बागेश्वरधाम के धीरेंद्र शास्त्री की 'बिहार कथा' का आंखों देखा हाल
Dhirendra Shastri in Bihar: बिहार में बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री का दरबार बीते 13 मई से 17 मई तक लगा। इस दौरान लाखों भक्त और समर्थक उनके दरबार पहुंचे।

Dhirendra Shastri in Bihar: पटना। भोजपुर जिले का चरपोखरी स्टेशन। सुबह के पौने आठ बजे हैं। स्टेशन पर काफी भीड़ है। महिलाओं की संख्या कुछ ज्यादा है। हर तरफ बागेश्वधाम महाराज धीरेन्द्र शास्त्री की चर्चा हो रही है। सबको बाबा के दरबार में जाने की जल्दबाजी है। उपस्थित जनसमूह जाति और वर्ग के बंधन से मुक्त है। इनमें अमीर भी हैं, गरीब भी हैं। सवर्ण भी हैं, पिछड़े भी हैं। सब एक साथ ट्रेन के आने का इंतजार कर रहे हैं। भावनाओं की प्रबलता ने राजनीति के भेद को खत्म कर दिया है। किसी को हनुमंत और रामकथा सुननी है तो किसी को अपने कष्टों का निवारण करना है। वहां मौजूद कुछ लोग महाराज धीरेन्द्र शास्त्री के पर्ची चमत्कार को ढकोसला भी बता रहे हैं। लेकिन दरबार में जाने वाले लोगों की आस्था पर कोई फर्क नहीं पड़ता। तभी सासाराम-पटना पैसेंजर ट्रेन स्टेशन पर पहुंचती है। भीड़ इतनी कि जैसे तैसे लोग बोगी में घुसते हैं। लोग पर लोग लदे हैं।
ट्रेन में भीड़ ही भीड़
ट्रेन आरा होते हुए दानापुर पहुंचती है। यहां भी मेला जैसा नजारा है। जितनी उतरने वालों की भीड़ उतनी चढ़ने वालों की भीड़। दानापुर से ही नौबतपुर और तरेत पाली जाने के लिए ऑटो, जीप या बस मिलती है। ट्रेन से आने वाले ज्यादातर लोग दानापुर से ही बाबा के दरबार में आ-जा रहे हैं। वैसे पटना से भी मोटर के जरिये यहां पहुंचा जा सकता है। लेकिन यह रास्ता थोड़ा दूर है। दानापुर में पहले से अधिक भीड़ हो जाती है। यहां से दो स्टेशन बाद पटना जंक्शन है। जिन लोगों को दरभंगा, समस्तीपुर, सहरसा, पूर्णिया, किशनगंज, बेगूसराय जाना है उनको पटना से ट्रेन पकड़नी है। जिन्हें सोनपुर, छपरा, सीवान, गोपालगंज, बेतिया, मोतिहारी जाना है उन्हें पाटलिपुत्र स्टेशन जाना है।
आस्था बनाम तर्क
दानापुर से ट्रेन खुली। बैठने की जगह नहीं है। चार-पांच छात्र बागेश्वर धाम महाराज की तस्वीर लिये खड़े हैं। शीशे में मढ़ी तस्वीर को हिफाजत से रखने के लिए वे इधर उधर देखते हैं। फिर कोई जगह नहीं देख कर अपने हाथ में दबा कर सीने से सटा लेते हैं। यह देख कर एक सज्जन, महाराज धीरेन्द्र शास्त्री पर कुछ प्रतिकूल टिप्पणी करते हैं। तब एक छात्र बोलता है, देखिए हम लोग आपसे झगड़ा नहीं करेंगे। हम सहरसा से आये हैं। कॉलेज में पढ़ते हैं। विज्ञान और अंधविश्वास के बार में हमने भी पढ़ा है। लेकिन अगर आप एक बार उनकी कथा सुन लेंगे या पर्ची से समस्या का निवारण कर लेंगे तब शायद ही आप उनकी आलोचना करेंगे। ट्रेन और स्टेशन पर दिख रही भीड़ तो कुछ भी नहीं। अगर आप कथा स्थल पर जाएंगे तो आश्चर्यचकित रह जाएंगे। पांच लाख से अधिक लोग वहां जुट रहे हैं। करीब लाख लोग तो रातभर वहीं जमे रहते हैं। हटाने पर भी नहीं हटते। इस आस्था को आप तर्क या राजनीति की कसौटी पर नहीं कस सकते।
हनुमंत कथा के दौरान कैसा रहा माहौल ?
