने की चल रही है बात
सूत्रों के मुताबिक़, एनडीए में फिलहाल जिस फॉर्मूले पर सहमति बनती दिख रही है, उसके तहत बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से जेडीयू 102-103 और बीजेपी 100-102 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।
इसके अलावा, चिराग पासवान की पार्टी LJP (रामविलास) को लगभग 25-28 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। वहीं जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 6-7 सीटें और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 4-5 सीटें दिए जाने पर चर्चा चल रही है।
दूसरी तरफ अगर चिराग पासवान के राजनीतिक कद की बात करें तो वो लगातार बढा ही है। 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव चिराग के लिए सबसे कठिन था। कुछ ही दिन पहले अपने पिता को खो चुके चिराग के नेतृत्त्व में लोक जनशक्ति पार्टी का यह पहला चुनाव था। पार्टी भीतरघात से भी जूझ रही थी गठबंधन का गणित भी बिगडा हुआ था। फिर भी उस चुनाव में लोजपा ने चिराग की अगुवाई में सीट केवल एक जीता हो, लेकिन उनका वोट शेयर न केवल बरकरार रहा बल्कि उसमें मामूली (0.6 फिसदी) की बढोतरी भी हुई। लोकसभा चुनाव 2024 में भी चिराग पासवान की पार्टी एलजेपीआर का स्ट्राइक रेट 100 फिसदी रही है, उनकी पार्टी ने एनडीए गठबंधन में मिली पांच की पांच सीटों पर दर्ज़ किया था। यह भी याद रखना जरूरी है कि उनकी यह जीत तब आई जब उनके परिवार से ही उनके चाचा पशुपति पारस और भाई प्रिंस पासवान अलग हो चुके थे।
चिराग की मांग पूरी होगी या होगा मोलभाव?
वहीं, एनडीए के भीतर अब यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है कि क्या चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) को उतनी सीटें मिल पाएंगी, जितनी पार्टी ने अपनी दावेदारी के तौर पर सामने रखी है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि सीट बंटवारे की यह कवायद आसान नहीं होगी, क्योंकि चिराग पासवान अपने समर्थकों का मनोबल बनाए रखने के लिए सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अंतिम फॉर्मूला तय होने से पहले लंबे मोलभाव, राजनीतिक खींचतान और कई दौर की बैठकों का सिलसिला चलेगा।
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