Anant Singh Bail: ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह अभी जेल से नहीं आएंगे बाहर, दुलारचंद हत्याकांड में कोर्ट ने क्या कहा?
Anant Singh Bail: बिहार की सियासत में 'छोटे सरकार' नाम से मशहूर मोकामा विधायक अनंत सिंह को एक बार फिर बड़ा कानूनी झटका लगा है। गुरुवार 20 नवंबर को पटना की विशेष अदालत ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। यानी फिलहाल अनंत सिंह बेऊर जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि चुनाव जीतने के बाद उन्हें राहत मिल जाएगी लेकिन कोर्ट के फैसले ने हालात उलट कर दिए।
कोर्ट ने क्यों खारिज की जमानत याचिका?
अनंत सिंह ने न्यायिक हिरासत में रहते हुए जमानत के लिए आवेदन दिया था। उनका तर्क था कि वे चुनावी माहौल में फंसाए गए हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप अतिरंजित हैं। लेकिन पटना की विशेष अदालत ने दुलारचंद हत्याकांड की गंभीरता और पुख्ता आरोपों को देखते हुए फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया है।

कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस केस में कई तरह की आपराधिक धाराएं लगी हैं और चश्मदीदों के बयान कोर्ट के सामने मौजूद हैं। ऐसे में निचली अदालत ने इसे 'रिहाई के लिए उपयुक्त मामला' नहीं माना। अब संभावना है कि अनंत सिंह हाईकोर्ट का रुख करेंगे।
🟡 दुलारचंद हत्याकांड: चुनाव प्रचार के बीच हुई बड़ी वारदात
30 अक्टूबर को मोकामा विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दुलारचंद यादव की हत्या ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। दुलारचंद जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थक थे और उस दिन वे चुनावी कैंपेन में लगे हुए थे। उसी समय पीयूष प्रियदर्शी और जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह का काफिला एक-दूसरे के सामने आ गया।
पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हुआ जो देखते-देखते मारपीट और फायरिंग में बदल गया। गोली दुलारचंद यादव के पैर में लगी, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया कि उनकी मौत किसी भारी वाहन के चढ़ जाने से हुई। परिजनों ने आरोप लगाया कि गोली मारने के बाद उन पर जानबूझकर गाड़ी चढ़ाई गई।
घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया, कई जगह उपद्रव, फायरिंग और वाहनों में तोड़फोड़ की खबरें आईं। पुलिस ने इस केस में अनंत सिंह समेत 80 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया।
🟡 अगला कदम: क्या हाईकोर्ट से मिलेगी राहत?
निचली अदालत से जमानत न मिलने के बाद अब कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अनंत सिंह जल्द ही पटना हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं। हालांकि केस की गंभीरता को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि उन्हें तुरंत राहत मिल पाएगी या नहीं।
फिलहाल इतना तय है कि मोकामा के 'छोटे सरकार' को अभी बेऊर जेल की सलाखों के पीछे ही दिन काटने होंगे और दुलारचंद हत्याकांड का फैसला उनकी राजनीतिक यात्रा पर बड़ा असर छोड़ सकता है।
🟡 जेल में रहते हुए जीता चुनाव, छठी बार विधायक बने
दुलारचंद हत्याकांड में गिरफ्तार होने के बाद से अनंत सिंह बेऊर जेल में हैं। इसी दौरान विधानसभा चुनाव हुए और मोकामा सीट से उन्होंने 28,206 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। महागठबंधन की प्रत्याशी वीणा देवी को उन्हें कड़ा मुकाबला न दे पाने का नुकसान उठाना पड़ा।
यह पहला मौका नहीं है जब अनंत सिंह जेल में रहकर चुनाव जीते हों। उनकी राजनीतिक पकड़ इस कदर है कि उनकी पत्नी नीलम देवी भी इसी सीट से विधायक रह चुकी हैं।
🟡 अनंत सिंह: रिकॉर्ड संख्या में दर्ज आपराधिक मामले
चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, अनंत सिंह पर 28 से ज्यादा गंभीर मामले दर्ज हैं-किस मामले में कितने लंबित हैं, इसका विवरण अलग-अलग वर्षों में भिन्न रहा है। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, धमकी, अपराधियों को शरण देना, अवैध हथियार, अपहरण, डकैती, सरकारी आदेशों का उल्लंघन सहित कई आरोप शामिल हैं। हालांकि, अभी तक किसी भी मामले में अदालत ने उन्हें दोषी करार नहीं दिया है।
🟡 दुलारचंद की पृष्ठभूमि: खुद भी रहा है 'बाहुबली' टैग
दिलचस्प बात यह है कि दुलारचंद यादव का नाम भी 1990 के दशक के कुख्यात अपराधियों की सूची में रहा है। उन पर कई गंभीर मुकदमे दर्ज थे। उनका अनंत सिंह से करीब दो दशक पुराना निजी विवाद भी बताया जाता है। इसलिए यह हत्या राजनीतिक से ज्यादा व्यक्तिगत रंजिश की तरह भी देखी जा रही है।
🟡 'छोटे सरकार' की सियासत और स्टाइल हमेशा सुर्खियों में
मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का परिवार 1990 के दशक से प्रभावशाली रहा है। उनके बड़े भाई दिलीप सिंह दो बार विधायक चुने गए थे और 'बड़े सरकार' के नाम से पहचान बनाई। इसके बाद अनंत सिंह को 'छोटे सरकार' कहा जाने लगा।
सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि उनका स्टाइल भी हमेशा चर्चा में रहा बग्घी पर बैठकर वीडियो बनवाना, अनोखे बयानों से सुर्खियां बटोरना, सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप... ये सब उनकी पहचान का हिस्सा बन चुके हैं।












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