बच्चों-किशोरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य नीति बनाएगी ओडिशा सरकार
भुवनेश्वर, 30 मई: पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाले घातक वायरस कोरोना के बाद अब विश्वभर में मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा तेजी से अहम होता जा रहा है। ऐसे में वयस्क और बच्चे को ऐसी स्थिति से निपटने के लिए ओडिशा की पटनायक सरकार नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS) के साथ मिलकर एक मानसिक स्वास्थ्य नीति पर काम कर रही है।

ओडिशा राइजिंग फाउंडेशन के को-फाउंडर राज लक्ष्मी दास ने कहा कि कोविड के बाद राज्य पहले की तरह मानसिक स्वास्थ्य संकट का सामना कर रहे हैं, ऐसे में एक स्वैच्छिक संगठन जो राज्य में मानसिक स्वास्थ्य पर काम करता है। वहीं परामर्श को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए दास ने कहा कि जो नंबर मिले हैं, वो बहुत कम हैं। अभी बड़े पैमाने पर स्क्रीनिंग, परामर्श और उपचार को मजबूत करने की जरूरत है।
वहीं बाल और किशोर मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर शेखर शेषाद्री ने कहा कि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य एक गैर-परक्राम्य सिद्धांत है। इसे एक अभियान मोड में लिया जाना चाहिए। राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ इसे लेकर पहली परामर्श बैठक की गई, जिस पर शेषाद्रि ने कहा कि हमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और हितधारकों से बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, जिन्होंने पहली परामर्श बैठक में भाग लिया था। हम बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक मसौदा नीति बनाने के लिए काम कर रहे हैं।












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