पाकिस्तान से दुल्हन बनकर आई, Bhagalpur में शिक्षिका और वोटर बनी! प्रशासन की खोज में हर बार गायब हुई इमराना
Bhagalpur News: 1958 का साल... पाकिस्तान से आई एक महिला इमराना खानम ने सीमांचल की मिट्टी में कदम रखा। कहा जाता है कि उसने यहां के कजरैली सिमरिया निवासी मुहम्मद इबनुल हसन से प्रेम-विवाह किया और यहीं की होकर रह गई। लेकिन यह कहानी महज़ एक इत्तेफ़ाक़ नहीं, बल्कि एक गहरी साज़िश का हिस्सा थी।
जिससे उसने शादी की-वह कैथा टीकर के सरकारी विद्यालय का शिक्षक था। उसी के सहारे इमराना ने न सिर्फ अपना ठिकाना बनाया बल्कि सरकारी नौकरी तक हासिल कर ली। वह उर्दू मध्य विद्यालय, बरहपुरा में बतौर शिक्षक बहाल हुई-एक ऐसी जगह, जहां वह असल में कभी हो ही नहीं सकती थी।

नागरिकता की 'जुगाड़'
भारत आने के बाद इमराना ने दस्तावेज़ों में हेराफेरी की। आधार कार्ड (नंबर 303409848324) से लेकर मतदाता पहचान पत्र (इपिक नंबर BNS4691630) तक सब कुछ उसने जाली काग़ज़ों पर हासिल कर लिया। इतना ही नहीं, वोटर लिस्ट में नाम जोड़कर बूथ संख्या 268 से वोट भी डालती रही।
दरअसल, वह पाकिस्तान से पासपोर्ट नंबर 981093 और वीज़ा नंबर G327-C के सहारे 12 जनवरी 1958 को भारत आई थी। वीज़ा का विस्तार न कराने पर जब गृह विभाग की नज़र उस पर गई तो उसने अपनी पहचान बदलकर इमराना खातून कर ली और गुमनाम ज़िंदगी जीती रही।
खोज में प्रशासन, लेकिन हर बार ओझल
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी के आदेश पर बीएलओ फरजाना खातून जब एसआईआर के तहत सत्यापन के लिए पहुंचीं तो इमराना घर से 'गायब' हो चुकी थी। अब फार्म-7 के तहत उसका नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इमराना ही नहीं, भागलपुर में एक और पाकिस्तानी महिला का किस्सा सामने आया है। मुहम्मद तफ़ज़ील अहमद की पत्नी फिरदौसिया खानम 19 जनवरी 1956 को तीन माह के वीज़ा पर भारत आई थी। उसने भी पहचान पत्र बनवा लिया और मतदाता सूची में नाम दर्ज करा लिया। बीएलओ जब उसके टैंक लेन, भीखनपुर स्थित घर सत्यापन के लिए गईं तो वह भी सामने नहीं आई। उसका नाम भी हटाने की प्रक्रिया जारी है।
कहानी अधूरी है या सच की परत खुल रही है?
प्यार, शादी और नागरिकता के इस खेल ने प्रशासनिक तंत्र की नाकामी को उजागर कर दिया है। सवाल यह है कि दशकों तक वोट डालने, शिक्षक बनने और सरकारी सुविधाएं लेने वाली ये पाकिस्तानी महिलाएं अब तक कैसे परदे के पीछे छिपी रहीं? और क्या अब इनकी पूरी परतें उठ पाएंगी-या यह रहस्य फिर किसी मोड़ पर अधूरा छूट जाएगा?












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