4 महीनों में इन 16 खुलासों से भाजपा ने तोड़ दिया नीतीश-लालू का बंधन
पटना। आखिरकार बिहार में महागठबंधन टूट गया। निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुधवार शाम इस्तीफा दे कर सबको चौंका दिया। लेकिन इस गठबंधन के टूटने जमीन 4 महीने पहले से ही बननी शुरू हो गई थी। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी की बिहार इकाई के नेता सुशील कुमार मोदी ने लालू प्रसाद यादव की अगुवाई वाले राष्ट्रीय जनता दल और उनके परिवार पर आरोपों की झड़ी लगा दी।
भाजपा ने 11 अप्रैल से लेकर 4 जुलाई तक करीब 16 बड़े खुलासे किए। भाजपा ने लालू और उनके परिवार से जुड़े भ्रष्टाचार के कई मामले उजागर किए।
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Sushil Modi played master card in breaking Alliance in Bihar । वनइंडिया हिंदी

55 हजार रुपए के निवेश से...
- सुशील कुमार मोदी ने 11 अप्रैल को बिहटा स्थित शराब फैक्ट्री में निवेश के घोटाल का खुलासा किया था। इसमें जिसमें शराब की फैक्ट्री खोलने को लेकर करोड़ों रुपए की डील की बात सामने आई जिसमें मात्र 55 हजार रुपए इन्वेस्ट करने के बाद लालू प्रसाद यादव करोड़ों रुपए की जमीन के मालिक बन गए।
- 13 अप्रैल को भाजपा ने काम के एवज में जमीन और संपत्ति दान घोटाले का खुलासा किया था।
- वहीं फिर 21 अप्रैल को सुशील कुमार ने प्रेस वार्ता कर खुलासा किया था कि डिलाइट मार्केटिंग कंपनी का नाम बदल कर लारा (लालू राबड़ी) प्राइवेट लिमिटेड कर दिया गया था।
- इसके ठीक अगले दिन 22 अप्रैल को इस बात का खुलासा किया गया कि डिलाइट मार्केटिंग, एके इनफोसिस्टम की तर्ज पर तीसरी कंपनी एबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बनाया गया।
- इतना ही नहीं इसी से जुड़े मामले में 24 अप्रैल को फिर खुलासा हुआ कि सरकार में डिप्टी सीएम रहे तेजस्वी यादव का एबी एक्सपोर्ट में 98 फीसदी का शेयर है।
- 3 मई को फिर खुलासा किया गया कि तेजस्वी यादव सिर्फ 5 लाख रुफए का निवेश कर 115 करोड़ रुपए की कंपनी के मालिक बन गए।
- इसके बाद फिर 5 मई को पेट्रोल पंप के आवंटन और जमीन को लीज में हेराफेरी का खुलासा हुआ।
- इसके बाद 12 मई को लालू की बेटी मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार की शेल कंपनियों का खुलासा हुआ। इसमें भी 100 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया।
- 14 मई को मनी लांड्रिंग के मामले में जेल बंद सुरेंद्र जैन ,वीरेंद्र जैन, शराब कारोबारी ओम प्रकाश कत्याल और अशोक कुमार बांठिया की ओर करोड़ों रुपये की जमीन और पूरी कंपनी लालू परिवार को सौंपने पर सवाल किया गया था।
- फिर 16 मई को एक हवाला कारोबारी विवेक नागपाल की कंपनी केएचके होल्डिंग लिमिटेड की ओर से लालू के परिवार को 50 करोड़ रुपए से अधिक कीमत की जमीन सौंपने का खुलासा हुआ था।
- 17 मई को फिर सरकार में स्वास्थ्य मंत्री तेज प्रताप यादव की ओर से औरंगाबाद में अपने नाम से खरीदी गई 45 डेसीमल जमीन को अपने घोषणा पत्र में छिपाया था।
- इसके बाद 30 मई को लालू प्रसाद यादव पर रेल मंत्री रहते हुए सांसद विधायक सहकारी सोसायटी में पांच प्लॉट पर कब्जा करने का आरोप लगा।
- 31 मई को लालू को सांसद विधायक सहकारी सोसायटी के आवासीय भूखंड का व्यावसायिक तौर पर इस्तेमाल करने का जिम्मेदार ठहराया गया।
- 6 जून को पूर्व सीएम राबड़ी देवी की ओर से नौकर ललन चौधरी से जमीन दान में लेने का खुलासा हुआ।
- 14 जून को इस बात का खुलासा हुआ कि राबड़ी को जमीन दान में देने वाला शख्स ललन चौधरी विधानपरिषद में चपरासी है।
- इसके बाद 4 जुलाई को खुलासा हुआ कि लालू की सरकार में मंत्री रहे बृजबिहारी प्रसाद ने चार साल की उम्र में 13 एकड़ जमीन दिया था।

ये 3 आरोप और

मीसा भी आईं घेरे में

16 मई को फिर लगाए गए आरोप

आवासीय खंड का दुरूपयोग













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