भोपाल-इंदौर हाईवे पर बनेगा विक्रमादित्य द्वार: CM मोहन यादव ने किया भूमिपूजन, फंदा का नाम बदलने की घोषणा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को भोपाल में सम्राट विक्रमादित्य प्रवेश द्वार का भूमिपूजन किया। यह द्वार भोपाल-इंदौर स्टेट हाईवे (इंदौर-सीहोर रोड) पर फंदा क्षेत्र में बनाया जाएगा और उज्जैन के मौजूदा विक्रमादित्य द्वार की तरह भव्य होगा।
कार्यक्रम महाराणा प्रताप शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, फंदा परिसर में आयोजित हुआ, जहां प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत अत्याधुनिक ई-बस डिपो का भी भूमिपूजन किया गया।

विरासत और विकास का संदेश
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि यह द्वार राज्य की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ आधुनिक विकास का प्रतीक बनेगा। भोपाल के विभिन्न प्रवेश मार्गों पर कुल 9 भव्य द्वार बनाए जाएंगे, जिनमें श्रीराम, श्रीकृष्ण, सम्राट अशोक और विक्रमादित्य जैसे महापुरुषों के नाम होंगे। इससे पहले राजा भोज के नाम पर भोज-नर्मदा द्वार का भूमिपूजन हो चुका है। सीएम ने फंदा क्षेत्र का नाम बदलकर हरिहर नगर करने की भी घोषणा की।
सादगी की मिसाल vs फिजूलखर्ची पर नसीहत
कार्यक्रम में सीएम डॉ. मोहन यादव ने समाज को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, "मृत्यु भोज और शादी में पैसा फालतू मत उड़ाना।" खुद की मिसाल देते हुए बताया कि उन्होंने अपने बेटे की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "सबका साथ, सबका विकास" नारे का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा, "ये बोलने से नहीं, करके दिखाना होगा।"
बता दें कि 30 नवंबर 2025 को उज्जैन के सांवराखेड़ी में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सीएम के बेटे डॉ अभिमन्यु यादव की शादी डॉ इशिता पटेल से हुई थी। एक मंच पर 22 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। वरमाला के दौरान बाबा रामदेव ने मंत्र पढ़े, जबकि बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री सहित कई संत-महात्मा मौजूद थे। सीएम ने नवदंपति को आशीर्वाद दिया। यह आयोजन सादगी और सामाजिक समरसता का प्रतीक बना।
दूसरी ओर: शाही ठाठ-बाट वाली शादी
सीएम की नसीहत के ठीक उलट, दो हफ्ते पहले इंदौर में भाजपा विधायक गोलू शुक्ला (इंदौर-3) के बेटे अंजनेश शुक्ला की शादी बड़े धूमधाम से हुई। शाही अंदाज में आयोजित इस विवाह में मुख्यमंत्री मोहन यादव खुद शिरकत करने पहुंचे और नवदंपति को आशीर्वाद दिया। शादी में डांस के वीडियो वायरल हुए, जिसमें विधायक दंपति सहित कई नेता थिरकते नजर आए। यह आयोजन फिजूलखर्ची का उदाहरण बन गया, जबकि सीएम खुद सादगी की बात कर रहे थे।
समाज में उठ रहे सवाल
सीएम की सादगी की मिसाल सराहनीय है, लेकिन पार्टी के ही एक विधायक की शाही शादी ने बहस छेड़ दी है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि जब मुख्यमंत्री फिजूलखर्ची के खिलाफ बोल रहे हैं, तो उनके सामने ही ऐसा आयोजन कैसे हुआ? विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संदेशों को पूरे संगठन और समाज में लागू करना जरूरी है, तभी "सबका साथ, सबका विकास" साकार होगा।
यह कार्यक्रम विरासत संरक्षण और सामाजिक सुधार का मिश्रण था, लेकिन दिखावे vs सादगी की बहस ने इसे और चर्चित बना दिया। उम्मीद है कि सीएम का संदेश समाज तक पहुंचेगा और फिजूलखर्ची पर लगाम लगेगी।












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