ट्रेन में वैसे भी स्वयंभू राजनीतिक विश्लेषकों की कमी नहीं होती। बातचीत में कोई एक मुद्दा उछलता नहीं कि वे लपक लेते हैं। एक सज्जन पूछते हैं, राजद के एक बड़े नेता ने महाराज धीरेन्द्र शास्त्री के विरोध की घोषणा की थी। लेकिन वे ऐसा कर नहीं पाये। क्या कथा स्थल के पास किसी राजनीतिक विरोध की झलक दिखी ? वह छात्र हंसने लगा, मैं आपकी बात समझ रहा हूं। ऐसा कुछ नहीं दिखा जो आप सोच रहे हैं। दानापुर उतरने के बाद हमलोगों ने गूगल मैप पर कथा स्थल जाने का रास्ता देखा था। दानापुर स्टेशन से करीब 18 किलोमीटर दूर नौबतपुर है। फिर वहां से तरेत पाली मठ करीब चार किलोमीटर दूर है जहां बागेश्वर महाराज का कार्यक्रम आयोजित किया गया है।
बिना भेदभाव के गांव वालों ने की मदद
तरेत मठ की करीब 30 एकड़ जमीन पर विशाल पंडाल बने हैं। 3 लाख वर्गफीट में जर्मन पंडाल फैला हुआ है। मठ के आसपास के कई गांवों में लोग बाहर से आ कर डेरा डाले हुए हैं। तरेत, पाली, हदसपुरा,परसा गांव और नौबतपुर बाजार में लोगों का हुजूम है। इनमें से कई जगह राजद समर्थक लोग भी रहते हैं। लेकिन वे कथा सुनने आये लोगों की हर तरह से मदद कर रहे हैं। गर्मी में पीने और नहाने के लिए पानी चाहिए। गांव के लोग बिना किसी भेदभाव के यह सुविधा दे रहे हैं। यहां राजनीति की कोई चर्चा तक नहीं। हर तरफ बागेश्वर महाराज और हनुमंत कथा की बात हो रही है। ऐसा आयोजन पटना के गांधी मैदान में कभी नहीं हो सकता था।
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जनसैलाब का राजनीतिक अंकगणित
छात्र की बात सुन कर एक दूसरे सज्ज्न कहते हैं, तरेत पाली में आम लोगों के बीच भले राजनीति न दिखी हो लेकिन पटना में तो नेता जम कर राजनीति कर रहे हैं। बागेश्वर महाराज के पटना प्रवास के बाद बिहार का राजनीतिक तापमान काफी बढ़ गया है। राजद के नेता धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ बयान दे रहे हैं तो भाजपा के नेता उनके समर्थन में। बागेश्वर धाम बाबा के कार्यक्रम में उमड़ी आश्चर्यजनक भीड़ ने राजनीतिक चिंतकों को बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया है। बागेश्वर धाम महाराज के दरबार में पांच लाख लोग जुटे कि दस लाख, इस पर विवाद हो सकता है लेकिन यह भीड़ नहीं जनसैलाब था। पूरे बिहार के कोने कोने से लोग जुटे। इतने लोगों का जुटान कोई भी राजनीतिक दल नहीं कर सकता। चूंकि चुनावी राजनीति में संख्या बल ही सबसे बड़ी ताकत है। इसलिए भाजपा इस आयोजन का राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। दूसरी तरफ राजद के कुछ नेता बागेश्वरधाम महाराज का विरोध तो कर रहे हैं लेकिन संभावित नतीजों की सोच तक खुल कर सामने नहीं आ रहे। इसका असर बिहार की राजनीति पर जरूर पड़ेगा। इसी तर्क-वितर्क के बीच ट्रेन पटना पहुंचती है तो यात्री उतरने की तैयारी शुरू करने लगते हैं।












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