ओडिशा में आदिवासियों के लिए सहारा बनी वन धन योजना, मिल रहा जबरदस्त फायदा

भुवनेश्वर, मई 5: भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास परिसंघ (ट्राइफेड) की मुहिम 'संकल्प से सिद्धि'- गांव और डिजिटल कनेक्ट के तहत कई टीम वन धन विकास केंद्रों को एक्टिव करने और ग्रामीणों को इसके बारे में जानकारी देने के लिए गांवों की दौरा कर रही हैं। टीम की ओर से इस तरह के दौरे पूरे देश किए जा रहे हैं। इससे ट्राइफेड की टीम को वन धन विकास केंद्रों के जमीनी स्तर के क्रियान्वयन की देखरेख करने में मदद मिली है।

Van Dhan Yojana

एक राज्य जहां वन धन योजना का कार्यान्वयन तेजी से हो रहा है, वह है ओडिशा। 660 वान धन विकास केंद्रों के साथ, 22 वन धन विकास केंद्र समूहों में शामिल 6300 से अधिक आदिवासी राज्य में सकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहे हैं। पिछले कुछ महीनों में इन समूहों में प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और पैकेजिंग के लिए आवश्यक मशीनरी की खरीद, प्रशिक्षण की प्रक्रिया चल रही है, जो पूरे राज्य में मयूरभंज, क्योंझर, रायगढ़, सुंदरगढ़ और कोरापुट में फैली हुई है। इस महीने की शुरुआत में आदिवासियों द्वारा कच्चे माल का उत्पादन और प्रसंस्करण शुरू किया गया है।

मयूरभंज जिले में आदिवासी लाभार्थियों के तीन समूह- लुगुबुरु वन धन विकास केंद्र क्लस्टर, मां धरित्री क्लस्टर और भीमाकुंड क्लस्टर- साल पत्तियों, साल बीज, कुसुम बीज और जंगली शहद के उत्पादन के लिए साल पत्तियों की प्लेट और कप, कुसम तेल और प्रोसेस्ड शहद पर काम करेंगे। क्योंझर जिले में अंचलिका खंडाधार क्लस्टर के आदिवासी लाभार्थी कच्चे आम, सरसों और हल्दी को आम पापड़, आम के अचार, हल्दी पाउडर और सरसों के तेल में संसाधित करेंगे।

बान दुर्गा क्लस्टर में लघु वन पाद के रूप में इमली, साल बीज और चार मगज बीजों को प्रोसेस करके बिना बीज वाली इमली, इमली केक, साल शैम्पू बनाया जाएगा। अन्य मूल्य वर्धित उत्पाद जिन्हें कोरापुट, रायगढ़ और सुंदरगढ़ जिलों में क्लस्टर में संसाधित किया जाएगा। उनमें इमली का केक, महुआ का तेल, जैविक पैक चावल, नीम का तेल, नीम का केक, चिरोंजी और हल्दी पाउडर शामिल हैं।

कई अन्य पहलों के बीच, जनजातीय कार्य मंत्रालय की संस्था ट्राइफेड ने रोजगार और आय सृजन करने के लिए वन धन जनजातीय स्टार्ट-अप प्रोग्राम भी लागू किया है। यह वो व्यवस्था है जहां लघु वनो पाद की मार्केटिंग का एक तंत्र तैयार किया गया है और जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य और लघु वनो पाद के लिए वैल्यू चेन के विकास से मदद की जाती है।

वन धन आदिवासी स्टार्ट-अप भी इसी योजना का एक घटक है और यह वो कार्यक्रम है जहां वन धन केंद्रों को स्थापित कर लघु वनो पाद की मूल्य संवर्धन, ब्रैंडिंग और मार्केटिंग की जाती है ताकि वन-आधारित जनजातियों के लिए स्थायी आजीविका तैयार की जा सके। इन समूहों के साथ ओडीशा में उत्पादन शुरू करने वाले वन धन विकास केंद्र से पूर्वी राज्य के आदिवासियों तक इस कार्यक्रम की पहुंच बढ़ेगी, जिससे लोगों का जीवन स्तर और आजीविका में सुधार होगा।

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