Bihar News: बिहार के आंगनबाड़ी केंद्रों पर 'पोषण' की जांच, ICDS की बड़ी कार्रवाई, क्या सुधरेगी बच्चों की तकदीर
Bihar News: बिहार के आंगनबाड़ी केंद्रों में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं और धांधली की शिकायतों के बाद, एकीकृत बाल विकास सेवाएं (ICDS) निदेशालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्यभर के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की गहन जांच की जाएगी ताकि बच्चों की उपस्थिति, उनकी वृद्धि के माप और पोषण ट्रैकर पर दर्ज जानकारी की सत्यता सुनिश्चित की जा सके। यह फैसला उन लगातार मिल रही शिकायतों के बाद आया है, जिनमें बच्चों की संख्या और पोषण से जुड़े आंकड़ों में गड़बड़ी की बात सामने आ रही थी।
क्यों हो रही है यह सघन जांच?
बिहार में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता के बावजूद, आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन में कई खामियां उजागर हुई हैं। ICDS निदेशालय को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की संख्या और उनके वृद्धि माप (ग्रोथ मॉनिटरिंग) से संबंधित गलत आंकड़े भेजे जा रहे हैं।

इसके अलावा, पोषण ट्रैकर ऐप पर लाभार्थियों की गलत जानकारी अपलोड करने और बच्चों का फेस कैप्चर न होने जैसी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आई हैं। पोषण ट्रैकर एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसे केंद्र सरकार ने बच्चों और माताओं के पोषण स्तर की निगरानी के लिए विकसित किया है। इस पर गलत जानकारी दर्ज करना सीधे तौर पर योजना के उद्देश्य को प्रभावित करता है।
जांच का तरीका और प्राथमिकताएं
ICDS के निदेशक अमित पांडेय ने बताया कि इस सघन जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। यह टीम हर सप्ताह एक जिले के तीन से चार आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण करेगी। निरीक्षण के दौरान, टीम केवल केंद्र की कार्यशैली ही नहीं, बल्कि 25 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आंगनबाड़ी केंद्रों का मूल्यांकन करेगी।
इन बिंदुओं में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति, उनके वजन और लंबाई का सही माप, और पोषण ट्रैकर पर दर्ज डेटा की सटीकता शामिल होगी। निदेशक ने स्पष्ट किया कि उन आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां से बार-बार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। यह दिखाता है कि निदेशालय उन केंद्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है जो पहले से ही संदेह के दायरे में हैं।
कार्रवाई और चुनौतियां
अमित पांडेय ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि जो सेविकाएं और सहायिकाएं जानबूझकर पोषण ट्रैकर पर गलत आंकड़े भेज रही हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह कदम उन कर्मियों पर लगाम लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है जो अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन ठीक से नहीं कर रहे हैं।
एक बड़ी चुनौती यह भी है कि वर्तमान में, केवल 55% लाभार्थियों का ही फेस कैप्चरिंग कार्य पूरा हो पाया है, जबकि यह 100% अनिवार्य है। फेस कैप्चरिंग यह सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे और किसी प्रकार की फर्जीवाड़े की गुंजाइश न रहे। इस अधूरे काम को पूरा करना भी जांच टीम के लिए एक प्रमुख लक्ष्य होगा।
आंगनबाड़ी केंद्रों का महत्व और आगामी प्रभाव
भारत सरकार द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा संबंधी सेवाएं प्रदान करना है। इन केंद्रों में किसी भी प्रकार की अनियमितता सीधे तौर पर सबसे कमजोर वर्ग के स्वास्थ्य और भविष्य को प्रभावित करती है।
इस गहन जांच से बिहार के 1,15,600 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। यह देखना होगा कि यह कार्रवाई बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य में कितना सुधार ला पाती है और क्या यह सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक नया मानक स्थापित कर पाएगी। यह कदम बिहार सरकार की बच्चों के कल्याण के प्रति गंभीरता को दर्शाता है और उम्मीद है कि इससे जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव आएगा।












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