बिहार: पूर्व कानून मंत्री पर गहराया कानून का शिकंजा, कार्तिकेय के ख़िलाफ़ जारी हो सकता है गैर ज़मानती वारंट
कार्तिकेय सिंह के इस्तीफ़ा विपक्षी दलों के हमले की वजह से नहीं हुआ था। इसके पीछ शपथ ग्रहण के बाद से ही सियासत शुरू हो गई थी। विभाग बदलने की वजह से कार्तिकेय नाराज़ चल रहे थे।
पटना, 5 सितंबर 2022। बिहार में सियासी घमासान के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ, नीतीश कुमार ने एनडीए से नाता तोड़कर महागठबंधन से हाथ मिलाया और सरकार बना ली। बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद से ही विपक्षी दलों ने नीतीश की नई सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया। इसी का नतीजा है कि कार्तिकेय कुमार ने कानून मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया। पटना के एएसपी मानवजीत सिंह ने कहा कि पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया जा सकता है। 14 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होगी। आपको बता दें कि दानापुर कोर्ट ने राज्य के पूर्व कानून मंत्री कार्तिकेय सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। अपहरण के एक मामले में सिंह के खिलाफ कथित तौर पर गिरफ्तारी वारंट जारी है।

शपथ के बाद से ही बढ़ी कार्तिकेय की मुश्किलें
कार्तिकेय सिंह के इस्तीफ़ा विपक्षी दलों के हमले की वजह से नहीं हुआ था। इसके पीछ शपथ ग्रहण के बाद से ही सियासत शुरू हो गई थी। विभाग बदलने की वजह से कार्तिकेय नाराज़ चल रहे थे। इसलिए उन्होंने इस्तीफ़ दे दिया।10 अगस्त को कानून मंत्री पद का शपथ लेने के बाद से ही उनकी मुश्किलें बढ़ने लगी थी। कैबिनेट की बैठक में 30 अगस्त को कानून मंत्री कार्तिकेय कुमार का विभाग बदल कर गन्ना मंत्री बना दिया गया।

काफी विचार कर बदला गया विभाग
सूत्रों की मानें तो यह अचानक लिया गया फ़ैसला नहीं था, उनके शपथ से मचे सियासी बवाल के बाद तेजस्वी यादव असहज महसूस कर रहे थे। इसके बाद ही कार्तिकेय कुमार के विभाग बदलने की रणनीति तैयार की जा रही थी। हालांकि लालू प्रसाद को कार्तिकेय कुमार के विभाग में बदलाव नहीं चाहते थे, लेकिन तेजस्वी यादव किसी भी तरह का रिस्क लेना नहीं चाहते थे। इसलिए ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने काफी विचार विमर्श कर कार्तिकेय के विभाग बदलने पर फ़ैसला लिया।

तेजस्वी यादव से पूछ कर लिया गया फ़ैसला
कार्तिकेय कुमार के शपथ के बाद से ही भाजपा ने महागठबंधन सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया था। सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि नीतीश कुमार अपने कैबिनेट में दाग़ी मंत्रियों को नहीं रखते हैं। कार्तिकेय कुमार को मंत्रिमंडल मिलना नीतीश कुमार को नागवार था लेकिन वह क़दम नहीं उठा पा रहे थे। भाजपा के लगातार हमलों के बाद जदयू के दिगग्ज नेताओं को तेजस्वी यादव को मनाया। अपनी बढ़ती लोकप्रियता को देखते तेजस्वी यादव ने कार्तिकेय का विभाग बदलने पर हामी भर दी।

कार्तिकेय कुमार पर अपहरण का आरोप
आपको बता दें कि कार्तिकेय कुमार पर अपहरण का आरोप है और सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ थी कि जिस दिन कोर्ट में उन्हें सरेंडर करना था, उसी दिन उन्होंने मंत्री पद की शपथ ली। वहीं यह भी चर्चा थी कि कोर्ट की नजर में कार्तिक 8 साल से फरार चल रहे थे। वहीं अपने ऊपर लगे आरोपो पर सफाई देते हुए कार्तिकेय कुमार ने कहा था हलफनामें में सारी जानकारी दे चुके हैं। वहीं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कार्तिक पर लगे आरोपों की जानकारी नहीं होने का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया था।
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