मिशन शक्ति स्कूटर योजना: ओडिशा सरकार ने ईवी की बजाए दिए पेट्रोल स्कूटर, लाभार्थियों में नाराजगी
ओडिशा सरकार ने पहले 'मिशन शक्ति स्कूटर योजना' के तहत राज्य में स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के सदस्यों को इलेक्ट्रिक स्कूटर प्रदान करने की घोषणा की थी, लेकिन ऐसा लगता है कि निर्णय बदल दिया गया है। लाभार्थियों को इलेक्ट्रिक स्कूटर के स्थान पर पेट्रोल से चलने वाले स्कूटर उपलब्ध कराए गए हैं। इस घटनाक्रम से लाभार्थियों में नाराजगी फैल गई है। उनका कहना है कि अब उन्हें वाहन की EMI के साथ-साथ ईंधन की लागत भी वहन करनी होगी।
दरअसल सरकार सब्सिडी प्रदान करके इलेक्ट्रॉनिक वाहनों (ईवी) को बढ़ावा दे रही है, लेकिन हाल ही के मामले ने कई लोगों को परेशान कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्य सरकार ने सामुदायिक सहायता स्टाफ (सीएसएस) और कार्यकारी समिति (ईसी) के सदस्यों की मदद के लिए उन्हें ईवी स्कूटर देने का वादा किया था।

इसके तहत 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया। हालांकि, जब योजना लागू की गई थी, तो लाभार्थियों को कथित तौर पर इलेक्ट्रिक के बजाय पेट्रोल से चलने वाले स्कूटर प्रदान किए गए थे। हालांकि सरकार ब्याज लागत का ध्यान रखेगी और लाभार्थियों को ईंधन लागत के साथ मासिक किश्त भी वहन करनी होगी।
कई लोगों ने सवाल किया कि जब सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों (सीआरपी), मास्टर बुक कीपर्स (एमबीके) और बैंक मित्रों को केवल 3,000 से 7,000 रुपये का मासिक वेतन मिलता है, तो वे ईएमआई का भुगतान कैसे करेंगे? जब बजट एक बार विधानसभा में स्वीकृत हो गया, तो उसे सदन के बाहर कैसे बदला जा सकता है?
बी सिंहपुर से मिशन शक्ति सदस्य स्मिता पटनायक ने पूछा कि अगर सरकार ने हमें इलेक्ट्रिक स्कूटर उपलब्ध कराया होता, तो हमें ईंधन की लागत वहन नहीं करनी पड़ती। हमें प्रति माह 3,000 रुपये की मामूली राशि मिल रही है। 2,000 रुपये की मासिक किस्त का भुगतान करने के बाद, हम केवल 1,000 रुपये में अपना परिवार कैसे चलाएंगे और ईंधन की लागत कैसे वहन करेंगे?












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