MP News: दो सगे भाइयों की नैनीताल में जहर खाने की घटना, बुआ पर प्रॉपर्टी हड़पने का आरोप, जानिए पूरा मामला
मध्य प्रदेश के रीवा जिले के दो सगे भाइयों ने उत्तराखंड के नैनीताल जिले में जंगल में जहर खाकर कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया, जिसमें बड़े भाई की मौत हो गई और छोटा भाई अस्पताल में जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहा है। घटना के पीछे माता-पिता की हालिया मौत और पारिवारिक संपत्ति को लेकर बुआ व अन्य रिश्तेदारों की कथित प्रताड़ना सामने आ रही है।
मृतक के मामा अंबिका पांडे ने बड़ा खुलासा करते हुए बुआ पर बच्चों को मानसिक रूप से तोड़ने और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि बुआ की नजर भाइयों के नाम की प्रॉपर्टी पर थी, जिसके चलते वे महीनों से परेशान थे।

मामा ने पुलिस में शिकायत न दर्ज कराने की बात कही, लेकिन रीवा लौटने पर एक्शन लेने का ऐलान किया। यह घटना न केवल पारिवारिक कलह की गहराई दिखाती है, बल्कि बेरोजगारी और मानसिक तनाव जैसे सामाजिक मुद्दों को भी उजागर कर रही है।
पुणे जाने के बहाने 700 किमी दूर उत्तराखंड के जंगल में जहर
30 अक्टूबर (गुरुवार) को नैनीताल जिले के काठगोदाम थाना क्षेत्र के बलूटी रोड किनारे जंगल में दो युवकों को बेहोशी की हालत में पाया गया। घटना की सूचना स्थानीय मजदूरों ने पुलिस को दी। मौके पर पहुंची काठगोदाम पुलिस ने दोनों को तुरंत हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने बड़े भाई शिवेश मिश्रा (22 वर्ष) को मृत घोषित कर दिया, जबकि छोटे भाई बृजेश मिश्रा (20 वर्ष) की हालत गंभीर बनी हुई है। जांच में पता चला कि दोनों ने सल्फास (जहर) का सेवन किया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में विषाक्त पदार्थ की पुष्टि हुई।
परिजनों के अनुसार, दोनों भाई रीवा के रहने वाले थे। उनके माता-पिता की मौत करीब 6 माह पहले जहर खाने से हुई थी-एक पारिवारिक विवाद के चलते। अनाथ हो चुके भाई बेरोजगारी से जूझ रहे थे और रोजगार की तलाश में पुणे (महाराष्ट्र) जाने का प्लान बना रहे थे। 26 अक्टूबर को घर से निकलते समय उन्होंने यही बहाना दिया, लेकिन 700 किमी दूर उत्तराखंड कैसे पहुंचे, यह अब जांच का विषय है। मामा अंबिका पांडे ने बताया कि भाई इतने परेशान थे कि घरेलू झगड़े के बाद भाग निकले। उन्होंने नैनीताल पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचकर शनिवार को शव प्राप्त किया और रीवा ले जाने की तैयारी की।
बुआ ने प्रॉपर्टी के लालच में बच्चों को तोड़ा, आत्महत्या के लिए मजबूर किया
रीवा पहुंचने पर मामा अंबिका पांडे ने मीडिया को बातचीत में बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा, "बच्चों के माता-पिता की मौत के बाद उनकी बुआ (मां की बहन) और अन्य रिश्तेदारों की नजर उनके नाम की संपत्ति पर थी। बुआ ने अपनी दूसरी बहनों और परिवार के साथ मिलकर बच्चों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।
वे महीनों से तंग आ चुके थे, जिसके कारण यह कदम उठाया।" पांडे ने स्पष्ट किया कि अभी पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है, लेकिन रीवा लौटते ही मामला दर्ज करवाएंगे। उन्होंने बुआ का नाम उजागर नहीं किया, लेकिन आरोप आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC धारा 306) के तहत लगाए। यह खुलासा पारिवारिक विवाद को नई मोड़ दे रहा है, जहां संपत्ति का लालच अनाथ भाइयों की जिंदगी बर्बाद करने का कारण बना।
पुलिस ने प्रथम दृष्टया पारिवारिक कलह और बेरोजगारी को कारण बताया। काठगोदाम थाना प्रभारी ने कहा कि बृजेश के होश में आने पर पूछताछ होगी। परिवार के रीवा से रवाना होने के बाद और डिटेल्स सामने आएंगी। मध्य प्रदेश पुलिस भी मामले की निगरानी कर रही है।
2 पॉइंट में समझें पूरा मामला: अनाथ भाइयों का दर्द और पारिवारिक साजिश
जंगल में बेहोशी की हालत में मिले दो भाई: 30 अक्टूबर को काठगोदाम के बलूटी रोड किनारे जंगल में मजदूरों ने दो युवकों को बेहोशी में पाया। पुलिस ने उन्हें हल्द्वानी अस्पताल पहुंचाया। जांच में सल्फास का सेवन पुष्ट हुआ। दोनों रीवा के मिश्रा भाई थे, जो पुणे जाने के बहाने घर से निकले थे लेकिन उत्तराखंड पहुंचे।
बड़े भाई की मौत, छोटा उपचाराधीन; माता-पिता की मौत के 6 माह बाद बुआ की कथित साजिश: शिवेश (22) की मौत हो चुकी, बृजेश (20) का इलाज जारी। माता-पिता की जहर से मौत के बाद बेरोजगारी और बुआ की संपत्ति हड़पने की कोशिश से तनाव। मामा ने बुआ व रिश्तेदारों पर उकसाने का आरोप लगाया।
सोशल मीडिया पर सनसनी: 'पारिवारिक लालच ने लिया अनाथों का जीवन'
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर घटना वायरल हो रही है, हालांकि सटीक पोस्ट्स कम हैं। यूजर्स इसे 'संपत्ति का अभिशाप' बता रहे। एक पोस्ट में लिखा, "रीवा के अनाथ भाई उत्तराखंड में जहर-बुआ का लालच या समाज की नाकामी?" परिवार ने गोपनीयता बनाए रखी, लेकिन मीडिया कवरेज से बहस छिड़ी। विशेषज्ञ मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन (जैसे कि 104) की सलाह दे रहे।
क्या होगा आगे? पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई
रीवा पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया। यदि मामा की शिकायत पर केस दर्ज होता है, तो IPC 306 (आत्महत्या उकसाना) के तहत बुआ व अन्य पर मुकदमा चलेगा। बृजेश की हालत स्थिर है, लेकिन पूछताछ जरूरी। यह घटना अनाथ बच्चों की सुरक्षा और पारिवारिक विवादों के समाधान पर सवाल उठाती है। रीवा जिला प्रशासन ने परिवार को सहायता का भरोसा दिया।
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