Bihar SIR: नागरिकता साबित नहीं की तो कटेगा नाम—बिहार में 3 लाख वोटर को चुनाव आयोग ने क्यों भेजा नोटिस?
Bihar SIR: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया चल रही है। इस दौरान अब तक लगभग 3 लाख मतदाताओं के कागजात में गड़बड़ियां (discrepancies) सामने आई हैं। चुनाव आयोग के निर्देश पर संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) ने इन मतदाताओं को 7 दिन के भीतर दस्तावेज लेकर उपस्थित होने का नोटिस भेजना शुरू कर दिया है।
अधिकारियों के मुताबिक यह संख्या और भी बढ़ सकती है, क्योंकि अभी सभी विधानसभा क्षेत्रों में जांच पूरी नहीं हुई है। सबसे अधिक नोटिस सीमा से सटे जिलों में भेजे गए हैं। इनमें किशनगंज, पूर्णिया, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, अररिया, सहरसा, सुपौल और मधुबनी शामिल हैं। ये जिले नेपाल और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे हुए हैं, जहां नागरिकता और मतदाता सूची से जुड़े विवाद पहले भी बार-बार उठते रहे हैं।

मतदाताओं को यह दिखाना होगा कि वे भारतीय नागरिक हैं और उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज रहने का पूरा हक है। इसके लिए उन्हें आधार कार्ड, राशन कार्ड, पासपोर्ट या फिर चुनाव आयोग द्वारा तय की गई सूची में शामिल अन्य वैध दस्तावेज जमा करने होंगे।
🔴 बिहार चुनाव 2025: मतदाता सूची में कितने लोग शामिल हुए?
चुनाव आयोग के मुताबिक 1 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 7.24 करोड़ मतदाता शामिल हुए थे। सभी पंजीकृत मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए 11 दस्तावेजों की सूची में से प्रमाण जमा करने का समय 1 सितंबर तक दिया गया है। अब तक आयोग को 98.2% मतदाताओं के दस्तावेज प्राप्त हो चुके हैं।
🔴 किन्हें भेजा जा रहा है नोटिस?
ERO उन मतदाताओं को नोटिस भेज रहे हैं, जिन्होंने कोई दस्तावेज जमा नहीं किया है। जिनके दस्तावेज अधूरे या गलत पाए गए हैं। जिनकी नागरिकता या पात्रता पर संदेह है।
नोटिस में लिखा गया है कि आपके दस्तावेजों की जांच के दौरान विसंगतियां मिली हैं, जिससे इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाता के रूप में आपका अधिकार संदिग्ध लगता है। इसलिए आपको निर्धारित समय और स्थान पर मूल दस्तावेज़ लेकर पेश होना होगा।
🔴 मतदाता सूची से नाम कब हटेगा?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि किसी का नाम सुनवाई और ERO द्वारा आदेश जारी किए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। "संदिग्ध नागरिकता" की जानकारी बूथ स्तर अधिकारियों (BLOs) और प्रवर्तन एजेंसियों से मिली है।
🔴 अब तक कितने नाम हटे?
चुनाव आयोग के मुताबिक बिहार में कुल 7.89 करोड़ मतदाताओं को फॉर्म भरना था, जिसकी अंतिम तारीख 25 जुलाई तय की गई थी।
इसमें से 7.24 करोड़ फॉर्म मिले, यानी लगभग 65 लाख नामों को ड्राफ्ट सूची से हटा दिया गया। हटाए गए नामों में वे लोग शामिल हैं जो या तो मृतक, स्थानांतरित, एक से अधिक जगह पंजीकृत या अनुपलब्ध पाए गए।
🔴 नागरिकता साबित करने के नए नियम क्यों?
- चुनाव आयोग ने 2003 के बाद पंजीकृत सभी मतदाताओं से नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज मांगे हैं।
- विशेष रूप से 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे लोगों से उनके जन्म प्रमाण और माता-पिता के जन्म स्थान/तारीख के सबूत मांगे गए हैं।
- इसका उद्देश्य नागरिकता की पुष्टि करना है। यह तरीका चुनाव आयोग की पुरानी प्रथा से अलग है, जिसमें हर साल और चुनाव से पहले सिर्फ अपडेट किया जाता था। चुनाव आयोग के इस आदेश को कई याचिकाओं के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।












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