पप्पू यादव ने कहा था, अगर मैं 20 साल पहले पैदा होता तो लालू यादव राजनीति में नहीं होते
नई दिल्ली, 14 मई। पप्पू यादव ने एक बार कहा था, ये मेरा दुर्भाग्य है कि मैं लालू यादव के 20 साल बाद पैदा हुआ। अगर में उनके समक्ष या पहले पैदा हुआ होता तो वे लोग (लालू यादव और उनका परिवार) कभी राजनीति में नहीं आते। पप्पू यादव का यह बयान अतिशयोक्तिपूर्ण है लेकिन इसमें गहरे आत्मविश्वास की झलक भी है।

पप्पू यादव का कहना है कि लालू यादव यदि परिवार की मोहमाया में नहीं फंसते तो सामाजिक न्याय की राजनीति आज कमजोर नहीं होती। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है कि पप्पू यादव खुद को बिहार में यादवों का दूसरा सबसे बड़ा नेता मानते हैं। पहले नम्बर पर लालू यादव और दूसरे नम्बर पर पप्पू यादव। इसलिए वे अपने को लालू यादव का वाजिब उत्तराधिकारी मानते हैं। यह दावा लालू यादव और उनके परिवार को तनिक भी नहीं सुहाता। तेजस्वी, लालू यादव का उत्तराधिकार संभाल चुके हैं। फिर भी उन्हें पप्पू यादव के दावे से डर लगा रहता है। अगर जनता ने सचमुच पप्पू यादव को बड़ा नेता मान लिया तो फिर उनका क्या होगा ? इसलिए जब 32 साल पुराना मामले में पप्पू यादव की गिरफ्तारी हुई तो राजद ने इसे नीतीश के इशारे पर खेला गया राजनीति ड्रामा कह दिया। लालू समर्थकों का यह भी कहना है कि राजद के वोट बैंक को तोड़ने के लिए पप्पू यादव की गिरफ्तारी की गयी है। जाहिर है पप्पू यादव का बढ़ता हुआ कद लालू परिवार को कभी रास नहीं आएगा।

क्या लालू के राजनीतिक वारिस पप्पू हैं ?
किसी बड़े नेता के उत्तराधिकारी का चयन जनता करती है। इसके कई उदाहरण हैं। जब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन का निधन हुआ था तो उनकी पत्नी जानकी रामचंद्रन को सीएम की कुर्सी पर बैठाया गया था। लेकिन जब उत्तराधिकार का सवाल जनता की अदालत (चुनाव) में गया तो फैसला जानकी रामचंद्रन की बजाय जयललिता के पक्ष में आया। जनता ने एमजीआर की विरासत जयललिता को सौंप दी। इसी तरह चरण सिंह की राजनीतिक विरासत को मुलायम सिंह यादव ने आगे बढ़ाया था। बाद में अजीत सिंह राजनीति में आये फिर भी वे मुलायम सिंह की बराबरी नहीं कर सके। 1988 में जब बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का निधन हुआ तो लालू यादव उनके उत्तराधिकारी बने थे। कर्पूरी जी जब तक जिंदा रहे अपने पुत्रों को राजनीति में नहीं आने दिया। उनके निधन के बाद ही रामनाथ ठाकुर राजनीति में आये थे। अगर कर्पूरी जी अपने पुत्र को राजनीतिक विरासत सौंपने की जिद करते तो लालू यादव कैसे राजनीति में स्थापित होते ? इन तर्कों के आधार पर पप्पू यादव खुद को लालू यादव का उत्तराधिकारी मानते हैं।

पप्पू यादव के उभार से तेजस्वी फिक्रमंद
पप्पू यादव के मुताबिक, लालू यादव को भी अपने उत्तराधिकार का सवाल जनता पर छोड़ देना चाहिए था। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बड़ा नेता कौन है ? यह जनता तय करती है। जनता उसी नेता को सिर- आंखों पर बैठाती है जो उसके सुख-दुख में शामिल रहे। कोरोना संक्रमण के खतरनाक दौर मे जब जान पर आफत आयी हुई है उस वक्त पप्पू यादव अस्पताल से लेकर श्मशान तक दौड़ लगा रहे हैं। इस बीच पुलिस ने गिरफ्तार कर उन्हें हीरो बना दिया। पहले उनकी सामान्य चर्चा थी। लेकिन अब मकबूल हो गये हैं। राजद की एक चिंता खत्म नहीं हुई थी कि दूसरी आ पड़ी। शहाबुद्दीन मामले में मुस्लिम वोट बैंक को लेकर फिक्रमंद राजद को अब कोसी इलाके में यादवों के छिटकने की चिंता सताने लगी है। पप्पू यादव की गिरफ्तारी को नौटंकी बताये जाने से उनके समर्थकों में नाराजगी है। कुछ लोगों को कहना है कि तेजस्वी यादव की राजनीति को खत्म करने के लिए नीतीश सरकार ने सोच समझ कर यह दांव खेला है। वह चाहती है कि पप्पू यादव विपक्षी राजनीति का केन्द्र बिन्दु बन जाएं ताकि तेजस्वी खुद ब खुद दरकिनार हो जाएं। अगर सच में ऐसी कोई बात है तो यह सरकर पर भी भारी पड़ सकती है। सोशल मीडिया पर लोग खुल कर नीतीश सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर कर रहे हैं।

