क्या मध्यप्रदेश में जल्द होंगे पंचायत व निकाय चुनाव, मंत्री भूपेंद्र सिंह ने दिया बड़ा बयान
मध्य प्रदेश में पंचायतों व नगरीय निकाय चुनाव को लेकर कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि हमने निकाय चुनाव की प्रक्रिया को पूर्ण करके राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दिया था, लेकिन कांग्रेस ने कोर्ट में जाकर स्टे ले लिया।
भोपाल, 5 मई। मध्य प्रदेश में एक बार फिर पंचायत और निकाय चुनाव को लेकर सियासत शुरू हो गई है। दरअसल, मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही चाहती थी कि निकाय और पंचायत चुनाव समय पर हों। हमने निकाय चुनाव की प्रक्रिया को पूर्ण करके राज्य निर्वाचन आयोग को भेज दी थी, लेकिन इसके बाद कांग्रेस ने कोर्ट में जाकर स्टे ले लिया, जिससे चुनाव प्रभावित हुए। अगर आज ग्राम पंचायतों में सरपंच के बिना अगर कोई काम प्रभावित हो रहा है, तो उसके लिए कांग्रेस जिम्मेदार है।

ओबीसी वर्ग के आरक्षण पर बोले मंत्री भूपेंद्र सिंह
मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि चुनाव में ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण मिले, इसके लिए हम सुप्रीम कोर्ट गए। मध्य प्रदेश में करीब 50 प्रतिशत ओबीसी आबादी है। उन्होंने कहा कि नौकरी और चुनाव में ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण मिलना चाहिए। इसके लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अधिकृत डाटा पेश किया है।
मंत्री भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट भी सुप्रीम कोर्ट में रखेगी। इसमें ओबीसी वर्ग से जुड़े सारे आर्थिक, सामाजिक व राजनीतिक तथ्य शामिल होंगे।

चुनावी तारीखों का जल्द होगा ऐलान
प्रदेश में लाखों लोगों की नजर पंचायत चुनाव पर टिकी हुई है।जानकारी के अनुसार परिसीमन के बाद वोटर्स लिस्ट का प्रकाशन जल्द किया जाएगा। साथ ही आरक्षण का ऐलान भी किया जाएगा। उसके बाद तारीखों के ऐलान की औपचारिकता भर रह जाएगी। तारीखों के बारे में पुख्ता तौर पर बता पाना तो अभी संभव नहीं है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले तीन चार महीनों के भीतर चुनाव कराए जा सकते हैं।

अभी बाकी है पंचायतों में आरक्षण का काम
मध्य प्रदेश में परिसीमन के बाद पंचायतों की संख्या लगभग 23 हजार हो गई है। पंचायतों के लिए मतदाता सूची 25 अप्रैल तक तैयार होनी थी। इसके बाद पंचायतों में आरक्षण पर भी फैसला लिया जाना था, लेकिन प्रशासन में बैठे अधिकारी और कर्मचारियों के सुस्त तरीके से काम करने के कारण अभी भी काम बाकी है। जबकि मार्च में आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर ही चुनावों को निरस्त कर दिया गया था।

बड़े स्तर पर प्रशासनिक गड़बड़ियां
प्रशासनिक स्तर पर इतनी गड़बड़ियां हुई हैं कि विवाद हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। राजधानी भोपाल में परिसीमन को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिसे सुनवाई के लिए कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। भोपाल कलेक्टर सहित पंचायत व ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव एवं आयुक्त को नोटिस जारी किया गया है।
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