बिहार प्रदेश अध्यक्ष से हटाए गए अशोक चौधरी बोले- मुझे बेइज्जत कर हटाया गया

अशोक चौधरी ने कहा कि मेरी सम्मानजनक विदाई भी हो सकती थी, पार्टी के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं लेकिन जिस प्रकार फैसला लिया गया वो गलत है।

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    Ashok Chaudhary disappointed from Sonia Gandhi, Can Join Nitish Kumar's Party । वनइंडिया हिंदी

    पटना। पिछले एक महीने से चल रही बिहार कांग्रेस में टूट की खबर पर अब पूर्ण विराम लग चुका है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर अशोक चौधरी को पार्टी के आलाकमान ने अध्यक्ष पद से हटा दिया है। जिसके बाद राजनीतिक गलियारे में अशोक चौधरी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि पार्टी के इस फैसले के बाद वो कांग्रेस से हमेशा हमेशा के लिए नाता तोड़कर दूसरी पार्टी या जेडीयू खेमें में जा सकते हैं। तो दूसरी तरफ ऐसा भी कहा जा रहा है कि वो 18 विधायकों के साथ पार्टी तोड़कर अलग गुट बना सकते हैं। वहीं कांग्रेस पार्टी से अभी तक अशोक चौधरी को निकाला नहीं गया है इसलिए वो कांग्रेस के सदस्य रह सकते हैं। या फिर पार्टी और विधान परिषद से इस्तीफा देकर आगे की रणनीति तैयार करेंगे। अशोक चौधरी को हटाए जाने के बाद ऐसा कहा जा रहा है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात से लौटने और दशहरा की छुट्टी खत्म होने के बाद बिहार कांग्रेस के पूर्ण कालीन अध्यक्ष की घोषणा कर सकते हैं।

    चौधरी जल्द करेंगे अगली रणनीति का ऐलान

    चौधरी जल्द करेंगे अगली रणनीति का ऐलान

    जानकारी के मुताबिक बिहार कांग्रेस का कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष के कार्यभार ग्रहण करते ही पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी अपनी अगली रणनीति का खुलासा करेंगे। ऐसा कहा जा रहा है कि अशोक चौधरी कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता और विधान परिषद से इस्तीफा दे सकते हैं। समर्थकों के साथ विधान परिषद के उपसभापति को उसके पास पहुंचे का मौका अशोक चौधरी से अब छीन लिया गया है। इसलिए वो मीडिया के सामने ही इस्तीफे के पद को पेश करते हुए आगे की रणनीति तय करेंगे और दलित होने की वजह से कांग्रेस में प्रताड़ित होने के बात भी कहेंगे।

    नीतीश की तरफ देख रहे हैं चौधरी

    नीतीश की तरफ देख रहे हैं चौधरी

    वहीं दूसरी तरफ बिहार के सियासी गलियारों में ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि अब डॉक्टर अशोक चौधरी के दूसरे पार्टी में जाने का रास्ता साफ हो गया है। सूत्रों की अगर मानें तो वो जेडीयू में शामिल हो सकते हैं क्योंकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के वो काफी करीबी माने जाते हैं और उन्हें जेडीयू में दलित नेता के तौर पर सेकंड लाइन की लीडरशिप में जगह भी मिल सकती है। ऐसे में अब देखना ये है कि डॉक्टर अशोक चौधरी की आगे की रणनीति क्या होगी। फिलहाल उनकी आगे की रणनीति पर बिहार के साथ-साथ देश के राजनीतिक ज्ञाताओं की निगाहें टिकी हुई है।

    कांग्रेस ने लगाया है विधायक तोड़ने का आरोप

    कांग्रेस ने लगाया है विधायक तोड़ने का आरोप

    डॉक्टर अशोक चौधरी, बिहार के पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जिनके खिलाफ कांग्रेस विधायक को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया और इसी आरोप में उन्हें पार्टी हाईकमान के द्वारा प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। अपेक्षाकृत युवा चेहरे कादरी को बिहार कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। तो दूसरी तरफ अशोक चौधरी के हटाए जाने के बाद बिहार कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह पर भी गाज गिरनी तय मानी जा रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि सदानंद सिंह को भी बदला जाएगा क्योंकि इन दोनों नेताओं ने बिहार में महागठबंधन से जेडीयू के अलग होने के बाद कांग्रेस विधायक को नीतीश कुमार का समर्थन करने के लिए गोल बंद करने की कोशिश कर रहे थे।

    लालू संग मिलकर कांग्रेस को कराने वाले थे नुकसान!

