दो मंजिला मकान का हिस्सा ढहने से बेवक्त छा गया मातम

इसलिए गिर रही हैं इमारतें
कुदरत कब क्या कर जाए, किसी को कुछ नहीं पता। कब क्या हो जाए इसकी पहले से कभी खबर नहीं होती। मौत भी कभी बोलकर नहीं आती। आजकल मकानों पर पैसा बेशक खर्च होता है लेकिन एक मजबूत नीव और तकनीक का फिर भी आभाव है। थोड़ी आंधी-तूफान में ही घर के घर ढह जाते हैं। अभी पिछले दिनों मुंबई में एक इमारत की दीवार ढह गई थी। वैसे ऐसे कई हर वर्ष एक न एक ऐसा मामला आ ही जाता है। जिससे यह साबित होता है कि तकनीक को बेहतर करने की जरूरत है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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