बेगूसराय के मंदिर में चल रही थी दारू और मुर्गा पार्टी, सीएम नीतीश का कानून और भगवान सब दरिंदों के ठेंगे पर
मंदिर का अर्थ मन से दूर कोई स्थान ,मंदिर एक ऐसा पवित्र स्थान है जहा प्रवेश मात्र से ही हम सकारात्मक महसूस करते है क्यूंकि वह मंदिर वास्तु अनुसार बनाया जाता है और इसे बनाते वक्त भी कही चीज़ो का ध्यान रखा जाता है। जिससे मंदिर में आनेवाले को सकारात्मक ऊर्जा मिले, जिससे हमे शांति मिलती है।लेकिन बिहार के बेगूसराय से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमे कुछ लोगों द्वारा एक पवित्र मंदिर को ही अपनी अय्याशी का अड्डा समझ लिया। मंदिर में धार्मिक भावना को आहत किया गया, मंदिर में शराब पी जा रही थी और मुर्गे का मांस बनाने की तैयारी की जा रही थी। बावजूद इसके कि बिहार में शराब बैन है।

मंदिर के ऑफिस में चल रही थी पार्टी
शराबबंदी के बीच बेगूसराय के बखरी नगर स्थित वैष्णवी दुर्गा मंदिर के ऑफिस में दारू और मुर्गा की पार्टी किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। सोमवार की शाम शक होने के बाद मंदिर परिसर में नवाह यज्ञ की तैयारी कर रहे स्थानीय लोगों ने पकड़ लिया। जिसके बाद मंदिर में जमकर हंगामा होने लगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर में धार्मिक भावना को आहत किया गया है, जहां शराब पी जा रही थी और मुर्गे का मांस बनाने की तैयारी की जा रही थी। शराब और मुर्गा पार्टी की सूचना पर बखरी थाना के एसआई विनय सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंच पूरे मामले की जांच पड़ताल की। पुलिस ने मौके से मुर्गे का कच्चा मांस, कटा हुआ प्याज, मसाला और शराब की बोतल बरामद की है।

लगातार शराब और मांस की पार्टी की जाती है
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर कमेटी के सचिव के पास ऑफिस की चाबी रहती है। बीते कई माह से यहां लगातार शराब और मांस की पार्टी की जाती थी। रविवार की देर शाम भी मांस बनाने की तैयारी चल रही थी और लोग शराब पी रहे थे। इसकी भनक आसपास के लोगों को लग गई। जिसके बाद काफी संख्या में लोग मंदिर परिसर में इकठ्ठा हो गए। लोगों को देख शराब पीने वाले 4 लोग वहां से भाग गए। इस घटना से स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश है और शराब पार्टी में शामिल लोगों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। मामले की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची बखरी थाना पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया तथा कार्रवाई का आश्वासन दिया।

असफल है शराबबंदी
नीतीश कुमार ने पूर्व में एक बार कहा था कि शराबबंदी की मांग देश के अन्य राज्यों में भी होने लगेगी। निश्चित रूप से इसकी कामयाबी देश-दुनिया में भी यह अध्ययन का विषय बनेगा। वही सुशील कुमार मोदी ने कहा था कि नोटबंदी से भी ज्यादा कठिन निर्णय शराबबंदी है। नोटबंदी में तो एक बार सर्जिकल स्ट्राइक किया गया, लेकिन शराबबंदी में रोज सर्जिकल स्ट्राइक करना होता है। उनकी कही यह बात सही साबित होती है। क्यूंकि शराबबंदी कितनी सफल हुई है और कितनी नहीं, इस घटना से साफ़ पता चल जाता है। जब मंदिर जैसे पवित्र स्थल पर यह कुकर्म हो रहा है तो बाकी बिहार के हाल को बखूबी समझा ही जा सकता है।












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