Ujjain News: बड़नगर में विसर्जन के दौरान कैसे हुआ ट्रैक्टर हादसा, 12 डूबे – 2 की मौत, 1 लापता, रेस्क्यू जारी
Ujjain Accident News: विजयदशमी का पावन पर्व, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में एक दर्दनाक हादसे ने शोक की लहर ला दी। इंगोरिया के पास चंबल नदी के घाट पर देवी प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक ट्रैक्टर-ट्रॉली रेलिंग तोड़कर तेज धार में समा गई। ट्रॉली में सवार 12 मासूम बच्चे नदी में डूब गए, जिनमें से 11 को स्थानीय ग्रामीणों ने जान जोखिम में डालकर बाहर निकाला।
लेकिन इलाज के दौरान दो बच्चों की सांसें थम गईं, जबकि एक बच्चा अभी भी लापता है। चार अन्य घायलों को गंभीर हालत में इंदौर रेफर किया गया। एक 12 साल के बच्चे की जिज्ञासावश घुमाई गई चाबी ने यह कहर बरपा कर दिया - ट्रैक्टर स्टार्ट होते ही वह पुल से फिसल गया। एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय टीमें रेस्क्यू में जुटी हैं, लेकिन चंबल का उफान चुनौती बना हुआ है।

कैसे हुआ हादसा? माताजी विसर्जन से मौत के मुहाने तक
2 अक्टूबर 2025, दोपहर करीब 12 बजे। उज्जैन से 40 किमी दूर बड़नगर तहसील के इंगोरिया गांव में विजयदशमी का जश्न जोरों पर था। स्थानीय मंदिर से देवी दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर ग्रामीण नदी घाट की ओर बढ़े। ट्रॉली पर 12 बच्चे सवार थे, जो उत्साह में उछल-कूद कर रहे थे। चालक ने ट्रैक्टर को पुल पर खड़ा किया और चाबी लगी छोड़कर सभी मूर्ति उतारने नदी किनारे चले गए।
तभी एक 12 साल का बच्चा, जश्न के माहौल में दौड़ता हुआ ट्रैक्टर के पास पहुंचा। जिज्ञासावश उसने केबिन में चढ़कर चाबी घुमा दी। इंजन की गर्जना के साथ ट्रैक्टर स्टार्ट हो गया, रफ्तार पकड़ी, और पुल की जर्जर रेलिंग तोड़ते हुए 15-20 फीट नीचे चंबल नदी में धड़ाम से समा गया। ट्रॉली उलट गई, बच्चे पानी में बिखर गए, और चीखें गूंज उठीं। चंबल का जलस्तर मानसून बाद अभी भी ऊंचा था, तेज धारा ने सब कुछ लील लिया।
स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत रस्सियां फेंकीं और हाथ बढ़ाए। 11 बच्चों को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन चार की हालत नाजुक थी। गौतमपुरा अस्पताल ले जाते समय दो - 16 साल का पृथ्वी राज और 8 साल का वंश - ने दम तोड़ दिया। 10 साल का अमीश और 6 साल का अंश को इंदौर के महाराजा यशवंत राजकीय अस्पताल रेफर किया गया। 12 साल का शुभम चौहान अभी भी लापता है, और उसकी तलाश में ड्रोन व बोट से सर्च चल रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉली को क्रेन से नदी से निकाल लिया गया, लेकिन मूर्ति बह गई।
एक ग्रामीण, हरि सिंह पाटीदार, ने बताया, "बच्चे खेल रहे थे। एक ने चाबी दबाई, ट्रैक्टर 10 सेकंड में नदी में था। हम कूद पड़े, लेकिन धारा इतनी तेज कि दो बह गए।" पुलिस ने प्राथमिक जांच में बच्चे की 'गलती' को मुख्य कारण बताया।
पीड़ित परिवारों का मातम: 'मां की विदाई में बच्चों का बिदा'
हादसे ने इंगोरिया के छोटे से गांव को शोकमग्न कर दिया। पृथ्वी राज के पिता, रामेश्वर राजपूत, ने रोते हुए कहा, "वह बड़ा हो रहा था, स्कूल जाता था। विसर्जन देखने गया, और लौटा नहीं। माताजी ने क्यों पुकारा?" वंश की मां, सीता बाई, ने चीखते हुए बताया, "8 साल का लाड़ला... सिर पर हाथ फेरा न सका। बच्चे ने गलती की, लेकिन सजा तो निर्दोषों को मिली।"
अमीश और अंश के परिवार इंदौर में सांस थामे हैं। शुभम चौहान के पिता ने अपील की, "बेटा मिल जाए, जीते-जागते। एसडीआरएफ जल्दी खोजो।" गांव में सन्नाटा पसर गया - विजयदशमी का जश्न अब शोकसभा में बदल गया।
ग्रामीणों की बहादुरी, प्रशासन की देरी
स्थानीय लोगों ने पहला रेस्क्यू किया, फिर एसडीआरएफ की दो टीमें बड़नगर से पहुंचीं। पुलिस ने पुल पर नो-एंट्री का बोर्ड लगाया। उज्जैन कलेक्टर ने शोक जताते हुए घायलों के इलाज का खर्च राज्य वहन करने का ऐलान किया। डीआईजी ने कहा, "लापता बच्चे की तलाश 24 घंटे जारी। चंबल का बहाव तेज है, लेकिन ड्रोन मदद कर रहा।" मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ट्वीट कर संवेदना प्रकट की।
चंबल हादसों का काला इतिहास: बार-बार की चेतावनी
चंबल नदी मध्य प्रदेश-राजस्थान सीमा पर बहती है, और विसर्जन के दौरान हादसे आम हैं। 2022 में कोटा के पास बारात वाली कार नदी में गिरी, 9 की मौत। 2020 में नाव पलटने से 11 डूबे। पिछले साल उज्जैन के पास ही ट्रैक्टर हादसा हुआ। एनजीओ के अनुसार, 5 सालों में 25+ मौतें, ज्यादातर लापरवाही से।












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