अग्निपथ योजना: जल रहा है बिहार, फिर भी चुप क्यों हैं नीतीश कुमार ?
पटना, 17 जून: अग्निपथ योजना के विरोध के नाम पर बिहार को हिंसा की आग में झोंक दिया गया है। पिछले तीन दिनों से वहां उपद्रवी और दंगाई नियंत्रण से बाहर होकर कानून-व्यवस्था को हाथ में लिए हुए हैं। पुलिस अपने हिसाब से उन्हें रोकने की कोशिश में जुटी दिखती जरूर है, लेकिन कहीं ना कहीं हिंसा रोकने की उसकी इच्छाशक्ति कम पड़ जा रही है। जबकि, बिहार में गृह विभाग खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के जिम्मे है। सवाल है कि सीएम नीतीश हिंसक घटनाओं को लेकर चुप्पी क्यों साधे बैठे हैं ? उन्होंने यह आर्टिकल लिखे जाने तक कम से कम ट्विटर के जरिए भी एक अपील तक करना जरूरी नहीं समझा है!

जल रहा है बिहार
केंद्र सरकार की ओर से भारतीय सशस्त्र सेना में भर्ती के लिए घोषित 'अग्निपथ योजना' के विरोध में पिछले तीन दिनों से बिहार जल रहा है। कई ट्रेनें फूंकी जा चुकी हैं। राज्य की उपमुख्यमंत्री रेणु देवी तक के बेतिया स्थित आवास पर हमला बोला जा चुका है। नीतीश कुमार सरकार की मुख्य सहयोगी दल भाजपा के कई दफ्तरों को भी निशाना बनाया जा चुका है। बीजेपी के कई नेता भी प्रदर्शनकारियों के निशाने पर हैं। लेकिन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फिर भी चुप हैं। उनके अपने ट्विटर हैंडल पर सबसे आखिरी ट्वीट गुरुवार का है, जिसमें उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं के नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के उन्मुखीकरण कार्यक्रम के उद्घाटन कार्यक्रम का जिक्र किया है, लेकिन राष्ट्रीय संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और सड़कों पर विरोध के नाम पर सरेआम दंगा करने वालों पर उनकी जुबान नहीं खुल रही है।
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चेहरा छिपाकर हिंसा करने से उठ रहे हैं सवाल
बिहार तीन दिनों से इस हिंसा का केंद्र बना हुआ है और सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि ज्यादातर दंगाई प्रदर्शनकारियों के बीच में घुसकर चेहरा छिपाकर गंभीर हिंसक वारदातों को अंजाम देने में लगे हुए हैं। राज्य में इनका मुख्य निशाना रेलवे की संपत्तियां बन रही हैं। दानापुर, इस्लामपुर, लखीसराय, आरा समेत कई स्टेशनों पर ट्रेनों को टारगेट किया गया है। प्रदर्शनकारी इस कदर बेकाबू हैं कि उनके विरोध प्रदर्शन की वजह से दरभंगा में स्कूल से बच्चों को ला रही एक बस भी उनके बीच फंस गई। मासूम बच्चे रो रहे थे और बस ड्राइवर के लिए उन्हें प्रदर्शनकारियों के बीच से सुरक्षित निकाल पाना नामुमकिन हो गया था। आखिरकार पुलिस ने जब दखल दिया, तब कहीं जाकर भूखे-प्यासे बच्चे उस जाम से निकल पाए।
विरोध प्रदर्शन में असामाजिक तत्व भी घुसे- बिहार पुलिस
बिहार के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर संजय सिंह ने जो जानकारी दी है उसमें भी उन्होंने माना है कि 'विरोध प्रदर्शन में कुछ असामाजिक तत्व भी घुस गए हैं, जिसके चलते हिंसा हो रही है। मैं सभी से अपील करता हूं कि कानून को अपने हाथ में ना लें। अभी तक 24 एफआईआर दर्ज की गई है और 125 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।' एडीजी के बयान से हालात की गंभीरता का अंदाजा लग रहा है।

फिर भी चुप क्यों हैं नीतीश कुमार ?
लेकिन, सवाल है कि फिर भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चुप क्यों बैठे हुए हैं। जबकि राज्य का गृह विभाग भी उन्हीं के जिम्मे है और कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ही है। अगर बिहार सरकार पहले दिन से ही उपद्रवियों के खिलाफ थोड़ी सख्ती दिखाती तो यह इतना खौफनाक शक्ल नहीं लेता और शायद दूसरे राज्य भी इसकी चपेट में आने से बच सकते थे।
ललन सिंह दे रहे हैं बयान
इस मामले में नीतीश के दाहिने हाथ और जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने लगातार दो दिन से ट्वीट जरूर किया है, जिसे पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से रिट्वीट किया गया है। शुक्रवार को जारी वीडियो संदेश में मुंगेर के सांसद ने कहा है, 'अग्निपथ योजना से बिहार सहित देश के अन्य राज्यों के छात्रों एवं युवाओं में असंतोष का भाव उभरा है। जगह-जगह हिंसक घटनाएं हो रही हैं, केंद्र सरकार को अविलंब संज्ञान लेकर पुनर्विचार करना चाहिए। छात्रों-युवाओं को भरोसा देना चाहिए कि उनके भविष्य पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।'












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