    लालू संग मिलकर कांग्रेस को कराने वाले थे नुकसान!

    इस दौरान चौधरी ने करीब 13 कांग्रेस विधायक को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के साथ गठबंधन से नुकसान होने की दलील देकर कागज पर हस्ताक्षर भी करा लिया था लेकिन इस बात की भनक आलाकमान को लगी और इस पर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई के तहत साढ़े 4 साल तक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर बने रहे अशोक चौधरी को पद से हटा दिया गया है। जिसके बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में अशोक चौधरी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। बता दें कि अशोक चौधरी के राजनीतिक सफर के बारे में कुछ खास बातें हैं...

    सन् 2000 में बने थे पहली बार विधायक

    सन् 2000 में बने थे पहली बार विधायक

    हिंदी, अंग्रेजी पर पकड़ रखने वाले अशोक चौधरी अच्छे वक्ता भी रह चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई के दौरान ही वो कांग्रेस की राजनीति में आए थे और छात्र जीवन से राजनीति की शुरुआत की थी। छात्र जीवन में सबसे पहले एनएसयूआई से जुड़े थे और साल 2000 में पहली बार बरबीघा विधानसभा से चुनाव जीता था। चुनाव जीतने के बाद अशोक चौधरी राबड़ी देवी सरकार में कारागार राज्य मंत्री बने थे। जिसके बाद साल 2009 में वो जमुई लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें उपलब्धि नहीं मिली। फिर 2010 में बरबीघा से विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन वहां भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद वो 30 मार्च 2013 को बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष बने। बिहार कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने पार्टी को मजबूत करने के लिए कई तरह की रणनीति तैयार की, जिसके बाद साल 2014 में बिहार विधान परिषद के सदस्य बनाए गए। वहीं साल 2015 में महागठबंधन सरकार में वो बिहार के शिक्षामंत्री भी थे।

    साल 2014 में बोल रही थी चौधरी की तूती

    साल 2014 में बोल रही थी चौधरी की तूती

    कांग्रेस अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने कई काम भी किया है जिसने बिहार कांग्रेस को आगे की तरफ बढ़ाने का काम किया था। प्रखंड से लेकर जिला और प्रमंडल स्तर तक संवाद कार्यक्रम प्रारंभ किया था। साल 2014 में कांग्रेस की मजबूती के लिए सदस्यता अभियान प्रारंभ किया तो कांग्रेस की मजबूती के लिए बोधगया से चंपारण तक की पदयात्रा भी की थी। वहीं महागठबंधन सरकार में मंत्री बनने के बाद भी उन्होंने कई काम किए लेकिन बिहार में महागठबंधन टूटने के बाद बिहार कांग्रेस में फूट का कारण उन्हें बताया गया और पार्टी के द्वारा कार्रवाई की गई।

    सम्मान खोज रहे थे चौधरी

    सम्मान खोज रहे थे चौधरी

    पार्टी में कार्रवाई किए जाने के बाद अशोक चौधरी ने कहा कि मेरी सम्मानजनक विदाई भी हो सकती थी पार्टी के इस फैसले का हम स्वागत करते हैं लेकिन जिस प्रकार फैसला लिया गया वो गलत है। किसी पार्टी पदाधिकारी ने फोन करके ना तो मेरा इस्तीफा मांगा और ना ही मुझे हटाए जाने की जानकारी दी। ये सम्मानजनक तरीका नहीं है, हमने पार्टी के लिए बहुत कुछ किया था।

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