बिहार SIR को लेकर ADR की सुप्रीम कोर्ट में मांग, हटाए गए 65 लाख वोटरों की जानकारी सार्वजनिक करे चुनाव आयोग
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। इस बीच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (SC) से चुनाव आयोग को बिहार में मसौदा मतदाता सूची (Draft Electoral Rolls) से बाहर रह गए लगभग 65 लाख वोटर्स के नाम और जानकारी पब्लिश करने के निर्देश देने की मांग की।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिनमें चुनाव आयोग के 24 जून के आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें बिहार से शुरू होकर देश भर में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने का निर्देश दिया गया है। अदालत 12 अगस्त को इन मामलों की सुनवाई करेगी।

65 लाख मतदाताओं के नाम और जानकारी देने की मांग
मंगलवार को दायर एक आवेदन में याचिकाकर्ताओं में से एक, एडीआर ने अदालत से अनुरोध किया कि वह चुनाव आयोग को 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से हटाए गए लगभग 65 लाख मतदाताओं के नामों और जानकारी की विधानसभा क्षेत्र और आंशिक या बूथवार सूची प्रकाशित करने का निर्देश दे, जिसमें कारण (मृत, स्थायी रूप से स्थानांतरित, डुप्लिकेट या लापता) भी शामिल हों।
चुनाव आयोग को 7.24 करोड़ फॉर्म प्राप्त
एसआईआर प्रक्रिया के तहत चुनाव आयोग ने आदेश दिया था कि केवल वे मतदाता ही मसौदा मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे जो 25 जुलाई तक गणना फॉर्म (Enumeration Forms) जमा करेंगे। चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य के कुल 7.89 करोड़ रजिस्टर्ड वोटर्स में से 7.24 करोड़ फॉर्म प्राप्त हो चुके हैं, यानी शेष 65 लाख मतदाताओं को हटा दिया गया है।
7 लाख मतदाता एक से अधिक स्थानों पर रजिस्टर्ड
चुनाव आयोग ने 25 जुलाई को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इनमें से 22 लाख मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, 35 लाख या तो स्थायी रूप से पलायन कर गए हैं या उनका कोई पता नहीं चल पाया है और 7 लाख मतदाता एक से अधिक स्थानों पर रजिस्टर्ड हैं।
चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, 20 जुलाई को राजनीतिक दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों (BLA) को उपलब्ध कराई गई सूचियों में प्रत्येक बूथ से मतदाताओं के नाम, मतदाता पहचान पत्र संख्या और उन्हें हटाने के कारण शामिल थे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण द्वारा प्रस्तुत एडीआर ने यह भी अनुरोध किया कि चुनाव आयोग विधानसभा क्षेत्र और भागवार या बूथवार उन मतदाताओं की सूची प्रकाशित करे, जो मसौदा सूची में शामिल थे, लेकिन बूथ स्तरीय अधिकारियों (BLO) द्वारा 'अनुशंसित नहीं' की कैटेगरी में थे, जिसका अर्थ है कि उन्हें 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली अंतिम सूची से हटाया जा सकता है।
लिस्ट में नाम हटाने के कारणों का उल्लेख नहीं
याचिकाकर्ता ने कहा कि चुनाव आयोग ने कुछ राजनीतिक दलों के बीएलए को उन मतदाताओं की सूची उपलब्ध कराई थी जिनके नाम हटा दिए गए थे, लेकिन उस सूची में उनके नाम हटाने के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि 20 जुलाई को पार्टियों को उपलब्ध कराई गई सूचियों के अनुसार, जब फॉर्म जमा करने के लिए पाँच दिन शेष थे, तब फॉर्म न लिए जाने के कारणों का उल्लेख किया गया था। लेकिन, 1 अगस्त को उपलब्ध कराई गई सूचियों में कारण दर्ज करने वाला कॉलम नहीं था।












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