आग से खेल रही सरकार ?
सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि कोरोना काल में बहुत जरूरी हो तभी गिरफ्तारी होनी चाहिए। कोरोना गाइडलाइंस के हिसाब से किसी भी व्यक्ति को कम से कम मूवमेंट करना है। लेकिन पप्पू यादव को पटना में गिरफ्तार किया गया। पटना से मधेपुरा लाया गया। मधेपुरा से सुपौल के वीरपुर जेल लाया गया। अब वीरपुर जेल से दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती किया गया है। क्या अभी के माहौल में इतनी भागदौड़ होनी चाहिए थी ? पप्पू यादव ने नीतीश सरकार पर आरोप लगाया है कि इतनी जगह ले जा कर क्या उन्हें कोरोना संक्रमित करने का इरादा है ? पप्पू यादव इस संकट को भी मौके में बदलना चाहते हैं। वीरपुर जेल में कुव्यवस्था के खिलाफ उन्होंने भूख हड़ताल कर दी तो जेल प्रशासन के पसीने छूटने लगे। पप्पू यादव ने डॉक्टरों से पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजने की मांग की थी। लेकिन उन्हें दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया। जानकारों का कहना है कि अगर पप्पू यादव पीएमसीएच में रहते तो सरकार विरोधी राजनीति को ताकत मिल सकती थी। इसलिए उन्हें पटना से बाहर रखा गया है। पप्पू यादव का मामल अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। नीतीश सरकार या राजद ने इस मामले में अगर कोई गलती की तो सोशल इंजीनियरिंग का डायनेमिक्स बदल सकता है।
-
MI vs RCB: विराट कोहली ने मुंबई में रच दिया इतिहास, दुनिया में पहली बार हुआ अनोखा कारनामा -
Asha Bhosle Last Post: 'मैं विलीन हो जाऊंगी', निधन से पहले ही आशा ताई ने लिख दिया था 'आखिरी सच' -
MI vs RCB: वानखेड़े में पसरा सन्नाटा, रोहित शर्मा लाइव मैच से बैटिंग छोड़ गए, आखिर क्या है कारण -
Asha Bhosle Net Worth: आशा भोसले कितनी छोड़ गईं प्रॉपर्टी? सिगिंग के अलावा कहां से करती थींं करोड़ों की कमाई -
Asha Bhosle Last Wish: अधूरी रह गई आशा भोसले की अंतिम इच्छा, पॉडकास्ट में बताया था क्या थी स्पेशल ख्वाहिश -
'मैं आखिरी जिंदा मुगल हूं', मंगेशकर परिवार में जन्मीं आशा भोसले ने कब और क्यों कही थी ये बात? -
Asha Bhosle का 92 साल की उम्र में हुआ निधन, मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में दिग्गज सिंगर ने ली आखिरी सांस -
Asha Bhosle: 'बेइंतहा खूबसूरत', कौन हैं जनाई भोसले? क्रिकेटर सिराज से उड़ी थीं अफेयर की खबरें -
Hazeena Syed: 'अपना ईगो अपने बॉयफ्रेंड वेणुगोपाल को दिखाओ', कौन हैं हजीना, जिसने लगाए अलका लांबा पर गंदे आरोप? -
US-Iran Talks: अमेरिका-ईरान में क्यों नहीं बनी बात? होर्मुज से न्यूक्लियर तक, इन 5 वजहों ने रोकी शांति की राह -
Iran US Talk Fail: फंस गया अमेरिका? शांति समझौते की जरूरत ईरान से ज्यादा ट्रंप को? 4 प्वाइंट्स में समझें -
Aaj Ke Match Ka Toss Kon Jeeta 12 April: LSG vs GT, लखनऊ-गुजरात में धुरंधरों की फौज, किसे मिलेगी जीत?












Click it and Unblock the Notifications