Flashback Odisha : 2022 में विस से 7वें वेतन आयोग, कॉन्ट्रैक्ट जॉब रेगुलर करने समेत 5 अहम बिल पारित
ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने महिलाओं, बच्चों, शिक्षकों और श्रमिकों के कल्याण के लिए कई प्रावधान किए हैं। इसी दिशा में सरकार ने पांच नए विधेयक पारित कराए हैं।

ओडिशा में नवीन पटनायक की सरकार ने 2022 में कई अहम विधेयक पारित कराए। कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी खत्म करने, बच्चों के लिए नई नीति बनाने, महिलाओं के लिए मिशन शक्ति, शिक्षकों के लिए सातवां वेतन आयोग का लाभ और मनरेगा के तहत मिलने वाले काम में 200 अतिरिक्त दिनों का काम संबंधी बिल शामिल हैं। जानिए किन विधेयकों का क्या मकसद है।
1. संविदा आधारित नौकरियां समाप्त
16 अक्टूबर को, ओडिशा सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। नौ साल पुरानी परंपरा खत्म करते हुए 2013 से चली आ रही संविदा भर्ती प्रणाली को स्थायी रूप से समाप्त कर दिया। निर्णय के परिणामस्वरूप, 57,000 से अधिक अनुबंधित कर्मचारियों की नौकरियां नियमित की गईं।
2. बच्चों के लिए नई नीति
18 नवंबर को, ओडिशा सरकार ने बच्चों के अस्तित्व, सुरक्षा, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा, भागीदारी और उनके इष्टतम विकास और समग्र कल्याण के लिए जरूरी बच्चों के लिए राज्य नीति को मंजूरी दी। नीति में स्वास्थ्य, बाल श्रम, बाल विवाह आदि से बच्चे की सुरक्षा जैसे सात प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस है।
3. मिशन शक्ति को मजबूत करना
नवीन पटनायक की सरकार ने महिलाओं के लिए मिशन शक्ति ऋण का प्रावधान किया है। लोन की राशि 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का फैसला लिया गया है। महिला स्वयं सहायता समूहों को शून्य-ब्याज पर लोन दिया जाता है। 2026-27 तक यानी अगले पांच वर्षों के लिए 'मिशन शक्ति' योजना का विस्तार किया गया है। महिलाओं की इनकम बढ़ाने के लिए कई और प्रावधान भी किए गए हैं।
4. शिक्षकों के लिए 7वां वेतन आयोग
सरकारी सहायता प्राप्त नए गैर सरकारी उच्च विद्यालयों, उच्च प्राथमिक (एमई) विद्यालयों और मदरसों के पात्र सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवां वेतन आयोग लागू करने का ऐलान। 31 दिसंबर, 2021 तक 100 प्रतिशत अनुदान प्राप्त करने वाले लगभग 26,164 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
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5. 200 दिन अतिरिक्त कार्य गारंटी
ओडिशा राज्य-विशिष्ट योजना शुरू करने के मामले में पहला राज्य है। चार जिलों के 20 ऐसे ब्लॉक जहां पलायन अधिक होता है, यहां के लोगों को एक कैलेंडर वर्ष में सरकार अतिरिक्त 200 दिनों के काम और पैसों की गारंटी देती है। इसे महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGS) योजना का समर्थन कहा जाता है। योजना के तहत नौकरी तलाशने वाले मनरेगा के तहत अधिसूचित मजदूरी दर से अधिक और अतिरिक्त मजदूरी के हकदार हैं।












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