मानसून सिर पर, प्राकृतिक आपदा-बाढ़ से निपटने के लिए एकदम तैयार रहें विभाग- नवीन पटनायक

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आज सभी संबंधित विभागों को मानसून के दौरान संभावित बाढ़ या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिए पहले से तैयार रहने का निर्देश दिया।

भुवनेश्वर, 23 जून। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आज सभी संबंधित विभागों को मानसून के दौरान संभावित बाढ़ या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा का सामना करने के लिए पहले से तैयार रहने का निर्देश दिया। आज यहां राज्य स्तरीय प्राकृतिक आपदा प्रबंधन समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, 'महामारी के प्रभावों के बावजूद विभिन्न आपदाओं से निपटने के लिए ओडिशा की विश्व स्तर पर प्रशंसा की गई है। आपदा प्रबंधन के लिए हमारी यह है कि सभी का जीवन कीमती है। राज्य के सभी विभाग सरकार का समग्र दृष्टिकोण अपनाते हुए इसे लागू कर रहे हैं। इससे आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए सर्वोत्तम कदम उठाए जा सकते हैं।

Naveen Patnak

पटनायक ने कहा कि ओडिशा देश के सबसे अधिक आपदा संभावित राज्यों में से एक है। राज्य के लोग नियमति तौर पर कई तरह की आपदाओं जैसे बाढ़, चक्रवात, सूखा आदि का सामना करते हैं। जलवायु परिवर्तन के साथ राज्य में अधिक से अधिक आपदाएं आ रही हैं। 2020-21 में राज्य ने अम्फान और यास तूफान का सामना किया है।

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मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आगे कहा कि बार-बार आने वाले चक्रवातों के स्थाई समाधान के लिए भारी निवेश करने की आवश्यकता है और इस विषय पर केंद्र को भी अवगत कराया गया है। उन्होंने आगे कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून का प्रभाव अब ओडिशा में शुरू हो गया है। उन्होंने आगे कहा कि जून से अक्टूबर का समय सबसे महत्वपूर्ण समय है। इस दौरान कई तरह की प्राकृतिक आपदाएं आने का खतरा रहता है। हमें इस तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।

मीटिंग के दौरान सीएम पटनायक ने सूचना के सभी सिस्टमों, बचाव और राहत कार्यक्रमों, पीने के पानी की सप्लाई, स्वास्थ्य, और पशु देखभाल को लेकर पूरी तरह से तैयार रहने का निर्देश दिया। ओडीआरएफ और अग्निशमन यंत्रों को भी पूरी तरह से मुस्तैद रहने का निर्देश दिया। सीएम ने आगे कहा कि प्रभावित होने वाले इलाकों के लिए भोजना का स्टॉक भी पूरा रखा जाए। उन्होंने आपदाओं के दौरान हरे चारे की व्यवस्था पर जोर देने के साथ पशुधन शिविर स्थापित करने का भी सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के दौरान सभी जिलों में कंट्रोल रूप 24 घंटे खोले जाएं। इसके अतिरिक्त गर्भवती महिलाओं, दिव्यांग लोगों माससिक रूप से विक्षिप्त बच्चों, विधवाओं और बुजुर्गों पर खास ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने आपदा के दौरान लोगों को खोजने और उन्हें बचाने, प्राथमिक उपचार, राहत व्यवस्था, तत्काल मरम्मत, और आवश्यक सेवाओं से संबंधित बुनियादी ढांचे की बहाली और इस दौरान गई हुई नौकरी की बहाली के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। मानवीय सहायता को आपदा से प्रभावित लोगों का अधिकार बताते हुए मुख्यमंत्री ने आपदा से प्रभावित लोगों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने की सलाह दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन में सामूहिक भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण कारक है। उन्होंने सभी आपदा संभावित क्षेत्रों में समूहों की भागीदारी सुनिश्चित करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन पर छात्रों को शिक्षित करने और सरकारी अधिकारियों और प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने आगे कहा कि समाज को प्रकृति के खतरों से निपटने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।

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