पति के शराब छोड़ने पर साथ रहने को राजी हुई पत्नी, भोपाल में हुई नेशनल लोक अदालत में हुआ समझौता
राजधानी भोपाल में हुई नेशनल लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय द्वारा काउंसलिंग की जाने के बाद पति शराब छोड़ने को तैयार हो गया और पत्नी साथ रहने को तैयार हो गई।

शराब एक ऐसी लत है जो शहीर ही नहीं परिवार और समाज को भी बुरी तरह से दूषित करता। अक्सर शराब पीने के कारण पति-पत्नी में विवाद पैदा हो जाते हैं। ऐसे ही मामला राजधानी भोपाल की नेशनल लोक अदालत में सामने आया। जहां शादी के कुछ दिन बाद ही शराब की लत ने पति-पत्नी के बीच ऐसी दूरी बढ़ाई की दंपति ने एक दूसरे से नाता तोड़ लिया। कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के बाद पति ने शराब छोड़ दी। इस पर पत्नी ने कहा कि वह पहले साथ रहेगी। यदि पति सुधर गए है तो सभी केस वापस ले लेगी और इस तरह शनिवार को नेशनल लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश एसके जोशी के समझाने के बाद दंपत्ति ने सभी केस वापस ले लिए।
पति ने बताया कि अब पत्नी गर्भवती है और 10 साल बाद बच्चे की खुशी जीवन में आने वाली है। कुटुंब न्यायालय में 173 मामलों में से समझौता हुआ दोनों की शादी 2013 में हुई थी। संयुक्त परिवार में रहने के कारण हर दिन विवाद बढ़ने लगा पत्नी मायके चली गई। 2017 में पत्नी ने तलाक का केस लगाया जब जाकर सुले हुई।
55 साल की पत्नी ने मांगा भरण-पोषण
एक 55 वर्षीय पत्नी भरण-पोषण मांगने कोर्ट पहुंची। दंपत्ति की शादी को 28 साल हो चुके हैं 27 और 24 साल की दो संतानें हैं पर उनकी शिकायत थी कि उसने इतने साल पति की सेवा की लेकिन अब उसकी बीमारी में पति उसकी ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं वह खर्च के लिए भी तरसती हैं। पति ने इसी साल जनवरी में केस लगाया था काउंसलिंग में पति ने अपनी गलती मानी और पत्नी का ध्यान रखने का वादा किया। इसके बाद पत्नी ने भी केस वापस ले लिया।
जज ने पौधा देकर सुलह करवाई
नेशनल लोक अदालत में पति-पत्नी के बीच विवाद का एक और मामला सामने आया। जहां बरखेड़ी की रहने वाली पत्नी की शिकायत थी कि उसकी शादी 2019 में हुई थी। लेकिन वह 2 साल से मायके में रह रही है। पति की अविवाहित बुआ और सास पैतृक मकान के किराए का सारा पैसा खुद रख सकती है। पति के मांगने पर भी पति को पैसा देती है जो वह नशे में उड़ा देता है ऐसे में ना पति की नशे की लत छूट रही है और ना उसके पास घर खर्च के लिए पैसा पहुंच रहा है न्यायाधीश के समझाने पर सास बहू दोनों ने सामान्य से रहने के लिए हामी भरी और सास बहू को पौधा देकर भेजा गया न्यायाधीश ने कहा कि पति पत्नी को नहीं बल्कि सास-बहू के बीच सुलह जरूरी है।












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