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उड़िया और अंग्रेजी के जाने-माने लेखक मनोज दास का निधन, पीएम मोदी ने जताया दुःख

प्रसिद्ध कहानीकार, उड़िया और अंग्रेजी लेखक मनोज दास का मंगलवार को 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
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भुवनेश्वर, 27 अप्रैल। प्रसिद्ध कहानीकार, उड़िया और अंग्रेजी लेखक मनोज दास का मंगलवार को 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा, 'श्री मनोज दास ने एक प्रसिद्ध शिक्षाविद्, लोकप्रिय स्तंभकार और सफल लेखक के रूप में खुल को प्रतिष्ठित किया। उन्होंने अंग्रेजी और उड़िया साहित्य में बहुमूल्य योगदान दिया। वह श्री अरबिंदो के दर्शन के एक प्रमुख प्रतिपादक थे। उनके निधन से पीड़ा हुआ। उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदना। ओम शांति।'

 Manoj Das

मंगलवार को पुडुचेरी के एक नर्सिंग होम में उनका निधन हुआ। दास श्री अरबिंदो आश्रम से जुड़े हुए थे और लगभग पिछले एक साल से आश्रम के ही नर्सिंग होम में टर्मिनल कैंसर का इलाज करा रहे थे। आश्रम के स्रोतों ने बताया कि उन्होंने मंगलवार को रात 8.15 बजे अंतिम सांस ली।

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साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान देने के लिए उन्हें पिछले साल पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें 2001 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

मनोद दास की उड़िया और अंग्रेजी दोनो भाषाओं पर पकड़ थी और दोनों ही भाषाओं में उनकी कहानियों को खूब पसंद किया जाता था। अपने सरल, जादूई और प्रभावपूर्ण लेखन के जरिए उन्होंने न केवल उड़िया भाषियों का दिल जीता बल्कि ग्राहम ग्रीन जैसे महान उपन्यासकार भी उनके लेखन से खासा प्रभावित थे।

एक बार उन्होंने कहा था, 'वह निश्चित रूप से नारायण (आर.के नारायण) की कहानियों के साथ मेरी अल्मारियों में एक जगह ले लेगा। मैं कल्पना करता हूं कि ओडिशा मालगुडी से बहुत दूर है, लेकिन उनकी कहानियो में भी यही गुण है।' उनकी कहानियां उनके राज्य के गांवों में तंगी से जूझ रहे जनमानस के ऊपर होती थीं, वह उन कहानियों को इस तरह शब्दों में पिरोते थे जो पाठक पर गहरा असर छोड़ती थीं। अपनी कहानी, उपन्यास, निबंधों के जरिए उन्होंने गरीब और दबे कुचले लोगों के दर्द को बेहद खूबसूरत ढंग से समाज के सामने रखा।

उनका जन्म ओडिशा के एक छोटे से गांव बालासोर में साल 1934 में हुआ था। उनकी कविता का पहला संस्करण मात्र 14 साल की आयु में छप गया था। आजादी के बाद उडि़या साहित्य को समृद्ध बनाने में उनका जो योगदान रहा उसे कभी नहीं भुलाया जा सकता।

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English summary
Famous writer of Oriya and English Manoj Das passed away, PM Modi expressed grief
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