Bhagalpur Lok Sabha Seat: 1984 के बाद कांग्रेस नहीं दर्ज कर सकी जीत, जानिए सियासी इतिहास
Lok Sabha Election 2024, Bhagalpur Seat Profile: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर देशभर में NDA बनाम INDIA की सियासत जारी है। राजनीतिक पार्टियां मतदाताओं को लुभाने के लिए रणनीति बनाने में जुटी हुई हैं। वहीं बिहार में भी सभी 40 लोकसभा सीटों पर चुनावी चर्चा तेज़ हो चुकी है। प्रदेश के ऐतिहासिक और प्राचीन शहर में भागलपुर की गिनती होती है।
आज हम आपको बिहार की रेशम नगरी, भागलपुर लोकसभा सीट का इतिहास और समीकरण बताने जा रहे हैं। 1952 में हुए लोकसभा चुनाव के वक्त पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र में भागलपुर की गिनती होती थी। नए परिसीमन के बाद पूर्णिया और भागलपुर अलग-अलग लोकसभा सीट बनी।

भागलपुर लोकसभा सीट पर पहली बार 1957 में पहली बार इस सीट पर चुनावी मैदान में कांग्रेस ने बाज़ी मारी थी। 1957 से लगातार 1984 तक (1977 के चुनाव को छोड़कर) कांग्रेस प्रत्याशी जीत का परचम लहराते रहे। पूर्व सीएम रह चुके स्व. भागवत झा 5 बार यहां से सांसद चुने गए।
1977 के लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी के प्रत्याशी रामजी सिंह ने कांग्रेस के दिग्गज नेता भागवत झा को सियासी मात दी थी। 1989 भागलपुर दंगा के बाद कांग्रेस का वर्चस्व ना के बरारब हो गया और इसके बाद से एक भी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी जीत का परचम नहीं लहरा सके।
1989 से लेकर 1996 जनता प्रत्याशी चुनचुन प्रसाद यादव ने सांसद की कुर्सी संभाली। पहली बार 1998 में भाजपा ने जीत दर्ज की। प्रभाष चंद्र तिवारी ने भाजपा का कमल खिलाया, वहीं 1999 में कम्युनिस्ट नेता सुबोध राय ने भाजपा के खाते से सीट अपने खाते में कर लिया।
2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने भागलपुर विधानसभा सीट पर पार्टी का परचम दोबारा से बुलंद किया। भाजपा नेता शहनवाज हुसैन भी दो बार यहां से जीत दर्ज की, 2014 लोकसभा चुनाव में राजद प्रत्याशी शैलेश कुमार मंडल ने भाजपा नेता शहनवाज़ हुसैन को सियासी मात दी थी। वहीं 2019 में NDA गठबंधन की वजह से जदयू प्रत्याशी अजय मंडल ने चुनावी दांव खेला काफी मार्जिन के साथ जीत दर्ज की।












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